हिमाचल के हक में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बीबीएमबी से मिलेगी बिजली, सालाना 1000 करोड़ तक कमाई की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। सीएम सुक्खू ने इसे प्रदेश की जीत बताते हुए वाटर सेस और चंडीगढ़ हिस्सेदारी की लड़ाई जारी रखने की बात कही।

हिमाचल के हक में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बीबीएमबी से मिलेगी बिजली, सालाना 1000 करोड़ तक कमाई की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलने का रास्ता साफ

➤ अगले 20 वर्षों तक बिजली के हिस्से से प्रदेश को सालाना 500 से 1,000 करोड़ रुपये तक राजस्व मिलने का अनुमान

➤ सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू बोले- वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिस्सेदारी की लड़ाई भी जारी रहेगी

चंबा। हिमाचल प्रदेश को अपने अधिकारों की लड़ाई में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के करीब 15 साल पुराने बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रदेश के पक्ष में आया है। इस फैसले के बाद हिमाचल को अपने हिस्से की बिजली मिलने का रास्ता मजबूत हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे पूरे प्रदेशवासियों की जीत बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रदेश के अधिकारों के लिए लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है।

चंबा के मैहला में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नीयत नेक हो, इच्छाशक्ति मजबूत हो और पूरी लगन से प्रयास किए जाएं तो बड़ी से बड़ी लड़ाई भी जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि BBMB के मामले में मिली सफलता हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत पंजाब और हरियाणा को हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देनी होगी। यह करीब 1,197 करोड़ यूनिट बिजली के बराबर है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अगले 20 वर्षों में प्रदेश को अपने हिस्से की बिजली मिलनी है। इससे हिमाचल को लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

बिजली बेचकर हर साल 500 से 1,000 करोड़ रुपये तक कमाई का अनुमान

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बिजली के हिस्से को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए संभावित राजस्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि हिमाचल को मिलने वाली बिजली को 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचा जाता है तो प्रदेश को सालाना करीब 500 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है।

वहीं, यदि बिजली की बिक्री 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से होती है या इसी दर पर समझौता किया जाता है तो प्रदेश की सालाना आय लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। मुख्यमंत्री पहले भी इस तरह की संभावना जता चुके हैं।

हालांकि, यह राजस्व अनुमान बिजली की बिक्री दर, समझौते की शर्तों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। वास्तविक कमाई इन परिस्थितियों के अनुसार तय होगी। इसके बावजूद सरकार इस फैसले को प्रदेश के लिए लंबे समय तक आर्थिक लाभ देने वाली उपलब्धि मान रही है।

चार साल में हिमाचल के अधिकारों के लिए लड़ीं चार बड़ी लड़ाइयां

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए चार बड़ी लड़ाइयां लड़ी हैं। इनमें वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू, किशाऊ बांध और BBMB से जुड़े मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन सभी मामलों में प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा है और BBMB मामले में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सुक्खू ने इस सफलता के लिए अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों, अधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि सामूहिक मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण से संभव हुई है। सरकार आगे भी प्रदेश के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से काम करती रहेगी।

भाजपा पर सुक्खू का हमला, पूछा- डबल इंजन सरकार में हिमाचल के हक की लड़ाई क्यों नहीं लड़ी?

BBMB मामले में मिली सफलता के बाद मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और प्रदेश दोनों जगह डबल इंजन की सरकार थी, तब हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई? मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश के हितों की रक्षा करने में विफल रही।

सुक्खू ने कहा कि जो अपने हितों का संरक्षण नहीं कर सकते, वे प्रदेश के हितों की लड़ाई भी नहीं जीत सकते। उन्होंने कहा, "हमने जिस भी लड़ाई को लड़ा है, उसे जीता है। हमने निजी हितों के लिए नहीं, बल्कि हिमाचल के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है।"

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश के हितों को नजरअंदाज कर विधायकों को अपने पाले में लाने में जुटी रही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश के संसाधनों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए हैं।

वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिस्सेदारी की लड़ाई अभी बाकी

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। प्रदेश के सामने दो महत्वपूर्ण मुद्दे अभी बाकी हैं। इनमें वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिमाचल की हिस्सेदारी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार इन दोनों मामलों में भी प्रदेश का हक हासिल करने के लिए प्रयास जारी रखेगी। हिमाचल के संसाधनों और अधिकारों से जुड़े किसी भी मामले में सरकार समझौता नहीं करेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, BBMB मामले में मिली सफलता के बाद सरकार का संकल्प है कि बाकी मुद्दों पर भी प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा जाए।

RDG बंद होने के बावजूद 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के बावजूद भरोसा जताया कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2032 तक देश का सबसे अमीर और समृद्धशाली राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार आय के नए स्रोत विकसित करने और प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है।

सुक्खू ने कहा कि जैसे-जैसे सरकार प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई जीत रही है, वैसे-वैसे प्रदेशवासियों को उनका हक दिलाया जा रहा है। सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई योजनाएं शुरू कर रही है। उनका कहना है कि प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संसाधनों का सही इस्तेमाल और आय के नए साधन विकसित करना जरूरी है।

क्या है BBMB विवाद और हिमाचल को कैसे मिलेगा फायदा?

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) का गठन पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत किया गया था। यह बोर्ड भाखड़ा-नंगल और ब्यास परियोजनाओं के संचालन और प्रबंधन का काम देखता है। इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली और जल का बंटवारा संबंधित राज्यों के बीच तय हिस्सेदारी के आधार पर होता है।

हिमाचल प्रदेश लंबे समय से इन परियोजनाओं में अपने हिस्से के अधिकार को लेकर पक्ष रखता रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत पंजाब और हरियाणा को हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देनी होगी। यह लगभग 1,197 करोड़ यूनिट के बराबर है।

इस फैसले के साथ ही BBMB परियोजनाओं को लेकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच करीब 60 साल पुराने ऊर्जा विवाद के खत्म होने की बात कही जा रही है। प्रदेश को अगले 20 वर्षों तक अपने हिस्से की बिजली मिलने से आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने इस फैसले को हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि सरकार आगे भी प्रदेश के हितों के लिए इसी तरह प्रयास करती रहेगी। अब वाटर सेस और चंडीगढ़ में हिस्सेदारी जैसे मुद्दों पर सरकार की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।