भांजी के हत्यारे मौसा-मौसी समेत 6 को उम्रकैद
सिरसा में अमृतपाल कौर हत्या मामले में कोर्ट ने मौसा-मौसी समेत छह दोषियों को उम्रकैद सुनाई। अदालत ने जुर्माना और नाबालिग बेटी के गुजारा भत्ते के आदेश दिए।
➤ मकान विवाद और मुकदमे की रंजिश में अमृतपाल कौर की हत्या का मामला
➤ 29 अप्रैल 2022 को तलवार से हमला कर महिला की हत्या की गई थी
➤ कोर्ट ने छह दोषियों को उम्रकैद और कुल डेढ़ लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई
हरियाणा के सिरसा में चार साल पुराने महिला हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। डॉ. नरेश सिंघल की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अमृतपाल कौर की हत्या के मामले में उसके मौसा-मौसी समेत छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर कुल डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पीड़ित पक्ष के एडवोकेट अमित मेहता के अनुसार, अदालत ने मृतका की नाबालिग बेटी के गुजारा भत्ते के लिए दोषियों से दो लाख रुपये वसूलने के आदेश भी दिए हैं। यह मामला गांव में मकान बनाने को लेकर शुरू हुए विवाद और उसके बाद दर्ज कराए गए केस से जुड़ा था।
अमृतपाल कौर की 29 अप्रैल 2022 को गर्दन काटकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि गांव में मकान बनाने को लेकर उसका अपने मौसा पप्पू सिंह और मौसी किरना रानी के साथ विवाद चल रहा था। अमृतपाल ने मौसा के परिवार के खिलाफ केस भी दर्ज कराया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी रंजिश के चलते पप्पू सिंह ने अपनी पत्नी किरना रानी, बेटे जसविंदर सिंह, दामाद नवदीप, राजू और गांव के रहने वाले सुरेंद्र सिंह के साथ मिलकर अमृतपाल पर हमला किया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
नाबालिग बेटी मां के साथ रहती थी
पुलिस को दी गई शिकायत में सुखचैन गांव निवासी कमलजीत कौर ने बताया था कि वह उस समय 10वीं कक्षा में पढ़ती थी और नाबालिग थी। वह अपनी मां अमृतपाल कौर के साथ पिपली गांव में रहती थी। करीब 11-12 साल पहले उसके माता-पिता का तलाक हो गया था। इसके बाद कमलजीत अपनी मां के साथ रहने लगी। करीब आठ साल पहले दोनों ने पिपली गांव में अपना मकान बनाकर रहना शुरू किया था।
कमलजीत के मुताबिक, पिपली में प्लॉट उसकी मां की मौसी किरना रानी ने दिलवाया था। दोनों के मकान आमने-सामने थे। शिकायत के अनुसार, मकान बनने के बाद रानी और उसके परिवार की ओर से अमृतपाल तथा उसकी बेटी को वहां से मकान छोड़कर चले जाने के लिए कहा गया। अमृतपाल ने घर छोड़ने से मना कर दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।
केस वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप
कमलजीत ने पुलिस को बताया था कि इसके बाद रानी और उसके परिवार की ओर से उसकी मां के साथ मारपीट की गई। इस मामले में कोर्ट में केस चल रहा था। शिकायत के अनुसार, केस वापस लेने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था। इसी दौरान 29 अप्रैल 2022 को अमृतपाल पड़ोस के मकान से अपने घर लौट रही थी।
शिकायत के मुताबिक, शाम करीब 5 बजे जैसे ही अमृतपाल अपने घर के दरवाजे के पास पहुंची, पप्पू सिंह, उसका बेटा जसविंदर सिंह, दामाद नवदीप, राजू और सुरेंद्र सिंह वहां पहुंच गए। आरोप है कि सभी ने अपने चेहरे ढके हुए थे। उनके हाथों में तलवार, तेजधार हथियार और पिस्तौल थी।
तलवार से हमला कर हत्या का आरोप
कमलजीत के अनुसार, आरोपियों ने उसकी मां पर हमला कर दिया। हमले में अमृतपाल के गर्दन और शरीर पर कई वार किए गए। आरोप है कि हमलावरों ने तलवार से उसकी गर्दन काट दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शोर सुनकर कमलजीत घर से बाहर आई तो आरोपी हथियार लेकर वहां से फरार हो गए।
कमलजीत ने अपनी मां को मृत अवस्था में देखा। इसके बाद उसने पुलिस और अपने मामा गुरदीप को फोन कर घटना की जानकारी दी। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
पुलिस जांच के बाद कोर्ट में पहुंचा मामला
मामले में कालांवाली थाना पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 और 302 तथा आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के दौरान मामले से जुड़े तथ्य जुटाए और आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
मामले की सुनवाई के बाद अब फास्ट ट्रैक कोर्ट ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर कुल डेढ़ लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। पीड़ित पक्ष के एडवोकेट अमित मेहता के अनुसार, अदालत ने मृतका की नाबालिग बेटी के गुजारा भत्ते के लिए दोषियों से दो लाख रुपये वसूलने के आदेश दिए हैं।
इस फैसले के साथ 29 अप्रैल 2022 को अमृतपाल कौर की हत्या से जुड़े मामले में अदालत की सुनवाई का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है।
Akhil Mahajan