हरियाणा की बेटी बनी इंडिया टॉपर,ITI में 600 में से 600 अंक हासिल कर रचा इतिहास
कैथल के गांव नरड़ की मुस्कान नरड़ ने आईटीआई परीक्षा में 600 में से 600 अंक हासिल कर देश में पहला स्थान पाया, अब अनुदेशक बनने का सपना है।
➤ कैथल की मुस्कान नरड़ ने ITI परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया
➤ स्टेनोग्राफी एंड सेक्रेटेरियल असिस्टेंट (हिंदी) ट्रेड में 600 में से 600 अंक प्राप्त किए
➤ राजमिस्त्री की बेटी का सपना अब ITI में अनुदेशक बनकर दूसरे विद्यार्थियों को आगे बढ़ाना
कैथल। मेहनत, लगन और मजबूत इरादे हों तो साधारण परिवार से आने वाला विद्यार्थी भी अपनी प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। कैथल के गांव नरड़ की रहने वाली मुस्कान नरड़ ने इसे सच कर दिखाया है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), कैथल की इस छात्रा ने कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग की परीक्षा में हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया है। मुस्कान ने 600 में से 600 अंक प्राप्त कर शत-प्रतिशत परिणाम दिया है। उसकी इस उपलब्धि से परिवार, संस्थान और पूरे जिले में खुशी का माहौल है।
मुस्कान ने स्टेनोग्राफी एंड सेक्रेटेरियल असिस्टेंट (हिंदी) ट्रेड की परीक्षा में यह शानदार सफलता हासिल की है। खास बात यह है कि उसने प्रायोगिक परीक्षा में भी सभी अंक प्राप्त किए। लिखित और प्रायोगिक परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पूरे 600 अंक हासिल करना उसकी मेहनत, नियमित अभ्यास और विषयों पर मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
छात्रा की इस उपलब्धि पर आईटीआई कैथल में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान संस्थान के प्रधानाचार्य जगमोहन ने मुस्कान को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने छात्रा की सफलता पर खुशी जताते हुए उसके माता-पिता और अनुदेशक राजेश ढुल को भी बधाई दी।
प्रधानाचार्य जगमोहन ने कहा कि मुस्कान ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल संस्थान, बल्कि पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। उसकी उपलब्धि दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है। उन्होंने छात्रा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
राजमिस्त्री की बेटी ने मेहनत से हासिल किया देश में पहला मुकाम
गांव नरड़ निवासी मुस्कान नरड़ एक सामान्य परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता बलजीत राजमिस्त्री का काम करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार की सामान्य आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के बावजूद मुस्कान ने अपनी पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।
उसने प्रशिक्षण के दौरान नियमित अभ्यास और अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। प्रत्येक विषय पर गंभीरता से ध्यान दिया और लगातार मेहनत जारी रखी। पढ़ाई के प्रति इसी समर्पण का नतीजा रहा कि परीक्षा में उसने पूरे 600 में से 600 अंक हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया।
मुस्कान की सफलता यह भी दिखाती है कि किसी विद्यार्थी की प्रतिभा और कामयाबी का संबंध केवल उसके पारिवारिक परिवेश से नहीं होता। सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और खुद पर विश्वास हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
अनुदेशक राजेश ढुल के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया सफलता का श्रेय
मुस्कान ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने अनुदेशक राजेश ढुल के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया है। उसका कहना है कि यदि लक्ष्य निर्धारित कर लगातार मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। प्रशिक्षण के दौरान मिले मार्गदर्शन और परिवार से मिले प्रोत्साहन ने उसे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में मदद की।
मुस्कान की इस कामयाबी से उसके परिवार में भी खुशी है। पिता बलजीत राजमिस्त्री का काम करते हैं, लेकिन बेटी ने अपनी मेहनत से ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिससे परिवार का नाम पूरे देश में रोशन हुआ है।
अब आईटीआई में अनुदेशक बनकर विद्यार्थियों का भविष्य संवारना चाहती है मुस्कान
देशभर में पहला स्थान हासिल करने के बाद भी मुस्कान ने अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। वह आगे चलकर आईटीआई में एसएसए हिंदी की अनुदेशक बनना चाहती है। उसका उद्देश्य केवल खुद सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि दूसरे विद्यार्थियों को भी प्रशिक्षण देकर उनके भविष्य को बेहतर बनाने में मदद करना है।
मुस्कान चाहती है कि जिस तरह उसे अपने अनुदेशक से मार्गदर्शन और परिवार से सहयोग मिला, उसी तरह वह भी भविष्य में दूसरे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दे सके। 600 में से 600 अंक हासिल कर देश में पहला स्थान पाने वाली मुस्कान की यह उपलब्धि कैथल ही नहीं, बल्कि उन तमाम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो मेहनत और लगन के दम पर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
Akhil Mahajan