जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा पर FIR, ₹1,322 करोड़ से ज्यादा के लोन में धोखाधड़ी का आरोप; LIC की शिकायत पर CBI ने दर्ज किया केस

जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा समेत चार लोगों पर ₹1,322 करोड़ से ज्यादा के लोन में धोखाधड़ी के आरोप में LIC की शिकायत पर CBI ने FIR दर्ज की

जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा पर FIR, ₹1,322 करोड़ से ज्यादा के लोन में धोखाधड़ी का आरोप; LIC की शिकायत पर CBI ने दर्ज किया केस

जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा समेत चार लोगों पर FIR दर्ज
LIC का आरोप- फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट से ₹1,322 करोड़ से ज्यादा का लोन लिया
CBI ने 2018 से 2026 के बीच धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और साजिश के आरोप लगाए


नई दिल्ली। जी ग्रुप के फाउंडर और एस्सेल ग्रुप के प्रमुख सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुभाष चंद्रा समेत चार लोगों के खिलाफ ₹1,322 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LIC HFL) की शिकायत के आधार पर की गई है। मामले में सुभाष चंद्रा के अलावा पंकज सुरोलिया, अमिश पांड्या और राजीव ढोलकिया को भी आरोपी बनाया गया है।

LIC की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुभाष चंद्रा ने अपनी कंपनियों के लिए लोन लेने के दौरान फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किया था। इन दस्तावेजों में उनकी व्यक्तिगत संपत्ति काफी अधिक दिखाई गई थी। बाद में जब एस्सेल ग्रुप की कंपनियां कर्ज चुकाने में असमर्थ हुईं और उनके खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई, तो सुभाष चंद्रा ने कथित तौर पर उस नेटवर्थ को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

CBI ने इस मामले में 2018 से 2026 के बीच धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों के तहत कार्रवाई की है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है और फिलहाल किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं हुई है।

₹59,113 करोड़ की नेटवर्थ दिखाकर लिया गया ₹1,322 करोड़ से ज्यादा का लोन

LIC के आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2018 में सुभाष चंद्रा ने मेसर्स वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और अपनी अन्य कंपनियों के लिए लोन लिया था। लोन को मंजूर कराने के लिए एक नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किया गया था।

शिकायत के अनुसार, इस सर्टिफिकेट में सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत कुल संपत्ति ₹59,113 करोड़ दर्शाई गई थी। इसी भारी-भरकम नेटवर्थ को आधार बनाकर LIC HFL ने उनकी कंपनियों को ₹1,322 करोड़ से ज्यादा का लोन दिया था।

बाद में एस्सेल ग्रुप की कंपनियां इस कर्ज को चुकाने में असमर्थ रहीं। इसके बाद सुभाष चंद्रा के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू की गई। इसी प्रक्रिया के दौरान चंद्रा की ओर से कहा गया कि उनकी संपत्ति कभी उतनी थी ही नहीं, जितनी लोन लेते समय LIC HFL को दिए गए सर्टिफिकेट में दिखाई गई थी।

2024 में ₹31.79 करोड़ बताई गई असली नेटवर्थ

मामले में LIC की शिकायत के अनुसार, 2024 में सुभाष चंद्रा की कुल नेटवर्थ ₹31.79 करोड़ थी। चंद्रा की ओर से यह भी कहा गया था कि वर्ष 2017-18 में भी उनकी संपत्ति ₹40,000 करोड़ से अधिक नहीं थी।

यही अंतर अब CBI की जांच के केंद्र में है। एक ओर लोन लेने के समय जमा किए गए नेटवर्थ सर्टिफिकेट में व्यक्तिगत संपत्ति ₹59,113 करोड़ बताई गई थी, वहीं बाद में संपत्ति की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग दावा किया गया।

₹22,000 करोड़ की देनदारी के बदले ₹6.5 करोड़ का ऑफर भी रहा विवादों में

सुभाष चंद्रा से जुड़ी दिवालिया प्रक्रिया पहले भी विवादों में रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने करीब ₹22,000 करोड़ की देनदारी के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़ देकर मामला खत्म करने का प्रस्ताव दिया था।

इस प्रस्ताव को NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) की सिंगल बेंच ने मंजूरी दे दी थी। हालांकि, इस फैसले के बाद भारी विवाद हुआ। इसके बाद NCLT ने मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की बड़ी बेंच गठित की।

सुभाष चंद्रा ने इस बड़ी बेंच के गठन का विरोध किया था। अब LIC की शिकायत के आधार पर CBI द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

कारोबारियों और कंपनियों से जुड़े विवादों की सुनवाई करता है NCLT

NCLT यानी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल कंपनियों और कारोबार से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए बनाई गई सरकारी न्यायिक संस्था है। जब कोई कंपनी या कारोबारी अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ होता है या दिवालिया प्रक्रिया में जाता है, तब बैंक और अन्य कर्जदाता वसूली या कंपनी को दोबारा पटरी पर लाने से जुड़े मामलों में NCLT का रुख करते हैं।

सुभाष चंद्रा से जुड़ी दिवालिया प्रक्रिया में भी NCLT की भूमिका रही है। इसी प्रक्रिया के दौरान देनदारी और भुगतान के प्रस्ताव को लेकर विवाद सामने आया था।

CBI की FIR में चार लोगों के नाम

इस मामले में CBI ने सुभाष चंद्रा, पंकज सुरोलिया, अमिश पांड्या और राजीव ढोलकिया के खिलाफ FIR दर्ज की है। चारों पर वर्ष 2018 से 2026 के बीच धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

मामले की शुरुआत LIC HFL की शिकायत से हुई, जिसमें लोन लेने के लिए कथित तौर पर गलत नेटवर्थ दिखाए जाने का आरोप लगाया गया है। अब CBI की जांच में दस्तावेजों, लोन प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

सुभाष चंद्रा जी मीडिया के मालिक एस्सेल ग्रुप के हेड और जी एंटरटेनमेंट के पूर्व चेयरमैन हैं। उनके खिलाफ दर्ज हुई FIR के बाद ₹1,322 करोड़ से ज्यादा के लोन से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर एस्सेल ग्रुप की वित्तीय और दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े विवादों को चर्चा में ला दिया है।