रामपाल के दामाद संजय उर्फ फौजी को हाई कोर्ट से जमानत, 2014 के सतलोक आश्रम हिंसा मामले में 4 साल से था जेल में बंद
रामपाल के दामाद संजय उर्फ फौजी को 2014 सतलोक आश्रम हिंसा मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिली, हिसार कोर्ट का आदेश रद हुआ।
➤ सतलोक आश्रम हिंसा मामले में संजय उर्फ फौजी को हाई कोर्ट से नियमित जमानत
➤ हिसार कोर्ट का 15 अप्रैल 2026 का जमानत खारिज करने वाला आदेश हुआ रद
➤ हाई कोर्ट ने ‘जमानत नियम, जेल अपवाद’ के सिद्धांत पर दिया जोर
चंडीगढ़। वर्ष 2014 के सतलोक आश्रम हिंसा मामले में रामपाल के दामाद एवं पूर्व सैनिक संजय उर्फ फौजी को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने संजय उर्फ फौजी को नियमित जमानत दे दी है। वह इस मामले में करीब चार साल से जेल में बंद था। अदालत ने हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की ओर से 15 अप्रैल 2026 को उसकी नियमित जमानत की मांग खारिज किए जाने वाले आदेश को भी रद कर दिया है।
यह मामला 18 नवंबर 2014 का है, जब बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस रामपाल की गिरफ्तारी के लिए हाई कोर्ट की ओर से जारी वारंट की तामील कराने पहुंची थी। इस दौरान आश्रम में मौजूद बड़ी संख्या में अनुयायियों और पुलिस के बीच हिंसक टकराव हुआ था। मामले की एफआईआर के अनुसार आश्रम की छत पर करीब 1500 से 2000 युवक मौजूद थे। आरोप है कि इनमें कई लोग लाठी, डंडों और बंदूकों से लैस थे।
पुलिस के आश्रम पहुंचने के बाद स्थिति बिगड़ गई और पुलिस पर पथराव तथा फायरिंग की गई। इसके अलावा पेट्रोल बम फेंके जाने और जेसीबी को आग लगाने की बात भी मामले की जांच में सामने आई थी। इस हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया फैसला
संजय उर्फ फौजी की नियमित जमानत याचिका पर जस्टिस राजेश भारद्वाज और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने सुनवाई की। हाई कोर्ट ने मामले में उसकी जमानत मंजूर करते हुए हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का 15 अप्रैल 2026 का आदेश रद कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद संजय उर्फ फौजी को इस मामले में जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में ‘जमानत नियम, जेल अपवाद’ के सिद्धांत पर भी जोर दिया।
पुलिसकर्मियों पर हिंसा का गंभीर आरोप
सतलोक आश्रम में हुई हिंसा के दौरान पुलिस और आश्रम में मौजूद लोगों के बीच टकराव काफी गंभीर हो गया था। मामले में पुलिस की ओर से दर्ज आरोपों के अनुसार पुलिसकर्मियों पर पथराव और फायरिंग की गई थी तथा पेट्रोल बम भी फेंके गए थे।
हिंसा में कुल 111 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इनमें आठ पुलिसकर्मियों को गोली लगी थी, जबकि एक पुलिसकर्मी झुलस गया था। इसके अलावा 17 पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई थीं और 85 पुलिसकर्मियों को सामान्य चोटें लगी थीं।
संजय उर्फ फौजी पर क्या आरोप लगे थे
पुलिस जांच में आरोप लगाया गया था कि रामपाल अपने अनुयायियों की एक ‘मिनी आर्मी’ चला रहा था। जांच एजेंसी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि रामपाल का दामाद संजय उर्फ फौजी पूर्व सैनिक होने के कारण इस कथित समूह के सदस्यों को हथियार तथा लाठी-डंडे चलाने का प्रशिक्षण देता था।
इसी आधार पर संजय उर्फ फौजी को भी 2014 की हिंसा के मामले में आरोपी बनाया गया था। मामले में उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए और वह लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा था।
चार साल से जेल में था संजय
संजय उर्फ फौजी करीब चार साल से जेल में बंद था। नियमित जमानत के लिए उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 अप्रैल 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद उसने हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की। अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उसकी याचिका मंजूर करते हुए निचली अदालत के जमानत संबंधी आदेश को रद कर दिया है।
2014 की घटना से जुड़ा है पूरा मामला
सतलोक आश्रम हिंसा का यह मामला नवंबर 2014 में उस समय सामने आया था, जब पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए बरवाला स्थित आश्रम पहुंची थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान आश्रम में बड़ी संख्या में अनुयायी मौजूद थे और स्थिति हिंसक हो गई थी।
पुलिस के मुताबिक, भीड़ ने कार्रवाई का विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। पथराव, फायरिंग और पेट्रोल बम फेंके जाने के साथ जेसीबी में आग लगाने की घटना भी दर्ज की गई थी। इस हिंसा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
अब इस पुराने और गंभीर मामले में रामपाल के दामाद संजय उर्फ फौजी को हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Akhil Mahajan