भारत AI सैटेलाइट लॉन्च करने वाला चौथा देश बना, अंतरिक्ष में ही तस्वीरों का करेगा विश्लेषण
भारत ने पहला AI सैटेलाइट एमओआई-1ए लॉन्च किया, जो अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण करेगा। बॉर्डर निगरानी, बाढ़, खेती और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
➤ अंतरिक्ष में ही तस्वीरों और डेटा का विश्लेषण करेगा AI सैटेलाइट
➤ बॉर्डर निगरानी, बाढ़, जंगल और खेती में हो सकता है इस्तेमाल
➤ 2028 तक अंतरिक्ष में बड़ा डेटा सेंटर बनाने की कंपनी की तैयारी
भारत ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक अहम कदम बढ़ाते हुए अपना पहला AI सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है, जो सिर्फ धरती की तस्वीरें खींचकर वापस भेजने के बजाय उनका विश्लेषण भी अंतरिक्ष में ही कर सकेगा। इससे बॉर्डर निगरानी, आपदा प्रबंधन, खेती, जंगल और खनन क्षेत्रों की निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है। इस तकनीक की खासियत यह है कि सैटेलाइट से जुटाए गए बड़े पैमाने के डेटा को पहले धरती पर भेजने और उसके बाद उसका विश्लेषण करने की जरूरत कम होगी। AI जरूरी जानकारी की पहचान करके उसे ही धरती तक भेज सकेगा, जिससे डेटा ट्रांसफर का समय और खर्च कम करने में मदद मिलेगी।
हैदराबाद की कंपनी टेकमीटूस्पेस का एमओआई-1ए सैटेलाइट स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन से रात 11:48 बजे लॉन्च किया गया। कंपनी के मुताबिक, यह भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है। अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के बाद भारत ऐसी क्षमता वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।
अंतरिक्ष में ही डेटा की छंटाई करेगा सैटेलाइट
अभी आम तौर पर सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा पहले धरती पर भेजा जाता है। इसके बाद उस डेटा की जांच और विश्लेषण किया जाता है। एमओआई-1ए में यह प्रक्रिया अंतरिक्ष में ही करने की क्षमता विकसित की गई है। इसका मतलब है कि सैटेलाइट तस्वीरों और दूसरे डेटा को खुद प्रोसेस करके यह पहचान सकेगा कि उसमें से कौन-सी जानकारी उपयोगी है।
टेकमीटूस्पेस के सीईओ रौनक कुमार सामंत राय के मुताबिक, अगर किसी सैटेलाइट ने 300 जीबी डेटा जुटाया है और उसमें से केवल 5 जीबी जानकारी काम की है, तो AI जरूरी डेटा की पहचान करके वही जानकारी धरती पर भेज सकता है। इससे बड़े डेटा को अंतरिक्ष से धरती तक भेजने में लगने वाला समय और खर्च कम किया जा सकेगा।
बाढ़ से खेती तक में हो सकता है इस्तेमाल
इस तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसमें बाढ़, जंगल, फसल, खनन क्षेत्र और सीमा या जमीन की निगरानी शामिल है। सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों और डेटा का अंतरिक्ष में ही विश्लेषण होने से जरूरी जानकारी को तेजी से इस्तेमाल के लिए धरती तक भेजा जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, बाढ़ की स्थिति में सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि पानी कितने इलाके में फैला है। इसके बाद AI जरूरी जानकारी की पहचान करके संबंधित डेटा धरती पर भेज सकता है। इससे बड़े पैमाने पर जुटाई गई तस्वीरों और डेटा में से उपयोगी जानकारी अलग करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
एमओआई-1ए की क्षमता 120 वॉट, वजन 13 किलो
एमओआई-1ए 120 वॉट क्षमता वाला 13 किलो का 6यू AI सैटेलाइट है। इसकी खासियत अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस करने की क्षमता है। सामान्य तौर पर सैटेलाइट से प्राप्त बड़ी मात्रा में डेटा को धरती तक भेजना पड़ता है, लेकिन इस तकनीक में डेटा को वहीं प्रोसेस करके जरूरी जानकारी को प्राथमिकता दी जा सकती है।
टेकमीटूस्पेस के फाउंडर और सीईओ रौनक कुमार ने 2023 में कंपनी की शुरुआत की थी। कंपनी अब अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
2028 में अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की तैयारी
टेकमीटूस्पेस ने 2028 में अंतरिक्ष में बड़ा डेटा सेंटर बनाने की योजना भी बनाई है। इसके लिए 100-100 किलो वजन वाले ज्यादा क्षमता के सैटेलाइट भेजने की तैयारी है।
इन सैटेलाइट में बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज रखने की योजना है। कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण करने की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस तरह एमओआई-1ए को अंतरिक्ष में AI आधारित डेटा प्रोसेसिंग की दिशा में एक शुरुआती कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में जुटाए गए डेटा में से उपयोगी जानकारी को अंतरिक्ष में ही पहचानने और उसे धरती तक भेजने की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने का प्रयास किया गया है।
Akhil Mahajan