अस्पताल के बाहर हड़ताल पर बैठीं नर्सें:ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध

हरियाणा में नर्सिंग स्टाफ ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में तीन दिन की हड़ताल शुरू की। नर्सों ने सुरक्षा, सहमति और म्यूचुअल ट्रांसफर की मांग रखी।

अस्पताल के बाहर हड़ताल पर बैठीं नर्सें:ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध

➤ 5 से 7 अक्टूबर तक रोजाना 2 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक
➤ विलिंग और म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प खत्म होने पर जताया विरोध
➤ 5500 नर्सिंग ऑफिसरों में करीब 98 प्रतिशत महिलाएं, सुरक्षा और परिवार पर असर की चिंता


हरियाणा सरकार की मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (OTP) के विरोध में नर्सिंग स्टाफ ने सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन ने 5 से 7 अक्टूबर तक रोजाना दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक का ऐलान किया है। सोमवार को झज्जर और पंचकूला में नर्सिंग स्टाफ सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक हड़ताल पर रहा। नर्सें अस्पतालों के बाहर एकत्रित हुईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था में विलिंग और म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प खत्म होने से उन्हें लंबी दूरी पर तबादले का सामना करना पड़ सकता है। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था नर्सिंग कैडर की कामकाजी परिस्थितियों और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखती। हालांकि, हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं, जबकि वार्ड की सेवाएं दो घंटे प्रभावित रहीं और इसका खासा असर दिखाई नहीं दिया।

नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन की राज्य प्रधान विनीता कुमारी ने कहा कि यह पॉलिसी नर्सिंग कैडर की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है। नर्सिंग ऑफिसरों की ड्यूटी मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट शिफ्ट में होती है और कई कर्मचारी महिला हैं। ऐसे में दूसरे जिलों में तबादला होने पर रात की ड्यूटी के दौरान सुरक्षा का सवाल खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार नर्सिंग कैडर पर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करती है, तो नर्सिंग ऑफिसरों को भी अन्य महिला कर्मचारियों की तरह सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक सिंगल शिफ्ट में ड्यूटी दी जानी चाहिए।

एसोसिएशन के मुताबिक, प्रदेश में करीब 5500 नर्सिंग ऑफिसर हैं, जिनमें करीब 98 प्रतिशत महिलाएं हैं। संगठन का कहना है कि मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिला कर्मचारियों का दूसरे जिलों में तबादला होने पर उनकी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि उनकी ड्यूटी की प्रकृति सामान्य कार्यालयी ड्यूटी से अलग है, इसलिए ट्रांसफर पॉलिसी बनाते समय इन परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

नर्सिंग स्टाफ ने एक स्टेशन पर पांच साल पूरे कर चुके कर्मचारियों को जबरन ट्रांसफर ड्राइव में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। संगठन के अनुसार, इस संबंध में HOD (DGHS) को बार-बार पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन उनकी चिंताओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में ट्रांसफर ड्राइव से पहले सभी खाली पदों को पोर्टल पर प्रदर्शित करना शामिल है। संगठन चाहता है कि ट्रांसफर केवल रिक्त पदों पर किया जाए और कर्मचारियों को अपनी सहमति देने का विकल्प भी मिले। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि इससे कर्मचारियों को उपलब्ध पदों और संभावित स्थानों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी तथा अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकेगा।

एसोसिएशन ने नूंह/मेवात और पलवल में तैनात नर्सिंग स्टाफ के लिए भी विशेष अलाउंस की मांग की है। संगठन का कहना है कि इन क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को डॉक्टरों की तर्ज पर विशेष अलाउंस दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही नई भर्ती होने पर इन जिलों में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को उनका होम डिस्ट्रिक्ट आवंटित करने की मांग भी रखी गई है।

नर्सिंग स्टाफ ने जिला अस्पतालों में रोटेशन ड्यूटी जिला सीमा के अंदर रखने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों को अपनी जिला सीमा के भीतर ही रोटेशन ड्यूटी दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से दूसरे जिलों में जाने की परेशानी न हो। इसके अलावा संगठन ने म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प बहाल करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार, इससे कर्मचारी अपनी पारिवारिक परिस्थितियों और ड्यूटी से जुड़ी जरूरतों के अनुसार बेहतर विकल्प चुन सकेंगे।

नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। तीन दिन की पेन डाउन स्ट्राइक के दौरान अस्पतालों के बाहर गेट मीटिंग और नारेबाजी की जा रही है। वहीं, इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलती रहे। संगठन अब अपनी मांगों पर सरकार के रुख का इंतजार कर रहा है।