सोनीपत में किसानों की ट्रैक्टर यात्रा, गन्ने का भाव 600 रुपए करने की मांग

सोनीपत में किसानों ने गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल करने और शुगर मिल टेंडर समस्या के समाधान की मांग को लेकर ट्रैक्टर यात्रा निकालकर धरना दिया

सोनीपत में किसानों की ट्रैक्टर यात्रा, गन्ने का भाव 600 रुपए करने की मांग

सोनीपत में किसानों की ट्रैक्टर यात्रा, 600 रुपए गन्ने के भाव की मांग
मिनी सचिवालय के सामने धरना, मांगें पूरी होने तक जारी रखने का ऐलान
ट्रैक्टर यात्रा से कामी रोड, बस स्टैंड और तिरंगा चौक पर जाम की स्थिति


सोनीपत। गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल करने समेत अन्य मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले किसानों ने सोमवार को सोनीपत में ट्रैक्टर यात्रा निकाली। यात्रा जाहरी चौक से शुरू होकर कामी रोड, बस स्टैंड, गीता भवन और तिरंगा चौक से होते हुए मिनी सचिवालय की ओर रवाना हुई। किसानों ने ऐलान किया है कि मिनी सचिवालय के सामने ट्रैक्टर खड़े कर धरना दिया जाएगा और जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। ट्रैक्टर यात्रा के कारण शहर के अलग-अलग हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ और कई जगह जाम की स्थिति बनी।

जाहरी चौक से शुरू हुई किसानों की ट्रैक्टर यात्रा

किसानों की ट्रैक्टर यात्रा सोमवार को जाहरी चौक से शुरू हुई। इसके बाद किसान ट्रैक्टरों के साथ कामी रोड, बस स्टैंड, गीता भवन और तिरंगा चौक से होते हुए मिनी सचिवालय की ओर बढ़े। यात्रा के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। ट्रैक्टर यात्रा के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और अलग-अलग स्थानों पर जाम की स्थिति देखने को मिली।

600 रुपए प्रति क्विंटल गन्ने का भाव करने की मांग

किसान नेता वीरेंद्र पहल ने कहा कि मौजूदा समय में गन्ने का भाव 415 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों की मांग है कि इसे बढ़ाकर 600 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए। उनका कहना है कि गन्ने के भाव में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिसके कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि गन्ने के भाव को लेकर उनकी मांग लंबे समय से बनी हुई है। इसी मांग को लेकर किसान अब ट्रैक्टर यात्रा के माध्यम से अपनी बात प्रशासन और सरकार तक पहुंचा रहे हैं।

दो बार पंचायत के बाद सरकार को दिया ज्ञापन

वीरेंद्र पहल ने कहा कि किसानों की लगातार 2 बार पंचायत हो चुकी है। इन पंचायतों में राष्ट्रीय स्तर के किसान नेता भी पहुंचे हैं। किसानों की ओर से सरकार को ज्ञापन भी दिया जा चुका है, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस संज्ञान नहीं लिया गया है।

उन्होंने कहा कि किसानों की ओर से अपनी समस्याओं को लगातार उठाया गया है, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद किसानों ने ट्रैक्टर यात्रा निकालकर मिनी सचिवालय के सामने धरना देने का निर्णय लिया।

सोनीपत शुगर मिल के टेंडर का मुद्दा भी उठाया

किसान नेता ने सोनीपत शुगर मिल के टेंडर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण हर साल गन्ने की फसल प्रभावित होती है। किसानों का आरोप है कि शुगर मिल का टेंडर लेने के लिए कोई कंपनी तैयार नहीं है।

किसानों ने इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी समस्या का असर गन्ने की फसल पर पड़ता है और इस मामले में सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप

वीरेंद्र पहल ने टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि अधिकारियों के स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण टेंडर प्रक्रिया में दिक्कत आ रही है। किसानों ने इस मामले में भी सरकार से कार्रवाई और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

मिनी सचिवालय के सामने धरना देने का ऐलान

किसान नेता ने कहा कि ट्रैक्टरों को मिनी सचिवालय के सामने खड़ा किया जाएगा और किसान वहीं बैठकर धरना देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक धरना जारी रखा जाएगा।

किसानों की मुख्य मांगों में गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल करना और सोनीपत शुगर मिल के टेंडर की समस्या का समाधान करना शामिल है। किसानों का कहना है कि इन मुद्दों पर समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

ट्रैक्टर यात्रा से शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित

किसानों की ट्रैक्टर यात्रा के चलते सोनीपत शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। यात्रा के रूट में शामिल कामी रोड, बस स्टैंड, गीता भवन और तिरंगा चौक के आसपास वाहनों की आवाजाही पर असर पड़ा। कई जगह जाम की स्थिति बनी, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

किसानों की ट्रैक्टर यात्रा अब मिनी सचिवालय तक पहुंचकर धरने में तब्दील होगी, जहां किसान अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे।