'9/11 जैसी आपदा से बचाया', भारतीय पायलट की बहादुरी पर नेतन्याहू का बड़ा बयान, पूरे देश को गर्व
फ्लाईदुबई फ्लाइट में भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर चाकू से हमला हुआ। घायल पायलट, यात्रियों और क्रू की कार्रवाई से विमान सुरक्षित तबूक पहुंचा।
➤ कॉकपिट में भारतीय पायलट पर चाकू से हमला, विमान ने तेजी से ऊंचाई खोई
➤ घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, यात्रियों और क्रू ने संभाला मोर्चा
➤ सऊदी अरब में आरोपी पायलट से पूछताछ, ईरान कनेक्शन का ठोस इनपुट नहीं
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई की उस उड़ान में हुई घटना को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसमें एक पायलट ने अपने साथी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया था। नेतन्याहू के मुताबिक, हमले के बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा था और स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला। नेतन्याहू ने कहा कि पायलटों और यात्रियों की तेजी से की गई कार्रवाई ने ऐसी स्थिति को टाल दिया, जो 9/11 जैसी बड़ी विमान आपदा में बदल सकती थी।
यह घटना फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई थी, जो संयुक्त अरब अमीरात से तेल अवीव जा रही थी। विमान में 174 लोग सवार थे। घटना के दौरान कॉकपिट में भारतीय कैप्टन और उनके ओमानी को-पायलट के बीच हिंसक झड़प हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला किया। इसके बाद विमान ने तेजी से ऊंचाई खोनी शुरू कर दी। फ्लाइट ट्रैकिंग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक विमान 30 सेकंड से भी कम समय में करीब 14,000 फीट नीचे आ गया था।
विमान के तेजी से नीचे जाने के दौरान यात्रियों ने कॉकपिट की तरफ से चीखने और चिल्लाने की आवाजें सुनीं। इसी बीच घायल भारतीय कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलने के बाद इजरायली यात्री यानिव हयून, जो पेशे से प्लंबर हैं, कॉकपिट में पहुंचे। नेतन्याहू के अनुसार, हयून ने वहां ओमानी पायलट को विमान के कंट्रोल के साथ छेड़छाड़ करते हुए देखा। इसके बाद उन्होंने विमान के कंट्रोल को पीछे की ओर खींचा। एक अन्य यात्री और क्रू के सदस्य ने भी हमलावर पायलट को काबू करने में मदद की।
स्थिति को संभालने के बाद विमान में मौजूद रिजर्व पायलटों ने कॉकपिट का नियंत्रण अपने हाथ में लिया। विमान को स्थिर किया गया और इसके बाद उसे सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया। इस पूरे घटनाक्रम में घायल भारतीय कैप्टन, यात्रियों, क्रू और रिजर्व पायलटों की भूमिका सामने आई है। नेतन्याहू ने इसी कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि इन लोगों ने बड़ी तबाही को रोकने में अहम भूमिका निभाई।
नेतन्याहू ने भारतीय पायलट की बहादुरी को सराहा
घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा हो रही है। नेतन्याहू ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें सच्चा हीरो बताया। उनके मुताबिक, गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी भारतीय कैप्टन ने मुकाबला किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इससे यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचकर आरोपी पायलट को काबू करने में मदद मिली। नेतन्याहू ने कहा कि इस कार्रवाई से विमान में सवार लोगों की जान बचाने में मदद मिली।
नेतन्याहू ने यह भी बताया कि उन्होंने एयरपोर्ट पर यानिव हयून से मुलाकात की थी। उनके मुताबिक, हयून भारतीय पायलट के खून से सने हुए थे। हयून ने उन्हें घटना के दौरान कॉकपिट में हुई स्थिति के बारे में बताया। इस घटनाक्रम में यात्रियों की त्वरित प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि विमान के नियंत्रण को संभालने और आरोपी को काबू करने के लिए उन्हें तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी।
सऊदी अरब में आरोपी पायलट से पूछताछ
घटना के बाद हमले के आरोपी पायलट को सऊदी अरब में हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। नेतन्याहू ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात ने इजरायल को इस पूछताछ में शामिल होने की अनुमति दी है। घटना के कारण और आरोपी के इरादे को लेकर जांच आगे बढ़ रही है।
इस घटना की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी गई थी। ट्रंप ने भारतीय पायलट को हीरो बताया और कहा कि हमले के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद मांगना महत्वपूर्ण था। उन्होंने यात्री यानिव हयून के कदम की भी तारीफ की।
ईरान कनेक्शन को लेकर अभी ठोस जानकारी नहीं
घटना के संभावित कारणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि जांचकर्ताओं के पास फिलहाल ऐसी कोई खास जानकारी नहीं है, जिससे इस घटना का ईरान से संबंध साबित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी इस तरह का कोई ठोस इनपुट सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले घटना के पीछे किसी खास मकसद को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
नेतन्याहू ने अपने पुराने अनुभव का भी किया जिक्र
फ्लाईदुबई की घटना पर बात करते हुए नेतन्याहू ने अपने पुराने अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1972 में एक हाईजैक विमान से यात्रियों को छुड़ाने वाली इजरायली कमांडो कार्रवाई के दौरान वह घायल हुए थे। उनके भाई योनी नेतन्याहू की 1976 में एंटेबे बंधक बचाव अभियान का नेतृत्व करते हुए मौत हो गई थी। इसी संदर्भ में नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पायलटों और यात्रियों ने ऐसी आपदा को रोक दिया, जो उन्हें 9/11 जैसी स्थिति की ओर जाती दिखाई दे रही थी।
इस पूरे मामले में अब जांच की दिशा आरोपी पायलट के इरादे, कॉकपिट में हुई झड़प और विमान के तेजी से नीचे आने की परिस्थितियों पर केंद्रित है। वहीं, भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका को लेकर भारत और इजरायल में उनकी बहादुरी की चर्चा हो रही है। भारतीय दूतावास के अधिकारी भी उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
Akhil Mahajan