सेब का समर्थन मूल्य 12 से बढ़ाकर 13 रुपये करने की घोषणा , नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री ने खुद संभाली कमान

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रोहड़ू में एंटी-चिट्टा रैली का नेतृत्व किया। विद्यार्थियों ने नशे के खिलाफ जागरूकता संदेश दिया और शपथ ली।

सेब का समर्थन मूल्य 12 से बढ़ाकर 13 रुपये करने की घोषणा , नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री ने खुद संभाली कमान


➤ चिड़गांव और जांगला के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल CBSE बनेंगे
➤ संदासु में सिविल अस्पताल और चिड़गांव में SDM कार्यालय के लिए सर्वे


शिमला/रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को शिमला जिले के रोहड़ू दौरे के दौरान चिड़गांव क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। चिड़गांव में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सेब के समर्थन मूल्य में एक रुपये की बढ़ोतरी का एलान किया। मंडी मध्यस्थता योजना यानी एमआईएस के तहत अब सेब का समर्थन मूल्य 12 रुपये से बढ़कर 13 रुपये किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चिड़गांव और जांगला के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को CBSE स्कूल बनाने की घोषणा की है। उन्होंने चिड़गांव के संदासु में सिविल अस्पताल खोलने की बात कही, जबकि चिड़गांव में SDM कार्यालय खोलने के लिए सर्वे करवाने का भी एलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र को जल्द ही उपमंडल की सौगात देने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। चिड़गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।

मुख्यमंत्री की सेब समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणा को रोहड़ू और आसपास के बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एमआईएस के तहत समर्थन मूल्य में एक रुपये की बढ़ोतरी से सेब उत्पादकों को सरकारी खरीद व्यवस्था में पहले की तुलना में अधिक मूल्य मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर भी घोषणाएं कीं।

चिड़गांव और जांगला में CBSE शिक्षा का विस्तार

मुख्यमंत्री ने चिड़गांव के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल और जांगला के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल को CBSE स्कूल बनाने की घोषणा की। सरकार की ओर से सरकारी क्षेत्र में CBSE स्कूलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिससे उन्हें निजी स्कूलों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं के समान अवसर प्राप्त हो सकें। चिड़गांव और जांगला में CBSE स्कूल शुरू होने से क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के विकल्पों में विस्तार होगा।

संदासु में खुलेगा सिविल अस्पताल

मुख्यमंत्री ने चिड़गांव के संदासु में सिविल अस्पताल खोलने की घोषणा भी की। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अस्पताल खुलने से आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर जाने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने चिड़गांव में SDM कार्यालय खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही। इसके लिए सर्वे करवाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द चिड़गांव क्षेत्र को उपमंडल की सौगात देने की दिशा में काम किया जाएगा।

रोहड़ू स्कूल के नए भवन के लिए दो करोड़ रुपये

रोहड़ू में मुख्यमंत्री ने पीएम श्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय CBSE के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और अपनी जरूरतों को उनके सामने रखा।

संवाद के दौरान एक छात्रा ने स्कूल के लिए नए भवन की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस मांग पर नए भवन के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के लिए यह राशि पर्याप्त नहीं होगी तो सरकार आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त धनराशि भी उपलब्ध करवाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए परिसर के निर्माण में कुछ समय लगेगा, लेकिन सरकार का लक्ष्य प्रदेश में CBSE स्कूलों के लिए आधुनिक और बेहतर सुविधाओं से युक्त उत्कृष्ट परिसर तैयार करना है।

स्कूल की छात्रा ने मुख्यमंत्री को बताया कि CBSE स्कूल बनने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है और वर्तमान में स्कूल में दो शिफ्ट में कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। इसी वजह से नए भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

सरकारी CBSE स्कूलों पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद के दौरान कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी क्षेत्र में CBSE स्कूल खोलने पर विशेष बल दे रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है।

सरकार का कहना है कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। इसी दिशा में नए स्कूलों और मौजूदा विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

आर्थिक स्थिति में सुधार को बताया बड़ी चुनौती

विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत अनुभव और शासन से जुड़े सवाल भी पूछे। एक विद्यार्थी ने उनसे पूछा कि उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम क्या है, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करना या अपने समय का प्रबंधन करना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रदेश की आर्थिक स्थिति में समयबद्ध सुधार लाना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश को देश के अग्रणी और समृद्ध राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से भी प्रदेश के भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच रखने का आह्वान किया।

बचपन की यादों से भी रूबरू हुए मुख्यमंत्री

संवाद के दौरान UKG के एक विद्यार्थी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि बचपन में उनके दादा-दादी उन्हें कौन-कौन सी कहानियां सुनाया करते थे। मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की यादें विद्यार्थियों के साथ साझा कीं।

उन्होंने बताया कि सर्दियों के दिनों में परिवार के सदस्य आग के सामने बैठते थे और उस दौरान उन्हें कहानियां सुनाई जाती थीं। मुख्यमंत्री ने ‘सात बहनों’ की कहानी का भी उल्लेख किया और विद्यार्थियों के साथ अपने बचपन की कुछ स्मृतियां साझा कीं।

AI और रोजगार को लेकर भी विद्यार्थियों के सवाल

विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोजगार से जुड़े सवाल भी पूछे। एक विद्यार्थी ने AI के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों के बौद्धिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि AI आधुनिक समय की महत्वपूर्ण तकनीक है, लेकिन इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए शिक्षा और ज्ञान का मजबूत आधार जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ाई करने की अपील की और कहा कि शिक्षा भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें तैयार करेगी।

रोजगार से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अच्छी शिक्षा सबसे जरूरी है। शिक्षा से सोचने-समझने की क्षमता विकसित होती है और भविष्य में सही दिशा चुनने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य युवाओं को अपने लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान कहा कि हिमाचल प्रदेश का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक रूप से मजबूत एवं समृद्ध राज्य के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, नशा निवारण बोर्ड के सह-संयोजक संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

➤ मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ एंटी-चिट्टा रैली का नेतृत्व किया
➤ ‘नशा छोड़ो, जिंदगी से नाता जोड़ो’ के नारों से गूंजा बाजार
➤ नशे के खिलाफ सरकार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर दिया जोर


शिमला जिला। नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने खुद मोर्चा संभाला और विद्यार्थियों के साथ एंटी-चिट्टा रैली में शामिल होकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के साथ स्वयं उसका नेतृत्व किया। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया। रैली के दौरान ‘नशा छोड़ो, जिंदगी से नाता जोड़ो’ जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर साफ कहा कि नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश में कोई स्थान नहीं है और नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

एंटी-चिट्टा रैली का आयोजन रोहड़ू में किया गया। मुख्यमंत्री ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोहड़ू से रैली को हरी झंडी दिखाई और विद्यार्थियों के साथ इसमें शामिल हुए। रैली के दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ नशे के खिलाफ आवाज उठाई। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भागीदारी ने इस जागरूकता अभियान को जन-अभियान का रूप दिया।

रैली के दौरान रोहड़ू बाजार में नशे के खिलाफ जागरूकता से जुड़े नारे गूंजते रहे। विद्यार्थियों ने लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने भी विद्यार्थियों के साथ कदम से कदम मिलाकर रैली में भाग लिया और उन्हें इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार नशा माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में एंटी-चिट्टा रैलियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं और आम जनता को चिट्टा एवं अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। युवा पीढ़ी यदि नशे के खिलाफ जागरूक होगी और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताएगी, तो समाज को नशे से दूर रखने की दिशा में जागरूकता का संदेश और मजबूत होगा।

रैली से पहले मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को एंटी-चिट्टा शपथ भी दिलवाई। उन्होंने बच्चों से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। विद्यार्थियों ने इस दौरान नशे के खिलाफ जागरूक रहने और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों से बचाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई और उनका उत्साह बढ़ाया। विद्यार्थियों के साथ मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया। रैली में बच्चों की भारी भागीदारी और लगातार गूंजते नारे इस बात का संदेश देते नजर आए कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में युवा बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

नशे के खिलाफ इस अभियान के जरिए सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया कि केवल कार्रवाई से ही नशे की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जागरूकता, युवाओं की भागीदारी और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। इसी सोच के साथ प्रदेशभर में एंटी-चिट्टा रैलियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।