सात राज्यों में लंपी का कहर, हरियाणा में बॉर्डर वाले इलाके सील; पशुओं के व्यापार पर लगा ब्रेक
सात राज्यों में लंपी संक्रमण के बीच हरियाणा में भिवानी, नारनौल और कुरुक्षेत्र में मामले मिले। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और पशुओं की आवाजाही पर रोक लगी।
➤ सात राज्यों में लंपी का कहर, हरियाणा में बॉर्डर वाले इलाकों पर सख्ती
➤ भिवानी, नारनौल और कुरुक्षेत्र में मामले मिलने के बाद पशुओं के आवागमन पर ब्रेक
➤ गोशालाओं में नए पशुओं को 15 दिन अलग रखने और संक्रमित पशुओं को अलग करने के निर्देश
हिसार। दो वर्ष पहले पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला लंपी वायरस एक बार फिर हरियाणा की चौखट तक पहुंच गया है। सात राज्यों में संक्रमण मिलने और हरियाणा के भिवानी, नारनौल तथा कुरुक्षेत्र में मामले सामने आने के बाद पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। संक्रमण को हरियाणा में आगे फैलने से रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और पशुओं के अनावश्यक आवागमन पर रोक लगा दी गई है।
विभाग की ओर से जिलों को जारी एडवाइजरी में गोशालाओं से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने पशुओं के अनावश्यक आवागमन को रोकने, सीमावर्ती क्षेत्रों पर नजर रखने और पशुपालकों को बीमारी के प्रति सजग रहने को कहा है।
हालांकि हिसार में अभी लंपी संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, लेकिन आसपास के क्षेत्रों में संक्रमण की स्थिति को देखते हुए एहतियाती कदम तेज कर दिए गए हैं।
बॉर्डर वाले इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी, पशुओं की आवाजाही पर रोक
लंपी वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का उद्देश्य संक्रमित पशुओं के आवागमन के जरिए बीमारी को दूसरे इलाकों में पहुंचने से रोकना है।
पशुओं के अनावश्यक आवागमन पर रोक के साथ उनके एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। यही वजह है कि पशुओं के व्यापार और आवाजाही पर ब्रेक लगाने की स्थिति बनी है।
विभाग ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति पर लगातार नजर रखें और संदिग्ध मामले सामने आने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करें।
गोशालाओं में नए पशुओं की एंट्री पर भी सख्ती
जिलों को जारी एडवाइजरी में गोशालाओं में गोवंश के प्रवेश और निकास पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी नए पशु को सीधे झुंड में शामिल नहीं किया जाएगा। उसे कम से कम 15 दिन अलग रखने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे संक्रमण की स्थिति में बीमारी को दूसरे पशुओं तक पहुंचने से रोकने में मदद मिलेगी।
गोशाला संचालकों से भी पशुओं के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने को कहा गया है।
मच्छर-मक्खियों पर भी विभाग की नजर
विभाग ने लंपी वायरस की रोकथाम के लिए मच्छर, मक्खी और अन्य वाहक कीटों के नियंत्रण पर भी जोर दिया है। इसके लिए नियमित फागिंग, पशुओं के शेड की सफाई और नालियों की नियमित सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने कहा है कि किसी भी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक अथवा विभाग को सूचना दी जाए, ताकि समय रहते उपचार और निगरानी शुरू की जा सके।
तेज बुखार और शरीर पर गांठें, ये हैं लंपी के प्रमुख लक्षण
पशुपालकों को लंपी के लक्षणों की जानकारी रखने के लिए भी कहा गया है। पशु में तेज बुखार, शरीर पर गांठें उभरना, आंख और नाक से स्राव, दूध उत्पादन में कमी, सुस्ती और भूख कम लगना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर पशु को दूसरे स्वस्थ पशुओं के साथ रखने के बजाय अलग करने और तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
टीकाकरण छूटा है तो पशु चिकित्सालय से करें संपर्क
विभाग ने पशुपालकों को बचाव के उपायों पर विशेष ध्यान देने को कहा है। नया पशु लाने पर उसे तुरंत झुंड में शामिल न करें। शेड और आसपास की सफाई रखें तथा मच्छर और मक्खियों के नियंत्रण के उपाय करें।
बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना भी जरूरी बताया गया है। जिन पशुओं का टीकाकरण छूट गया है, उनके लिए पशुपालकों को पशु चिकित्सालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
हिसार में अभी कोई मामला नहीं, फिर भी अलर्ट
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार हिसार में अभी संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद हरियाणा के अन्य जिलों में मामलों की पुष्टि और सात राज्यों में संक्रमण मिलने के बाद विभाग ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है।
सरकार का जोर संक्रमण को सीमावर्ती इलाकों से हरियाणा के दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने पर है। इसके लिए पशुओं के अनावश्यक आवागमन पर रोक, गोशालाओं में नए पशुओं को अलग रखने, संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करने और मच्छर-मक्खियों की रोकथाम जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
दो साल बाद लंपी वायरस की फिर से दस्तक ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में विभाग की एडवाइजरी के मुताबिक सावधानी, समय पर लक्षणों की पहचान और संक्रमित पशु को अलग रखना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अहम है।
Akhil Mahajan