हिमाचल में टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म, जयराम ने जूस पिलाकर तुड़वाया आंदोलन,परमिट अवधि बढ़ाने की मांग लेकर किया था प्रदर्शन

हिमाचल में टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर खत्म करवाई। ऑपरेटरों ने परमिट अवधि 12 से 15 साल करने की मांग उठाई।

हिमाचल में टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म, जयराम ने जूस पिलाकर तुड़वाया आंदोलन,परमिट अवधि बढ़ाने की मांग लेकर किया था प्रदर्शन

जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर टैक्सी ऑपरेटरों का आंदोलन खत्म करवाया
परमिट अवधि 12 साल से बढ़ाकर 15 साल करने की मुख्य मांग
ऑपरेटरों ने फिटनेस के आधार पर वाहन चलाने की अनुमति मांगी

मंडी/शिमला: शिमला के चौड़ा मैदान में परमिट अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर चल रही टैक्सी ऑपरेटरों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर धरनास्थल पर पहुंचे और टैक्सी ऑपरेटरों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद उन्होंने जूस पिलाकर आंदोलन समाप्त करवाया।

टैक्सी ऑपरेटर लंबे समय से अपने वाहनों की परमिट अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे थे। ऑपरेटरों की मुख्य मांग है कि परमिट की अवधि 12 साल से बढ़ाकर 15 साल की जाए। उनका कहना है कि मौजूदा नियमों के चलते परमिट अवधि पूरी होने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में यदि वाहन फिटनेस के निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है तो उसे परमिट अवधि पूरी होने के बाद भी सड़क पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।

जयराम ठाकुर ने ऑपरेटरों से की बातचीत

आंदोलन स्थल पर पहुंचे जयराम ठाकुर ने टैक्सी ऑपरेटरों से बातचीत की और उनकी मांगों को समझा। उन्होंने बताया कि टैक्सी ऑपरेटरों की इस मांग को वह पहले ही विधानसभा में सरकार के समक्ष उठा चुके हैं।

जयराम ठाकुर ने भरोसा दिलाया कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी रखा जाएगा, ताकि टैक्सी ऑपरेटरों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यह केवल टैक्सी ऑपरेटरों के कारोबार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

बातचीत के बाद ऑपरेटरों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई। इसके बाद जयराम ठाकुर ने उन्हें जूस पिलाकर हड़ताल खत्म करवाई।

12 से 15 साल परमिट अवधि करने की मांग

टैक्सी ऑपरेटरों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में परमिट की अवधि पूरी होने के बाद वाहन को सड़क पर चलाने में परेशानी आती है। उनका तर्क है कि किसी वाहन की उम्र के साथ उसकी फिटनेस को भी देखा जाना चाहिए। यदि वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों को पूरा करता है तो उसे अधिक समय तक व्यावसायिक तौर पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए।

ऑपरेटरों ने मांग की है कि हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक वाहनों के परमिट से जुड़े नियमों में व्यावहारिक बदलाव किए जाएं। उनका कहना है कि बस, ट्रक, ऑटो, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहनों के परमिट को लेकर भी मौजूदा नियमों की समीक्षा जरूरी है।

अन्य राज्यों की तरह राहत देने की मांग

टैक्सी ऑपरेटरों ने बताया कि दूसरे राज्यों में व्यावसायिक वाहनों को अधिक अवधि तक चलाने की अनुमति दी जाती है। इसी आधार पर वे हिमाचल प्रदेश में भी राहत की मांग कर रहे हैं।

ऑपरेटरों का कहना है कि परमिट अवधि पूरी होने के बावजूद अगर वाहन फिटनेस के लिहाज से सही है, तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। इससे वाहन मालिकों को बार-बार नए वाहन खरीदने के आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है और उनकी आजीविका भी प्रभावित नहीं होगी।

जयराम बोले- सरकार को व्यावहारिक समस्या समझनी चाहिए

जयराम ठाकुर ने सरकार से टैक्सी ऑपरेटरों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से बड़ी संख्या में लोग और उनके परिवार प्रभावित होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि टैक्सी ऑपरेटरों की मांग को केवल एक कारोबारी मांग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवार अपनी आजीविका के लिए व्यावसायिक वाहनों पर निर्भर हैं।

बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त

चौड़ा मैदान में हुई बातचीत के बाद टैक्सी ऑपरेटरों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया। इसके बाद जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर अनशन और आंदोलन समाप्त करवाया।

हालांकि, परमिट अवधि को 12 साल से बढ़ाकर 15 साल करने की मांग अब भी सरकार के समक्ष प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। ऑपरेटरों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला लेगी और फिटनेस के आधार पर व्यावसायिक वाहनों को अधिक अवधि तक चलाने की अनुमति देने पर विचार करेगी।