मनीषा की मौत की कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट! सीबीआई ने आत्महत्या कहा, एम्स रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल, चौंका देगी यह रिपोर्ट
भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सीबीआई ने आत्महत्या माना, जबकि एम्स रिपोर्ट में धारदार हथियार की चोटें बताई गईं। परिवार क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देगा।
➤ मनीषा मौत मामले में सीबीआई ने आत्महत्या माना, एम्स रिपोर्ट में धारदार हथियार की चोटों का जिक्र
➤ 3700 पेज की क्लोजर रिपोर्ट से परिवार असंतुष्ट, पिता संजय कुमार ने चुनौती देने की बात कही
➤ दो पोस्टमार्टम में जहर बताया गया, एम्स बोर्ड ने मौत का कारण गंभीर धारदार चोट बताया
भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी शिक्षिका मनीषा (19) की बहुचर्चित मौत के मामले में जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में मनीषा की मौत को आत्महत्या बताया है, जबकि दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण धारदार हथियार से लगी गंभीर चोटों को बताया गया था। दोनों रिपोर्टों के बीच सामने आया यह विरोधाभास ही इस मामले को सबसे ज्यादा गंभीर और रहस्यमय बनाता है।
मनीषा के पिता संजय कुमार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि परिवार इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं है और सीबीआई के फैसले को चुनौती दी जाएगी। परिवार की ओर से पहले भी मनीषा के साथ दुष्कर्म, हत्या और अंगों को निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर मनीषा की मौत कैसे हुई। सीबीआई ने जहां उपलब्ध जांच और चिकित्सकीय राय के आधार पर इसे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या माना है, वहीं एम्स की रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्ष इससे अलग तस्वीर पेश करते हैं।
11 अगस्त को घर से निकली थी मनीषा, दो दिन बाद मिला था शव
मनीषा 11 अगस्त 2025 की सुबह अपने घर से निकलने के बाद लापता हो गई थी। इसके दो दिन बाद 13 अगस्त की सुबह उसका शव सिंघानी गांव के समीप नहर के पास खेत में मिला था।
शव की स्थिति ने मामले को और गंभीर बना दिया था। शव से चेहरा, नाक की संरचनाएं, दोनों आंखों के सॉकेट और गर्दन गायब थी। शव मिलने के बाद परिवार ने मामले में दुष्कर्म, हत्या और अंगों को निकालने के गंभीर आरोप लगाए थे।
घटना की शुरुआती जांच के दौरान 11 अगस्त को एक हस्तलिखित सुसाइड नोट भी सामने आया था। इसमें मनीषा ने बीएससी नर्सिंग करने की इच्छा जताई थी। बाद में रोहतक की क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने इस सुसाइड नोट की लिखावट की पुष्टि की।
जांच के दौरान सामने आई सीसीटीवी फुटेज में मनीषा को 11 अगस्त को दोपहर करीब दो बजे कीटनाशक खरीदते हुए भी देखा गया था। यही तथ्य बाद की जांच में आत्महत्या के निष्कर्ष की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बना।
पहले दो पोस्टमार्टम में जहर को बताया गया था मौत का कारण
मनीषा के शव का पोस्टमार्टम पहले भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल और उसके बाद रोहतक पीजीआईएमएस में कराया गया था। इन दोनों पोस्टमार्टम में गर्दन पर चोटें और चेहरे तथा गर्दन की संरचनाओं के नुकसान की बात सामने आई थी।
हालांकि, दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर को मौत का कारण बताया गया। इसके बाद विसरा जांच में ऑर्गेनो फॉस्फोरस मिलने की बात सामने आई। मामले को लेकर परिवार की ओर से विरोध किया गया और बाद में शव का तीसरा पोस्टमार्टम दिल्ली के एम्स में कराया गया।
यहीं से मामले की जांच और चिकित्सकीय निष्कर्षों के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
एम्स के तीसरे पोस्टमार्टम में गर्दन का हिस्सा संदिग्ध पाया गया
विरोध के बाद दिल्ली के एम्स में तीसरा पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान विच्छेदित गर्दन को संदिग्ध पाया गया। एम्स बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में मनीषा की मौत का कारण धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट बताया।
एम्स बोर्ड को जहर के सबूत नहीं मिले। यह निष्कर्ष पहले किए गए पोस्टमार्टम और एम्स की रिपोर्ट के बीच एक महत्वपूर्ण विरोधाभास था। एक ओर पहले दो पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट में ऑर्गेनो फॉस्फोरस का उल्लेख था, वहीं एम्स बोर्ड ने मौत का कारण गंभीर धारदार चोट बताया।
यही अंतर मनीषा के परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
सीबीआई ने एसएसएमबी की राय के आधार पर निकाला आत्महत्या का निष्कर्ष
सीबीआई की जांच का निष्कर्ष मुख्य रूप से भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल और रोहतक पीजीआईएमएस में किए गए पोस्टमार्टम पर आधारित रहा। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से गठित पांच चिकित्सकों के सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल बोर्ड (एसएसएमबी) की राय भी ली गई।
सीबीआई के अनुसार एम्स बोर्ड को जहर के सबूत नहीं मिले थे। इसके बाद सीबीआई ने एसएसएमबी की राय ली। एसएसएमबी ने एम्स के निष्कर्षों को खारिज करते हुए शव से गायब संरचनाओं का कारण जानवरों की गतिविधि बताया।
एसएसएमबी ने मनीषा की मौत ऑर्गेनो फॉस्फोरस विषाक्तता से होने का निष्कर्ष दिया। इसी चिकित्सकीय राय के आधार पर सीबीआई ने मनीषा की मौत को मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या माना।
इस तरह मामले में एक तरफ एम्स की रिपोर्ट धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट को मौत का कारण बताती है, जबकि एसएसएमबी की राय ऑर्गेनो फॉस्फोरस विषाक्तता की ओर जाती है। सीबीआई ने एसएसएमबी की राय के आधार पर आत्महत्या का निष्कर्ष निकाला।
3700 पेज की क्लोजर रिपोर्ट लेकर परिवार के सामने आया सीबीआई का निष्कर्ष
मनीषा के पिता संजय कुमार के अनुसार सीबीआई की ओर से करीब 3700 पेज की क्लोजर रिपोर्ट भेजी गई है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट का वजन करीब दस किलो है। इस पूरे दस्तावेज में सीबीआई ने मनीषा की मौत को आत्महत्या करार दिया है।
परिवार ने सीबीआई के इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया है। संजय कुमार का कहना है कि परिवार इस निर्णय से संतुष्ट नहीं है और इसे चुनौती देगा।
परिवार के मुताबिक मनीषा की मौत की प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए कई सवालों का सीबीआई की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं है। यही वजह है कि परिवार ने मामले में आगे कानूनी चुनौती देने का फैसला किया है।
पूर्व सीबीआई अधिकारी के कानूनी सलाहकार भी करेंगे मामले में पैरवी
सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने कहा है कि वह इस मामले में निशुल्क पैरवी करेंगे। उनका आरोप है कि पहले पुलिस और अब सीबीआई ने मामले को दबाया है।
उन्होंने कहा कि सीबीआई के पास अब भी कई सवालों के जवाब नहीं हैं। उनके अनुसार मामले में उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन किया जाएगा और निश्चित तौर पर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मनीषा की मौत का मामला एक बार फिर उस सवाल पर आकर टिक गया है कि 11 अगस्त 2025 को घर से निकलने के बाद उसके साथ वास्तव में क्या हुआ था और उसकी मौत किस परिस्थिति में हुई। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में आत्महत्या का निष्कर्ष है, जबकि एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से लगी गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया गया था। परिवार अब इसी विरोधाभास को चुनौती देने की तैयारी में है।
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Akhil Mahajan