जंतर-मंतर से150 प्रदर्शनकारी हिरासत में,दिल्ली के 12 मेट्रो स्टेशन बंद,मुंबई में भी प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR के विरोध में प्रदर्शन के दौरान सौरभ भारद्वाज समेत 150 लोग हिरासत में लिए गए। सुरक्षा के मद्देनजर 12 मेट्रो स्टेशन बंद रहे, जबकि मुंबई में भी प्रदर्शन हुआ।

जंतर-मंतर से150 प्रदर्शनकारी हिरासत में,दिल्ली के 12 मेट्रो स्टेशन बंद,मुंबई में भी प्रदर्शन

दिल्ली में SIR के विरोध में बड़ा प्रदर्शन

➤ जंतर-मंतर से सौरभ भारद्वाज समेत 150 हिरासत में 

➤ एहतियात के तौर पर 12 मेट्रो स्टेशन बंद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के विरोध को लेकर गांधी जयंती के दिन देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लेफ्ट पार्टियों, आम आदमी पार्टी (AAP) और विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े तमाम प्रदर्शनकारी भारी संख्या में एकजुट हुए। प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 'आप' नेता सौरभ भारद्वाज समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर और उसके आसपास के पूरे इलाके में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे, जहां दिल्ली पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को भी तैनात किया गया था।

प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए राजधानी दिल्ली में कई एहतियाती कदम उठाए गए। जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत करने के साथ-साथ कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार भी बंद कर दिए गए। आधिकारिक विवरण के अनुसार, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस और लोक कल्याण मार्ग समेत कुल 12 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद रखे गए ताकि प्रदर्शन के दौरान उमड़ने वाली भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मजबूत बैरिकेडिंग की थी और सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी के बीच प्रदर्शनकारियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार मौके पर मौजूद रहकर पूरी स्थिति का जायजा लेते रहे।

इस विरोध प्रदर्शन में राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई, जिसके तहत आरजेडी (RJD) सांसद मनोज झा भी जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने अपने संबोधन में देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और गांधी जयंती के ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है तथा एसआईआर एवं निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए। उनके बयानों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को लेकर भी तीखे राजनीतिक आरोप लगाए गए। इस दौरान दिल्ली के अन्य हिस्सों जैसे अशोका रोड से भी प्रदर्शनकारियों के जुटने की खबरें आईं, जबकि दूर-दराज के राज्यों जैसे राजस्थान से भी कुछ बुजुर्ग इस आंदोलन में शामिल होने के लिए विशेष तौर पर दिल्ली पहुंचे थे।

दूसरी ओर, मुंबई में भी एसआईआर और निर्वाचन प्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई थी। 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) संगठन की ओर से मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का बड़ा आह्वान किया गया था। इस संगठन द्वारा मुख्य रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग की जा रही है। शिवाजी पार्क में प्रस्तावित इस आयोजन के मद्देनजर मुंबई पुलिस ने भी अपनी चौकसी बढ़ा दी और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने युवाओं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए पुराने आंदोलनों की तर्ज पर मुंबई से एक बार फिर बड़े स्तर पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की बात कही। बहरहाल, गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली और मुंबई में हुए इन प्रदर्शनों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बार फिर तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है।