PM मोदी की डिग्री मामले में केजरीवाल की अपील खारिज, गुजरात HC ने ₹25 हजार का खर्च रखा बरकरार

PM मोदी की डिग्री मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर ₹25 हजार का खर्च बरकरार रखा और शैक्षणिक जानकारी को निजी माना।

PM मोदी की डिग्री मामले में केजरीवाल की अपील खारिज, गुजरात HC ने ₹25 हजार का खर्च रखा बरकरार

➤ गुजरात हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज की
➤ PM मोदी की शैक्षणिक जानकारी को निजी जानकारी माना गया
➤ केजरीवाल पर लगाया गया ₹25 हजार का खर्च बरकरार रहा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है। 29 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने 2023 के एकल पीठ के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर फैसला सुनाया। अदालत ने केजरीवाल पर लगाए गए ₹25 हजार के खर्च को भी बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री और योग्यता से जुड़ी जानकारी व्यक्तिगत जानकारी की श्रेणी में आती है और केवल प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर होने के आधार पर ऐसी जानकारी को RTI के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

यह मामला 2016 से चला आ रहा है। उस समय केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी को लेकर गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय से रिकॉर्ड तलाशने और जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। गुजरात विश्वविद्यालय ने इस आदेश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद 31 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को रद्द कर दिया था और अरविंद केजरीवाल पर ₹25 हजार का खर्च लगाया था।

डिग्री की जानकारी को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद

मामले के अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, 28 अप्रैल 2016 को अरविंद केजरीवाल की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री से जुड़ी जानकारी को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष मांग रखी गई थी। इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय को नरेंद्र दामोदर मोदी के नाम से संबंधित शैक्षणिक रिकॉर्ड तलाशने और उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

गुजरात विश्वविद्यालय ने केंद्रीय सूचना आयोग के इस निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मार्च 2023 में आयोग के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि शैक्षणिक दस्तावेज और डिग्री व्यक्तिगत जानकारी के दायरे में आते हैं और RTI कानून के तहत ऐसी जानकारी के खुलासे पर निर्धारित अपवाद लागू होते हैं।

हाईकोर्ट ने RTI कानून की धाराओं का किया उल्लेख

गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में RTI कानून की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय के पास विद्यार्थियों की शैक्षणिक जानकारी एक विशेष भरोसेमंद संबंध के तहत रहती है और डिग्री तथा शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी व्यक्तिगत जानकारी की श्रेणी में आती है।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का प्रधानमंत्री पद पर होना अपने आप में उसकी शैक्षणिक जानकारी को सार्वजनिक हित की जानकारी नहीं बना देता। अदालत के अनुसार, इस जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए बड़े सार्वजनिक हित का आधार होना जरूरी है।

₹25 हजार के खर्च को चुनौती दी गई थी

अरविंद केजरीवाल की मौजूदा अपील मुख्य रूप से 2023 के फैसले में उनके खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों और ₹25 हजार के खर्च को लेकर थी। उनकी ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि उन्होंने मामले में जिस तरह से जानकारी मांगी थी, उसके आधार पर उन पर खर्च लगाया जाना उचित नहीं था।

खंडपीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि एकल पीठ के फैसले में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके साथ ही केजरीवाल की अपील खारिज कर दी गई और ₹25 हजार का खर्च बरकरार रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट को लेकर दावे पर क्या स्थिति है

इस मामले को लेकर यह दावा भी किया जाता रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी। हालांकि, मौजूदा गुजरात हाईकोर्ट के 29 सितंबर 2026 के फैसले में इस अपील का आधार मुख्य रूप से 31 मार्च 2023 के एकल पीठ के फैसले और केंद्रीय सूचना आयोग के 2016 के आदेश से जुड़ा है।

इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि मौजूदा फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी डिग्री मामले में गुजरात हाईकोर्ट के 2023 के फैसले की पुष्टि की है। गुजरात हाईकोर्ट के मौजूदा फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों और RTI कानून में निजी जानकारी तथा सार्वजनिक हित से जुड़े कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख जरूर किया गया है।

हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया

29 सितंबर 2026 को गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि मामले में एकल पीठ के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला। इसके साथ ही Letters Patent Appeal खारिज कर दी गई और पहले लगाया गया ₹25 हजार का खर्च बरकरार रहा।

इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री की जानकारी RTI के जरिए उपलब्ध कराने को लेकर चल रही यह कानूनी प्रक्रिया एक और चरण में पहुंच गई है। अदालत ने अपने फैसले में शैक्षणिक रिकॉर्ड को निजी जानकारी मानने और उसके खुलासे के लिए बड़े सार्वजनिक हित की आवश्यकता पर जोर दिया।