नेपाल-तिब्बत सीमा पर फिर मंडराया बाढ़ का खतरा! तिब्बत में झील फटी, नेपाल में कई गांव खाली कराए
तिब्बत में झील फटने के बाद नेपाल में कई गांव खाली कराए गए। सेना ने अलर्ट जारी किया। बाढ़ और भूस्खलन से 478 मौतें और 1500 से ज्यादा लापता हैं।
➤ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फटी, भोटेकोशी नदी में बढ़ा पानी
➤ रसुवा में रेस्क्यू ऑपरेशन रोका, नदी के रास्ते में आने वाले गांव खाली कराए गए
➤ नेपाल-तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से 478 मौतें, 1500 से ज्यादा लोग लापता
नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फट गई है। यह झील चोचेन नदी और पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी।
चीन की ओर से एक दिन पहले ही इस झील के फटने की आशंका जताई गई थी। अब झील के फटने के बाद पानी का स्तर बढ़ने लगा है, जिससे सीमा से लगे इलाकों में खतरा और बढ़ गया है।
खतरे को देखते हुए नेपाल के रसुवा जिले में रेस्क्यू ऑपरेशन 90 मिनट के लिए रोक दिया गया है। नदी के रास्ते में आने वाले गांवों को खाली कराया जा रहा है। लोगों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों और बचाव अभियान में जुटे कर्मियों को भी तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में पानी का तेज बहाव देखा जा रहा है। 26 अगस्त की तस्वीरों में भी नदी का बहाव काफी तेज नजर आया था। अब एक और झील के फटने से हालात और गंभीर होने की आशंका बढ़ गई है।
नेपाली सेना ने जारी किया अलर्ट
तिब्बत की तरफ से पानी का बहाव फिर बढ़ने या फैलने की जानकारी मिलने के बाद नेपाली सेना ने भी अलर्ट जारी किया है। सेना ने राहत और बचाव कार्य में लगे सुरक्षाकर्मियों, बचावकर्मियों और आम लोगों से तुरंत सतर्क रहने की अपील की है।
लोगों से कहा गया है कि वे सुरक्षित स्थान पर चले जाएं और आसपास रहने वाले लोगों को भी संभावित खतरे की जानकारी दें। सेना ने लोगों से जरूरतमंदों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद करने की भी अपील की है।
नए सिरे से बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
चीन ने तिब्बत में राहत-बचाव अभियान रोका
नेपाल में नए खतरे के बीच चीन ने भी तिब्बत में राहत और बचाव अभियान रोक दिया है। चीन की ओर से लेवल-4 अलर्ट जारी किया गया है।
यह कदम दोबारा बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए उठाया गया है। झील के फटने के बाद पानी के बहाव को लेकर नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ चिंता बढ़ गई है।
इससे पहले बाढ़ और भूस्खलन ने दोनों देशों के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। कई जगह सड़कें और बस्तियां प्रभावित हुई हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब तक लापता हैं।
478 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल और तिब्बत में अब तक 478 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में करीब 290 भारतीय भी शामिल हैं।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अलग-अलग विवरण में संख्या में अंतर दिखाई दे रहा है। दी गई तबाही की विस्तृत जानकारी के अनुसार नेपाल में 469 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। कुल लापता लोगों की संख्या नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1500 से ज्यादा बताई गई है।
नेपाल में तबाही के आंकड़े
नेपाल में अब तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग अब भी लापता हैं।
लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल बताए गए हैं।
भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के कई हिस्सों में राहत और बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सुरक्षा बलों की मदद ली जा रही है।
तिब्बत में भी भारी नुकसान
तिब्बत में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 558 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल बताए गए हैं।
तिब्बत की तरफ भी बाढ़ और भूस्खलन के कारण हालात गंभीर हैं। नए जलभराव और दोबारा बाढ़ की आशंका के चलते चीन ने राहत और बचाव अभियान को रोक दिया है और लेवल-4 अलर्ट जारी किया है।
रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट पूरी तरह तबाह
बाढ़ और लैंडस्लाइड की भयावहता का अंदाजा रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट की सैटेलाइट तस्वीरों से लगाया जा सकता है। बाढ़ से पहले और बाद की तस्वीरों में बॉर्डर पोस्ट के आसपास का इलाका पूरी तरह बदला हुआ दिखाई देता है।
बाढ़ और भूस्खलन के बाद रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट पूरी तरह तबाह नजर आया। इससे सीमा क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है।
हेलिकॉप्टर से हवाई निरीक्षण की तैयारी
बाढ़ के बाद बनी झील के चीन की ओर बढ़ने की खबरों के बीच भोटेकोशी और रसुवा के आसपास के इलाकों में नए खतरे का जायजा लेने की तैयारी की जा रही है।
त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (RCC) के अधिकारी के मुताबिक, धुंचे और रसुवा में पहले से तैनात हेलीकॉप्टरों को हवाई निरीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
हवाई निरीक्षण के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में पानी के बहाव, बाढ़ से हुए नुकसान और संभावित नए खतरे का जायजा लेने की तैयारी है। इससे राहत और बचाव अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
नेपाली सेना ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को निकाला
इस बीच नेपाली सेना ने रसुवा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। आपदा के बीच सुरंग में फंसे लोगों को निकालना राहत और बचाव अभियान की एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
नेपाल में कई जगह बाढ़ और भूस्खलन के कारण बचाव अभियान मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में सुरक्षाबलों की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।
मृतकों और लापता लोगों की पहचान में जुटे परिजन
आपदा के बाद काठमांडू में भी बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं। त्रिभुवन हॉस्पिटल के मुर्दाघर के बाहर मृतकों की पहचान के लिए तस्वीरें लगाई गई हैं, जिन्हें परिजन देखकर अपने लापता परिवार के सदस्यों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं काठमांडू स्थित ट्रॉमा सेंटर में भी शुक्रवार को लापता लोगों की तस्वीरें देखते लोग नजर आए। लगातार बढ़ती लापता लोगों की संख्या के बीच परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है।
UAE ने नेपाल को 1 करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान किया
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए 1 करोड़ डॉलर की आपातकालीन राहत सहायता देने का ऐलान किया है।
UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के निर्देश पर यह सहायता मुहैया कराई जा रही है। इस सहायता से बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत और मानवीय मदद के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नए खतरे के बीच राहत अभियान के सामने चुनौती
नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक और झील के फटने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता भोटेकोशी और आसपास के इलाकों में पानी के बढ़ते बहाव को लेकर है। पहले से बाढ़ और भूस्खलन की मार झेल रहे इलाकों में दोबारा पानी आने का खतरा राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना रहा है।
नेपाल और चीन दोनों की एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नेपाल में सेना और अन्य सुरक्षा बल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं, जबकि हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों का हवाई निरीक्षण करने की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और नए सिरे से होने वाली तबाही को रोकना है। लगातार बदलते हालात को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
Akhil Mahajan