हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा, ED कार्रवाई के बाद पूर्व CM का बड़ा फैसला

पूर्व CM हरीश रावत ने ED कार्रवाई के बीच कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि उनकी वजह से पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई प्रभावित न हो।

हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा, ED कार्रवाई के बाद पूर्व CM का बड़ा फैसला

हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा
ED की कार्रवाई के बाद पूर्व CM का बड़ा फैसला, बोले- मेरी वजह से पार्टी को नुकसान नहीं होना चाहिए
कांग्रेस की सदस्यता बरकरार, 1.28 करोड़ की संपत्तियों की ED कार्रवाई के बीच लिया निर्णय


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। रावत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट के जरिए अपने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस समय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है और ऐसे समय में अगर उनके किसी मामले की वजह से पार्टी के संघर्ष को नुकसान पहुंचता है तो वह ऐसा नहीं चाहेंगे।

जीना के घर से मिली घड़ियां और गोल्ड।

हरीश रावत फिलहाल कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्होंने इन दोनों जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। रावत ने हालांकि साफ किया कि यह फैसला कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके खून और हड्डियों में है और हरीश रावत जो कुछ भी हैं, उसका निर्माण कांग्रेस ने किया है।

हरीश रावत ने यह पोस्ट फेसबुक पेज पर शेयर की है।

रावत का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब 10 सितंबर को उनके पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में ED के मुताबिक करीब 1.28 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त और फ्रीज की गई थीं। जीना वर्तमान में हरीश रावत के पर्सनल असिस्टेंट (PA) के तौर पर काम कर रहे हैं।

हरीश रावत ने फेसबुक पर एक और पोस्ट साझा की।

ED की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के पदों से हटे रावत

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में अगर उनकी वजह से पार्टी के इस संघर्ष को किसी तरह का नुकसान होता है तो वह ऐसा नहीं चाहते। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस में मिली अपनी दोनों संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया।

रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस समय किसी सरकारी पद पर नहीं हैं। इसलिए सरकारी पद से इस्तीफा देने का सवाल नहीं है। उनका फैसला पूरी तरह कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से जुड़ा है।

उनके इस्तीफे के बाद अब इस फैसले को उत्तराखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

पूर्व OSD चंदन सिंह जीना को लेकर रावत ने क्या कहा?

चंदन सिंह जीना को लेकर हरीश रावत ने कहा कि वह उनके OSD रह चुके हैं। उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान जीना ने पार्टी और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

मौजूदा आरोपों को लेकर रावत ने कहा कि फिलहाल उन्हें विश्वास नहीं है और जांच पूरी होने के बाद ही तथ्य स्पष्ट होंगे

चंदन सिंह जीना वर्ष 2014 से 2017 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के OSD रहे थे। वर्तमान में वह पूर्व मुख्यमंत्री के PA के तौर पर काम कर रहे हैं।

ED ने कहा है कि जांच में जीना के बड़े नकद खर्चों का स्रोत उनकी ज्ञात आय से स्पष्ट नहीं हो पाया।

रावत ने चुनाव का भी किया जिक्र

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में आगामी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब लोग उनसे चुनाव की तारीख पूछते थे तो वह मजाक में कहा करते थे कि चुनाव तब होंगे, जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी

रावत ने कहा कि इस बार उनके घर के बजाय एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है और कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं

रावत के मुताबिक, ऐसे समय में वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के संघर्ष को किसी तरह का नुकसान हो।

‘अगर मेरे खिलाफ सबूत हैं तो CBI-ED या पुलिस को दें’

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में हुई सरकारी भर्तियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था।

रावत के अनुसार, उनके करीब तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं।

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ हो तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं। हालांकि, व्यक्तिगत हस्तक्षेप के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास उनकी संलिप्तता के प्रमाण हैं तो उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।

रावत ने कहा कि अगर किसी के पास भर्ती या नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप अथवा संलिप्तता के प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है

UKSSSC चेयरमैन की नियुक्ति पर भी सफाई

हरीश रावत ने अपने कार्यकाल में UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी।

रावत के मुताबिक, इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी से भी उन्हें सलाह मिली थी।

उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने ही संबंधित व्यक्ति को पद से हटाया या उनसे इस्तीफा मांगा था। रावत ने कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य में गलत आचरण करने का अनुमान पहले से लगाना संभव नहीं है।

‘गड़बड़ी का प्रमाण है तो जांच एजेंसियों को दें’

रावत ने कहा कि सरकारी नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है।

उन्होंने कहा कि यदि जाने-अनजाने में उनकी ओर से ऐसा कोई कृत्य हुआ है, जिससे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा हो तो वह खुद को जवाबदेही और दंड का पात्र मानते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी के पास भर्ती या नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप अथवा संलिप्तता के प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए।

ED ने चंदन सिंह जीना के घर से क्या बरामद किया?

ED ने UKSSSC की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में कथित OMR हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 10 सितंबर को देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल था।

ED के मुताबिक, जीना के घर से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना, 12 लग्जरी घड़ियां और 52.16 लाख रुपये के बैंक बैलेंस को फ्रीज किया गया।

सोने में 13 गोल्ड कॉइन और 7 गोल्ड चेन शामिल हैं। बरामद घड़ियों में Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice जैसे ब्रांड शामिल हैं।

ED ने जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया है, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। ED के अनुसार जीना के घर से जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का मौजूदा मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये है। इसमें 12 लग्जरी घड़ियों की कीमत शामिल नहीं है। इसके बाद यह रकम और बढ़ सकती है।

2014 से 2017 तक हरीश रावत के OSD रहे जीना

चंदन सिंह जीना वर्ष 2014 से 2017 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के OSD रहे थे। वर्तमान में वह पूर्व मुख्यमंत्री रावत के पर्सनल असिस्टेंट (PA) के तौर पर काम कर रहे हैं।

ED ने कहा कि जांच में जीना के बड़े नकद खर्चों का स्रोत उनकी ज्ञात आय से स्पष्ट नहीं हो पाया।

सुरक्षित कस्टडी से निजी घर पहुंची थीं OMR शीट

ED की कार्रवाई VPDO परीक्षा-2016 में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ के मामले से जुड़ी है। जांच के अनुसार UKSSSC की सुरक्षित कस्टडी में रखी OMR शीट को कथित तौर पर आयोग के तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक पहुंचाया गया।

यहां कम भरी गई OMR शीट के रोल नंबर नोट किए गए और उन्हें निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिया गया। आरोप है कि खाली छोड़े गए उत्तरों के गोले भरकर OMR शीट में हेरफेर की गई और बाद में उन्हें दोबारा सील कर दिया गया।

ED के मुताबिक, यह काम अवैध रकम के बदले किया गया और रकम बिचौलियों के जरिए पहुंचाई गई।

कई पूर्व अधिकारियों और बिचौलियों के ठिकानों पर भी छापे

ED ने तत्कालीन UKSSSC अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और मामले से जुड़े बिचौलियों के परिसरों की भी तलाशी ली।

एजेंसी के मुताबिक कई ठिकानों से बेहिसाबी नकदी और सोने के आभूषण भी मिले हैं। मामले की जांच देहरादून विजिलेंस में दर्ज FIR और इससे जुड़े तीन अन्य मामलों के आधार पर की जा रही है।

ED ने कहा है कि मामले की जांच जारी है।

कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी, सिर्फ संगठनात्मक पदों से हुए अलग

हरीश रावत के इस्तीफे के बाद यह स्पष्ट है कि उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया है, पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से नहीं

रावत ने अपनी एक और सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके खून और हड्डियों में है और हरीश रावत जो कुछ भी हैं, उसका निर्माण कांग्रेस ने किया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि देहरादून में ED की कार्रवाई के बाद उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य और AICC वर्किंग कमेटी के सदस्य पद से त्यागपत्र दिया है।

रावत ने मीडिया से उनकी पोस्ट को पूरी तरह पढ़कर खबर को सही तरीके से पेश करने का आग्रह भी किया।

इस तरह ED की कार्रवाई के बीच हरीश रावत का कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम बन गया है। रावत ने अपने फैसले के पीछे पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई को नुकसान से बचाने की वजह बताई है, जबकि कांग्रेस की सदस्यता के साथ अपना संबंध बरकरार रखा है।