85 करोड़ का शराब घोटाला,खुलासा करने वाले दिनेश मेहरा बने AETO, FIR अब भी लंबित
हरियाणा के 85 करोड़ के शराब घोटाले का खुलासा करने वाले दिनेश मेहरा AETO बने। ACB ने दो आरोपियों पर FIR की सिफारिश की, लेकिन मामला लंबित है।
शराब घोटाले का खुलासा करने वाले हिसार के टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा को मिला प्रमोशन
➤ 85 करोड़ के शराब घोटाले में डिफॉल्टर फर्म को नियमों के खिलाफ करोड़ों के ठेके देने का मामला उजागर किया था
➤ ACB ने तत्कालीन DETC वीके शास्त्री और ठेकेदार के खिलाफ FIR की सिफारिश की, लेकिन सरकार के स्तर पर फाइल अब भी लंबित
हिसार। हरियाणा के आबकारी एवं कराधान विभाग में करोड़ों रुपये के शराब घोटाले और नियमों को ताक पर रखकर डिफॉल्टर फर्म को शराब के ठेके देने का मामला उजागर करने वाले टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा को आखिरकार पदोन्नति मिल गई है। झज्जर में कार्यरत दिनेश मेहरा को पदोन्नत कर सहायक आबकारी एवं कराधान अधिकारी (AETO) बनाया गया है। दूसरी ओर, जिस शराब घोटाले का उन्होंने खुलासा किया था, उसमें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच के बाद FIR दर्ज करने की सिफारिश के बावजूद अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। मामले की फाइल सरकार के स्तर पर लंबित है।
हरियाणा सरकार के आबकारी एवं कराधान आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, दिनेश मेहरा को 25 मई 2026 से नॉशनल बेसिस पर AETO पद पर पदोन्नति दी गई है। उन्हें तुरंत प्रभाव से नया पदभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मेहरा की पदोन्नति ऐसे समय में हुई है, जब उनके द्वारा उजागर किए गए शराब घोटाले में तत्कालीन विभागीय अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की कथित मिलीभगत को लेकर कार्रवाई का मामला अभी सरकारी स्तर पर अटका हुआ है।
85 करोड़ रुपये के शराब घोटाले का किया था खुलासा
टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा ने आबकारी एवं कराधान विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को शिकायत भेजी थी। शिकायत में उन्होंने विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और शराब ठेकेदारों के बीच साठगांठ का आरोप लगाते हुए डिफॉल्टर फर्म को नियमों के खिलाफ शराब के ठेके दिए जाने का मामला उठाया था।
शिकायत के अनुसार, मेसर्स जोरबा वाइन फर्म पर फतेहाबाद के ठेकों की वर्ष 2018-19 की 34 लाख 6 हजार 800 रुपये लाइसेंस फीस बकाया थी। इसके अलावा वर्ष 2019-20 में इसी फर्म पर 25 करोड़ रुपये की देनदारी थी।
इतना ही नहीं, फर्म पर हिसार के ठेकों की वर्ष 2019-20 तक करीब 11.55 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस भी बकाया थी। इतनी बड़ी रकम बकाया होने के बावजूद फर्म को शराब के ठेके दिए जाने पर सवाल उठे थे। दिनेश मेहरा ने अपनी शिकायत में इन्हीं अनियमितताओं को सामने रखते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
एक्साइज एक्ट 1914 के नियमों को ताक पर रखकर दिए गए ठेके
दिनेश मेहरा की शिकायत में शराब ठेकों के आवंटन को लेकर नियमों की अनदेखी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। एक्साइज एक्ट 1914 के अनुसार, किसी फर्म को डिफॉल्टर घोषित किए जाने के बाद वह अगले साल की नीलामी में भाग नहीं ले सकती।
इसके बावजूद आरोप है कि तत्कालीन DETC वीके शास्त्री की कथित मिलीभगत से जोरबा वाइन फर्म को फतेहाबाद में बिना आवश्यक कागजात के वर्ष 2018-19 में 21 करोड़ रुपये और वर्ष 2019-20 में 38 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए।
वहीं, वर्ष 2019-20 में हिसार में भी इसी फर्म को 26 करोड़ रुपये का कारोबार सौंपा गया। शिकायत में सवाल उठाया गया था कि जब फर्म पर पहले से ही करोड़ों रुपये की लाइसेंस फीस बकाया थी और नियमों के अनुसार डिफॉल्टर फर्म को अगले साल की नीलामी में भाग लेने की अनुमति नहीं थी, तो उसे दोबारा ठेके कैसे दिए गए।
इस मामले में तत्कालीन विभागीय अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की कथित मिलीभगत को लेकर जांच की गई। दिनेश मेहरा की शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूरे प्रकरण की पड़ताल की।
ACB ने तत्कालीन DETC और शराब ठेकेदार पर FIR की सिफारिश की
दिनेश मेहरा की शिकायतों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), हिसार ने गहन जांच की। जांच पूरी होने के बाद 6 फरवरी 2025 को SP ACB हिसार ने अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में तत्कालीन DETC वीके शास्त्री और शराब ठेकेदार तरुण कुमार मेहता के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।
इसके बाद 20 मार्च 2025 को ADGP ACB पंचकूला ने भी इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कदम उठाया। पत्र क्रमांक 4840/1-3/ACB (H) के माध्यम से मुख्य सचिव कार्यालय के विजिलेंस विभाग से FIR दर्ज करने की औपचारिक अनुमति मांगी गई थी।
इस तरह ACB की जांच में मामला FIR दर्ज करने की सिफारिश तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। जांच एजेंसी की रिपोर्ट और FIR की अनुमति मांगने के बावजूद मामला सरकार के स्तर पर अंतिम फैसले का इंतजार करता रहा।
RTI में खुलासा, सरकार के स्तर पर लंबित है अंतिम फैसला
मामले में कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए दिनेश मेहरा ने 21 अप्रैल 2026 को RTI दाखिल की थी। इसके जवाब में विजिलेंस विभाग ने 27 जुलाई 2026 को स्थिति स्पष्ट की।
विभाग ने अपने जवाब में बताया कि मामले की फाइल पर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लंबित है। साथ ही यह भी माना कि आबकारी आयुक्त से मांगी गई टिप्पणी नहीं मिलने के कारण निर्णय लेने में देरी हो रही है।
इस जवाब से स्पष्ट हुआ कि ACB की ओर से FIR दर्ज करने की सिफारिश किए जाने और ADGP ACB पंचकूला की ओर से औपचारिक अनुमति मांगे जाने के बावजूद मामला अभी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में अटका हुआ है।
एक तरफ दिनेश मेहरा को पदोन्नति देकर AETO बना दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ उनके द्वारा उजागर किए गए शराब घोटाले में FIR दर्ज करने को लेकर सरकार का अंतिम निर्णय अब तक सामने नहीं आया है। करोड़ों रुपये के बकाया और नियमों के विपरीत ठेके आवंटित किए जाने से जुड़े इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है।
Akhil Mahajan