प्रेम कीटाणु में न रोमांस जमा, न कॉमेडी ने हंसाया ?वीर पहाड़िया की फिल्म को मिली 1.5/5 रेटिंग
प्रेम कीटाणु में वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की प्रेम कहानी रोमांस और कॉमेडी के मोर्चे पर कमजोर पड़ती है। जानें फिल्म की कहानी, अभिनय और समीक्षा।
‘प्रेम कीटाणु’ में न रोमांस का असर दिखता है, न कॉमेडी हंसा पाती है
➤ वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की केमिस्ट्री कहानी को वह मजबूती नहीं दे पाती
➤ अपारशक्ति खुराना और निखिल विजय के कुछ सीन फिल्म में जरूर ध्यान खींचते हैं
प्रेम कीटाणु दोस्ती और प्यार के बीच उलझी एक हल्की-फुल्की प्रेम कहानी है। फिल्म में आज के युवाओं की उलझनें, करियर को लेकर परेशानियां और रिश्तों को लेकर अलग-अलग सोच दिखाई गई है। कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज में आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है, लेकिन फिल्म जिस रोमांस और कॉमेडी पर टिकी है, वह पर्दे पर अपेक्षित असर नहीं छोड़ पाती।
फिल्म में वीर पहाड़िया, आफिया सैयद, अपारशक्ति खुराना, निखिल विजय और राकेश बेदी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसका निर्देशन अपूर्व सिंह कार्की ने किया है, जबकि कहानी और लेखन की जिम्मेदारी दीपक किंगरानी और गिरीश ए.डी. ने संभाली है। फिल्म के निर्माता गौरव वर्मा हैं। ‘प्रेम कीटाणु’ 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई है और इसे 1.5/5 की रेटिंग दी गई है।
दोस्ती से शुरू हुई कहानी प्यार और रिश्तों की उलझन में फंसती है
फिल्म की शुरुआत सुहानी (आफिया सैयद) के एक मजेदार हादसे से होती है। वह अपने पिता को गले लगाने जाती है, लेकिन गलती से विशाल (वीर पहाड़िया) को गले लगा लेती है। इसके बाद दोनों के बीच छोटी-सी नोकझोंक होती है और दोनों एक-दूसरे को श्राप देते हैं कि अब चार साल तक सिंगल रहेंगे।
कुछ समय बाद एक शादी में दोनों की दोबारा मुलाकात होती है। इस बार विशाल को एहसास होता है कि वह सुहानी को पसंद करने लगा है। यहीं से कहानी में एक नया मोड़ आता है। सुहानी के ऑफिस में उसके साथ काम करने वाला रंजीत (अपारशक्ति खुराना) भी उसे पसंद करता है।
विशाल की अपनी जिंदगी भी बहुत व्यवस्थित नहीं है। वह नौकरी की तलाश में है और आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना चाहता है। इसके लिए उसे पैसे जुटाने हैं। दूसरी ओर रंजीत की नौकरी अच्छी है और वह सुहानी के सामने ज्यादा व्यवस्थित नजर आता है।
सुहानी ने अपने होने वाले पार्टनर को लेकर एक चेकलिस्ट भी बना रखी है। ऐसे में विशाल, रंजीत और सुहानी के बीच रिश्तों की उलझन कहानी को आगे बढ़ाती है। इस पूरे सफर में विशाल का दोस्त मगन (निखिल विजय) भी उसके साथ रहता है।
वीर पहाड़िया के अभिनय में रोमांस और कॉमेडी का असर कम
फिल्म की सबसे बड़ी दिक्कत वीर पहाड़िया से जुड़ी नजर आती है। विशाल के किरदार में न प्यार की बेचैनी ठीक से दिखाई देती है और न ही कॉमेडी का असर पैदा होता है। कई बार ऐसा लगता है कि विशाल को प्यार हो चुका है, लेकिन वीर के एक्सप्रेशन तक इसकी खबर नहीं पहुंची।
वीर 31 साल के हैं और फिल्म में कॉलेज स्टूडेंट का किरदार निभा रहे हैं। उम्र को यहां समस्या नहीं माना जा सकता। आमिर खान ने 44 साल की उम्र में ‘3 इडियट्स’ में कॉलेज स्टूडेंट का किरदार निभाया था। अपने लुक और बॉडी लैंग्वेज से उन्होंने उस किरदार को विश्वसनीय बनाया था। वीर यहां वैसी सहजता नहीं ला पाते। खासकर रोमांटिक और इमोशनल दृश्यों में उनके एक्सप्रेशन कई बार निराश करते हैं।
आफिया सैयद की शुरुआत ठीक-ठाक, लेकिन जोड़ी नहीं छोड़ती खास असर
आफिया सैयद निर्माता साजिद नाडियाडवाला की भांजी हैं और इस फिल्म से हिंदी फिल्मों में डेब्यू कर रही हैं। उनका काम ठीक-ठाक है। हालांकि, वीर पहाड़िया के साथ उनकी केमिस्ट्री भी उस स्तर का असर नहीं छोड़ती, जिसकी इस प्रेम कहानी को जरूरत थी।
फिल्म का बड़ा हिस्सा विशाल और सुहानी के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमता है। ऐसे में दोनों कलाकारों के बीच सहज और प्रभावी केमिस्ट्री कहानी की अहम जरूरत थी, लेकिन यह पहलू फिल्म को मजबूती नहीं दे पाता।
अपारशक्ति और निखिल विजय ने कई जगह संभाला मोर्चा
अपारशक्ति खुराना रंजीत के किरदार में अच्छे लगते हैं। उनका कॉरपोरेट लुक और बॉडी लैंग्वेज किरदार पर जमती है। वह न तो जरूरत से ज्यादा कुछ करते हैं और न ही किरदार को खींचते हैं। उनका अभिनय कहानी के इस हिस्से को सहज बनाए रखता है।
निखिल विजय भी अपने पंचों से ध्यान खींचते हैं। मगन के किरदार में उनके कई डायलॉग और रिएक्शन अच्छे बैठते हैं। कुछ जगह तो वह वीर पहाड़िया से भी ज्यादा इम्प्रेसिव नजर आते हैं।
वहीं राकेश बेदी अपने अनुभव के मुताबिक सुहानी के पिता के किरदार में ठीक लगते हैं। खासकर फिल्म के आखिर में उनके हिस्से आए लंबे संवाद को उन्होंने अच्छी तरह संभाला है।
‘प्रेमलू’ के हिंदी एडेप्टेशन में मूल फिल्म वाली सहजता नहीं
‘प्रेम कीटाणु’ 2024 की मलयालम सुपरहिट ‘प्रेमलू’ का हिंदी एडेप्टेशन है। ओरिजिनल फिल्म को उसकी मासूमियत, मस्ती और किरदारों की सहजता के लिए खूब पसंद किया गया था। हिंदी फिल्म में कहानी और किरदारों में बदलाव किए गए हैं।
निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की के पुराने काम को देखते हुए ‘प्रेम कीटाणु’ से उम्मीद होना स्वाभाविक है। ‘एस्पिरेंट्स’ में दोस्ती और प्यार से जुड़ी बातें काफी नैचुरल लगी थीं। ‘सास बहू अचार प्राइवेट लिमिटेड’ में भी रिश्तों को दिल के करीब महसूस कराया गया था।
लेकिन ‘प्रेम कीटाणु’ में वैसा असर खास तौर पर महसूस नहीं होता। फिल्म में सीन बहुत हैं, लेकिन याद रह जाने वाले सीन कम हैं। कई जगह ऐसा लगता है कि एक सीन खत्म हुआ और कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अगला सीन शुरू कर दिया गया।
सात गानों के बीच कहानी की रफ्तार भी प्रभावित होती है
फिल्म में सात गाने हैं। कई मौकों पर ऐसा महसूस होता है कि कहानी से ज्यादा गाने जल्दी में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इससे कहानी के प्रवाह पर भी असर पड़ता है।
स्क्रीनप्ले में कई जगह सीन सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। उनमें वह शरारत और मजा नहीं आता, जिसकी एक हल्की-फुल्की प्रेम कहानी से उम्मीद की जाती है।
राइटिंग के स्तर पर फिल्म के पास कई अच्छे मौके थे। खासकर विशाल-सुहानी की दोस्ती, प्यार और रंजीत वाले ट्रैक में कहानी को और मजेदार बनाया जा सकता था। लेकिन फिल्म इन मौकों को पूरी तरह भुना नहीं पाती।
कमजोर केमिस्ट्री ने प्रेम कहानी का असर किया कम
‘प्रेम कीटाणु’ की कहानी का आधार दोस्ती से प्यार तक पहुंचने वाला रिश्ता है। इसके साथ करियर, नौकरी, पढ़ाई और पार्टनर को लेकर सुहानी की सोच को भी जोड़ा गया है। लेकिन इन सभी पहलुओं के बावजूद फिल्म की प्रेम कहानी वह भाव पैदा नहीं कर पाती, जिसकी जरूरत थी।
विशाल और सुहानी के बीच रिश्ते का विकास कहानी का अहम हिस्सा है, लेकिन दोनों की केमिस्ट्री कमजोर रहने के कारण दर्शक उस रिश्ते से उतना जुड़ नहीं पाते। दूसरी ओर, रंजीत का ट्रैक कहानी में दिलचस्पी बनाए रखने की कोशिश करता है, लेकिन स्क्रीनप्ले उसे भी पूरी तरह प्रभावी नहीं बना पाता।
देखें या नहीं?
अगर आप ‘प्रेम कीटाणु’ देखने का प्लान बना रहे हैं तो इसे छोड़ सकते हैं। कहानी में नया कुछ नहीं है और प्रेम कहानी में वह असर भी नहीं है, जिसके लिए पूरी फिल्म बनाई गई है।
वीर पहाड़िया का अभिनय और कमजोर केमिस्ट्री फिल्म को और फीका कर देती है। कुछ पंच और गाने जरूर हैं, लेकिन उनके लिए पूरी फिल्म देखने की जरूरत महसूस नहीं होती।
कुल मिलाकर, ‘प्रेम कीटाणु’ देखने से ज्यादा इसे मिस करना आसान लगता है।
फिल्म की जानकारी
फिल्म: प्रेम कीटाणु
कलाकार: वीर पहाड़िया, आफिया सैयद, अपारशक्ति खुराना, निखिल विजय और राकेश बेदी
लेखक: दीपक किंगरानी और गिरीश ए.डी.
निर्देशक: अपूर्व सिंह कार्की
निर्माता: गौरव वर्मा
रिलीज डेट: 2 अक्टूबर 2026
रेटिंग: 1.5/5
Akhil Mahajan