स्मार्ट फोन और सोने के लिए मां बाप ने 1.2 लाख में बेच दिया मासूम, सात गिरफ्तार
लिव-इन दंपती पर बच्चे को 1.2 लाख रुपये में बेचने का आरोप है। पुलिस ने बच्चे को रेस्क्यू कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जांच जारी है।
➤ बच्चे के बदले लिए 1.2 लाख रुपये, फिर खरीदा सोना और स्मार्टफोन
➤ एक महीने में बच्चा कई हाथों से गुजरते हुए 3.5 लाख रुपये तक पहुंचा
➤ पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया
एक मासूम बच्चा, जिसे दुनिया में आए अभी ज्यादा वक्त भी नहीं हुआ था, उसके माता-पिता ने ही उसे 1.2 लाख रुपये में बेच दिया। हैरानी की बात यह रही कि बच्चे को बेचकर मिले पैसों से माता-पिता ने 25 हजार रुपये का स्मार्टफोन और 62 हजार रुपये के सोने के जेवर खरीद लिए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बच्चा एक हाथ से दूसरे हाथ तक पहुंचता रहा और कुछ ही समय में उसकी कीमत 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई। पुलिस को जब इस पूरे मामले की जानकारी मिली तो जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे ऐसी परतें खुलती चली गईं, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। आखिरकार बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया और मानव तस्करी के रैकेट से जुड़े 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें बच्चे के माता-पिता भी शामिल हैं।
पूरी घटना महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई है। यहां मुकुंदवाड़ी में लिव-इन में रहने वाले एक दंपती पर अपने बच्चे को बेचने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, दंपती ने करीब एक महीने के बच्चे को 1.2 लाख रुपये नकद लेकर सीमा रेशवाल को सौंप दिया था। इसके बाद बच्चा लगातार दूसरे लोगों के हाथों में जाता रहा और उसकी कीमत भी बढ़ती गई।
पुलिस के मुताबिक, बच्चे को बेचने की जानकारी एक गुमनाम सूचना के जरिए सामने आई थी। पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने बताया कि जांच की शुरुआत इसी सूचना के आधार पर हुई कि मुकुंदवाड़ी का एक जोड़ा अपने बच्चे को बेच चुका है। इसके बाद बच्चे की मां वंदना कांबले को पूछताछ के लिए बुलाया गया।
20 सितंबर को वंदना ने खुद अपने बच्चे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को जोड़ना शुरू किया। मुकुंदवाड़ी थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 142, 143(4), 3(5) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि वंदना और योगेश कांबले पिछले दो-तीन साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। 5 जुलाई को सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उनके बेटे का जन्म हुआ था। अधिकारी के मुताबिक, वंदना इस बच्चे को अपने पास नहीं रखना चाहती थी। इसी सिलसिले में उसने अपनी सहकर्मी कौशल्या पवार से मदद मांगी।
इसके बाद कौशल्या ने अपनी बेटी सीमा रेशवाल से वंदना की मुलाकात कराई। जांच में सामने आया कि बच्चे को बेचने के लिए दोनों के बीच सौदा तय हुआ। करीब एक महीने तक बच्चे को अपने पास रखने के बाद दंपती ने 1.2 लाख रुपये नकद लेकर उसे सीमा रेशवाल को सौंप दिया।
इसके बाद कहानी ने एक और मोड़ लिया। सीमा रेशवाल ने बच्चे को अपने रिश्तेदार संगीता अव्हड को 2.7 लाख रुपये में बेच दिया। संगीता बच्चे को नांदेड़ ले गईं। वहां से बच्चा जगित्याल, तेलंगाना निवासी सुरेश राजाराम गुंटुका के पास पहुंचा। गुंटुका ने बच्चे को 3.5 लाख रुपये में खरीदा।
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। सुरेश राजाराम गुंटुका खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताता था, लेकिन जांच में वह नकली डॉक्टर निकला। उसने बच्चे को हैदराबाद में रहने वाली अपनी रिश्तेदार उमा गंगाधर खटकम को उसी रकम में सौंप दिया।
इस पूरे मामले में पैसे का लेन-देन भी जांच का अहम हिस्सा बना। पुलिस के अनुसार, सीमा रेशवाल को 1.1 लाख रुपये मिले, जबकि कौशल्या पवार को 40 हजार रुपये मिले। कौशल्या ने यह रकम कर्ज चुकाने में खर्च की।
दूसरी तरफ बच्चे के माता-पिता ने बच्चे को बेचकर मिले 1.2 लाख रुपये में से 25 हजार रुपये का स्मार्टफोन और 62 हजार रुपये के सोने के जेवर खरीद लिए। पुलिस ने दोनों सामान को जब्त कर लिया है। यानी जिस रकम के बदले एक मासूम को अपने माता-पिता से अलग किया गया, उसका इस्तेमाल महंगे सामान खरीदने में किया गया।
रविवार को मामले में उस समय बड़ी कार्रवाई हुई, जब सुरेश राजाराम गुंटुका और उमा गंगाधर खटकम खुद बच्चे को लेकर मुकुंदवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचे और उसे पुलिस को सौंप दिया। इसके बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया।
बाल कल्याण समिति ने बच्चे की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए उसे अधिकृत बाल देखभाल संस्थान ‘सकार’ के हवाले कर दिया। इस तरह पुलिस की कार्रवाई के बाद बच्चा सुरक्षित संरक्षण में पहुंच गया।
पुलिस ने इस मामले में कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बच्चे के असली माता-पिता भी शामिल हैं। पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है।
अब जांच का अगला सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल कुछ लोगों के बीच हुए बच्चे के अवैध लेन-देन तक सीमित है या इसके पीछे राज्य की सीमाओं के पार चल रहा कोई बड़ा बाल तस्करी नेटवर्क भी सक्रिय है। पुलिस इसी पहलू की जांच कर रही है। इसी जांच के बाद इस मामले से जुड़ी आगे की तस्वीर और साफ हो सकेगी।
Akhil Mahajan