त्योहार से पहले चीनी के दाम में बंपर उछाल, जानें कहां तक जा पहुंची कीमत
दिवाली से पहले चीनी की कीमतें बढ़कर 59.50 रुपये किलो पहुंच गई हैं। एक महीने में चार रुपये से ज्यादा की तेजी से आम उपभोक्ताओं और मिठाई कारोबारियों का बजट प्रभावित हो सकता है।
➤ दिवाली से चार दिन पहले चीनी की कीमतों में फिर तेजी, खुदरा बाजार में औसत भाव 59.50 रुपये प्रति किलो
➤ पिछले एक महीने में 4 रुपये से ज्यादा और एक साल में करीब 12 से 13 रुपये किलो महंगी हुई चीनी
➤ त्योहारों में बढ़ी मांग, कम उत्पादन और बाजार में सीमित उपलब्धता को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह बताया गया
नई दिल्ली। दिवाली से पहले आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। त्योहार के दौरान मिठाइयां और पकवान बनाने की तैयारी कर रहे परिवारों का बजट अब चीनी की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो सकता है। नवंबर 2026 में दीपावली का त्योहार मनाया जाना है और इससे महज चार दिन पहले ही चीनी के दाम में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने में चीनी की कीमतें 4 रुपये प्रति किलो से अधिक बढ़ चुकी हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव बढ़कर 59.50 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है, जबकि थोक बाजार में इसकी औसत कीमत 55.40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है। त्योहारों के कारण बढ़ती मांग और बाजार में उपलब्धता कम होने को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
खुदरा बाजार में 59.50 रुपये किलो पहुंचा भाव
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 59.50 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं थोक बाजार में औसत कीमत 55.40 रुपये प्रति किलो है।
त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयां, पकवान और अन्य व्यंजन बनाने के लिए चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसके अलावा मिठाई कारोबारियों और खाद्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की ओर से भी मांग बढ़ती है। इसी वजह से बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है।
एक साल में 12 से 13 रुपये तक बढ़े दाम
चीनी की कीमतों में तेजी केवल पिछले कुछ सप्ताह तक सीमित नहीं है। बीते एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो कीमतों में बड़ा अंतर सामने आता है।
एक साल पहले खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव करीब 46.50 रुपये प्रति किलो था। वहीं थोक बाजार में इसकी औसत कीमत 43.23 रुपये प्रति किलो थी। अब खुदरा भाव 59.50 रुपये और थोक भाव 55.40 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।
इस तरह एक साल के दौरान खुदरा बाजार में चीनी करीब 13 रुपये और थोक बाजार में करीब 12 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर पड़ रहा है।
आखिर क्यों लगातार महंगी हो रही चीनी।
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग, गन्ने की पैदावार पर मौसम का असर और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां शामिल हैं।
1. चीनी का उत्पादन कम रहना।
इस साल पिछले सीजन की तुलना में चीनी का उत्पादन कम रहने की बात कही गई है। उत्पादन प्रभावित होने से बाजार में इसकी उपलब्धता पर असर पड़ा है। जब मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होती है तो कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बनता है।
2. त्योहारों में बढ़ जाती है मांग।
दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य मीठे पकवानों की खपत बढ़ जाती है। घरों के साथ मिठाई दुकानों और खाद्य कारोबार से जुड़े व्यापारियों को भी अधिक चीनी की जरूरत होती है। मांग बढ़ने से बाजार में कीमतें ऊपर जा रही हैं।
3. गन्ने की पैदावार पर मौसम का असर।
मौसम में बदलाव और फसल में बीमारियों के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। इसका असर चीनी मिलों के उत्पादन पर पड़ सकता है।
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव।
दुनिया के कई हिस्सों में चीनी की उपलब्धता कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को भी बाजार की परिस्थितियों को प्रभावित करने वाला एक कारण बताया गया है।
5. कारोबारियों के पास स्टॉक जमा होना।
कुछ कारोबारियों की ओर से चीनी का स्टॉक जमा करके रखने की वजह से भी बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित होने की बात कही गई है। इससे आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बिगड़ सकता है।
कीमतें नियंत्रित करने के लिए सरकार ने उठाए कदम
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। इनमें कारोबारियों के चीनी स्टॉक की सीमा तय करना, बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए आयात की अनुमति देना और स्टॉक व कीमतों की निगरानी बढ़ाना शामिल है।
इसके अलावा चीनी मिलों में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू कराने के प्रयास भी किए गए हैं। इन कदमों का उद्देश्य बाजार में चीनी की आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकना है।
हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद चीनी के दाम में कमी देखने को नहीं मिली है। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के कारण कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
दिवाली की खरीदारी पर पड़ेगा असर
त्योहारों के मौसम में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम परिवारों से लेकर मिठाई कारोबारियों तक पड़ सकता है। घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने वालों को पहले के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
खास बात यह है कि चीनी के दाम में पिछले एक साल से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ऐसे में त्योहारों के दौरान रसोई का बजट संभालना उपभोक्ताओं के लिए चुनौती बन सकता है।
Akhil Mahajan