BJP विधायक की फर्जी मुहर बनाकर फर्जीवाड़ा, CSC संचालक गिरफ्तार
फरीदाबाद में CSC संचालक ने BJP विधायक सतीश फागना की फर्जी मुहर और लेटरहेड बनाकर ₹800-₹1000 में 100 से अधिक दस्तावेजों का सत्यापन किया।
CSC संचालक ने BJP विधायक सतीश फागना के नाम से बनाई फर्जी मुहर
➤ ₹800 से ₹1,000 लेकर 100 से ज्यादा दस्तावेजों का किया फर्जी सत्यापन
➤ पत्नी का आधार अपडेट कराने पहुंचा था विधायक कार्यालय, वहीं से आया फर्जीवाड़े का आइडिया
फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद में एक जन सुविधा केंद्र (CSC) संचालक ने एनआईटी से BJP विधायक सतीश फागना के नाम की फर्जी स्टैंप बनाकर फर्जीवाड़ा किया। आरोपी ने विधायक के नाम का लेटरहेड और डिजिटल हस्ताक्षर भी तैयार कर लिए थे। इसके बाद वह लोगों से ₹800 से ₹1,000 लेकर उनके दस्तावेजों को विधायक के नाम से सत्यापित करता रहा। पुलिस के अनुसार, आरोपी अब तक 100 से अधिक लोगों के दस्तावेजों पर फर्जी सत्यापन कर चुका था।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी से दस्तावेज तैयार करवाने वाले कुछ लोग इन्हीं कागजात को लेकर विधायक के कार्यालय पहुंचे। वहां दस्तावेजों पर लगी मुहर को देखकर कार्यालय प्रभारी को शक हुआ। विधायक कार्यालय की ओर से मुहर और हस्ताक्षर की पुष्टि कराई गई तो सामने आया कि विधायक ने इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर ही नहीं किए थे।
इसके बाद विधायक की ओर से पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान पर्वतीय कॉलोनी में जन सुविधा केंद्र चलाने वाले सौरभ के रूप में हुई है। उसके पास से फर्जी मुहर और लेटरहेड भी बरामद किए गए हैं। पुलिस आरोपी को आज कोर्ट में पेश करेगी।
पत्नी का आधार अपडेट कराने पहुंचा था विधायक कार्यालय, वहीं से मिली फर्जीवाड़े की तरकीब
पुलिस प्रवक्ता यशपाल के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि सौरभ अपनी पत्नी के आधार कार्ड में बदलाव कराने के लिए विधायक सतीश फागना के कार्यालय पहुंचा था। इसी दौरान उसकी नजर विधायक के दस्तावेजों पर पड़ी।
आरोपी ने कार्यालय में विधायक का लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर देखे। इसके बाद उसने इनकी नकल तैयार करवा ली। बाद में वह इन्हीं का इस्तेमाल लोगों के दस्तावेजों को सत्यापित करने के लिए करने लगा।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने इसी साल से यह काम शुरू किया था। आधार कार्ड बनवाने और उसमें संशोधन कराने के लिए लोगों को कई तरह के दस्तावेजों के सत्यापन की जरूरत पड़ती थी। इसी जरूरत को उसने कमाई का जरिया बना लिया।
₹800 से ₹1,000 लेकर करता था दस्तावेजों का फर्जी सत्यापन
सौरभ लोगों को कार्यालयों की भागदौड़ से बचाने के नाम पर उनके दस्तावेज सत्यापित करने की बात कहता था। इसके बदले वह ₹800 से ₹1,000 तक लेता था। पुलिस के अनुसार, अब तक वह 100 से अधिक लोगों के दस्तावेजों पर विधायक के नाम से फर्जी सत्यापन कर चुका था।
जिन लोगों ने उसे पैसे देने में आनाकानी की, उन्हें वह खुद दस्तावेज सत्यापित कराने के लिए कह देता था। वहीं, जो लोग रकम देने को तैयार हो जाते थे, उनके दस्तावेजों पर विधायक के नाम की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर सत्यापन कर देता था।
इस तरह आरोपी ने लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाने का भरोसा देकर फर्जी सत्यापन का काम चलाया।
असली और नकली मुहर के फर्क से खुला पूरा फर्जीवाड़ा
सौरभ से दस्तावेज तैयार करवाने वाले कुछ लोग जब इन्हें लेकर डबुआ कॉलोनी स्थित विधायक कार्यालय पहुंचे तो वहां दस्तावेजों की जांच के दौरान फर्जीवाड़े का पता चला।
कार्यालय प्रभारी सत्यप्रकाश को कागजात पर लगी मुहर को देखकर शक हुआ। इसके बाद विधायक कार्यालय की ओर से मुहर और दस्तावेजों की पुष्टि कराई गई। जांच में सामने आया कि इन दस्तावेजों पर विधायक के हस्ताक्षर ही नहीं थे।
मामले की जानकारी विधायक को दी गई। इसके बाद विधायक कार्यालय में तैनात प्रकाश पटेल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस ने जल्द ही कार्रवाई करते हुए CSC संचालक सौरभ को गिरफ्तार कर लिया।
विधायक सतीश फागना बोले- फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं थी
एनआईटी विधायक सतीश फागना के मुताबिक, उन्हें इस फर्जीवाड़े की कोई जानकारी नहीं थी। कर्मचारियों ने जब कागजों पर लगी मुहर के बारे में बताया, तब उन्हें पता चला कि इन दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
विधायक ने पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है, जो उनके नाम, मुहर और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।
पांच साल से चला रहा था CSC केंद्र, बंद होने के बाद शुरू किया आधार का काम
पुलिस के अनुसार, आरोपी सौरभ करीब पांच साल से पर्वतीय कॉलोनी में CSC केंद्र चला रहा था। इसी साल किसी कारण से उसका केंद्र बंद हो गया। इसके बाद उसने आसपास के लोगों के आधार कार्ड बनवाने और उनमें संशोधन कराने का काम शुरू कर दिया।
आधार कार्ड अपडेट कराने के लिए कई दस्तावेजों के सत्यापन की जरूरत पड़ती थी। पुलिस के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के दौरान आरोपी ने विधायक के नाम की मुहर और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी सत्यापन का रास्ता निकाला।
आरोपी ने लोगों से पैसे लेकर उनके दस्तावेज विधायक के नाम से सत्यापित करने शुरू कर दिए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने इस तरीके से कितने दस्तावेज तैयार किए और फर्जी सत्यापन का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।
तीन दिन के रिमांड में जांचे जाएंगे कंप्यूटर और दूसरे उपकरण
पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि आरोपी को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस फर्जी लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर तैयार कराने में इस्तेमाल किए गए सामान के अलावा कंप्यूटर और अन्य उपकरण बरामद करने की कोशिश करेगी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि सौरभ ने यह पूरा नेटवर्क अकेले खड़ा किया था या उसके साथ कोई और व्यक्ति भी शामिल था। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों और सत्यापन से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
2019 में भी विधायक के नाम से आधार फर्जीवाड़ा सामने आया था
फरीदाबाद में विधायक के नाम और लेटरहेड का इस्तेमाल कर आधार कार्ड से जुड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2019 में तिगांव के तत्कालीन विधायक ललित नागर के नाम के फर्जी लेटरहेड और मुहर का इस्तेमाल कर दूसरे राज्यों से आए लोगों के आधार कार्ड बनवाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ था।
उस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। अब एक बार फिर विधायक के नाम और मुहर के इस्तेमाल से फर्जी दस्तावेज सत्यापन का मामला सामने आने के बाद पुलिस इसकी कड़ियों की जांच कर रही है।
Akhil Mahajan