जेल योग से बचने का टोटका! झज्जर जेल में कैदियों के हाथों पिस रहा आटा, गुरुग्राम तक पहुंच रही सप्लाई
झज्जर जिला जेल में करीब 30 कैदी मशीनों से आटा तैयार कर रहे हैं। गुरुग्राम की फर्म से एक साल का अनुबंध हुआ है और कैदियों को पारिश्रमिक मिलता है।
झज्जर जिला जेल में करीब 30 कैदी चक्की चलाकर तैयार कर रहे आटा
➤ गुरुग्राम की फर्म ने जेल के साथ एक साल का कॉन्ट्रैक्ट किया, शहर में हो रही सप्लाई
➤ जेल की रोटी शुभ मानने की मान्यता के बीच कैदियों को मेहनत के बदले मिल रहा पारिश्रमिक
हरियाणा के झज्जर जिला जेल में कैदियों के हाथों तैयार हो रहा आटा अब जेल की चारदीवारी से बाहर निकलकर गुरुग्राम तक पहुंच रहा है। जेल परिसर में मशीनों के जरिए गेहूं की पिसाई की जा रही है और इस काम में करीब 30 कैदी लगे हुए हैं। एक फर्म ने जेल के साथ एक साल का अनुबंध किया है, जिसके तहत यहां तैयार होने वाले आटे की सप्लाई गुरुग्राम में की जा रही है। इस व्यवस्था के जरिए कैदियों को काम करने और मेहनत के बदले पारिश्रमिक कमाने का अवसर मिल रहा है। वहीं, समाज में प्रचलित उस मान्यता के कारण भी जेल की रोटी चर्चा में रहती है, जिसके अनुसार कुछ लोग कुंडली में जेल योग से बचने के लिए जेल की रोटी खाना शुभ मानते हैं। हालांकि, इस धारणा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। जेल प्रशासन के अनुसार, आटे की सप्लाई के पीछे कैदियों को श्रम से जोड़ने के साथ-साथ फर्म के साथ हुआ व्यावसायिक अनुबंध भी अहम है।
जेल की चारदीवारी में गेहूं की पिसाई, गुरुग्राम में हो रही आटे की सप्लाई
झज्जर जिला जेल में आटा तैयार करने के लिए मशीनों की व्यवस्था की गई है। यहां गेहूं की पिसाई के बाद आटा तैयार किया जाता है। इस काम में करीब 30 कैदी शामिल हैं। तैयार आटे को एक फर्म के माध्यम से गुरुग्राम भेजा जा रहा है।
इसके लिए फर्म ने जेल के साथ एक साल का कॉन्ट्रैक्ट किया है। इस अनुबंध के तहत जेल में तैयार आटे की सप्लाई मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में की जा रही है। इस तरह जेल परिसर में होने वाला काम अब बाहरी शहर की जरूरतों से भी जुड़ गया है।
यह व्यवस्था कैदियों को जेल में रहते हुए काम करने का अवसर देती है। वे आटा तैयार करने की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और अपने श्रम के बदले पारिश्रमिक भी प्राप्त करते हैं।
जेल की रोटी शुभ मानने की मान्यता भी चर्चा में
समाज में लंबे समय से यह मान्यता प्रचलित है कि जेल की रोटी खाना शुभ होता है। कुछ लोग ज्योतिषियों की सलाह पर कुंडली में जेल योग टालने के लिए जेल की रोटी खाते हैं। इसी वजह से जेल में तैयार होने वाले आटे और रोटी को लेकर लोगों के बीच दिलचस्पी बनी रहती है।
हालांकि, जेल की रोटी खाने से कुंडली का जेल योग टलने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय मान्यता से जुड़ा विषय है। झज्जर जिला जेल में तैयार हो रहे आटे की चर्चा में यह पहलू भी सामने आता है, लेकिन गुरुग्राम तक इसकी सप्लाई का आधार फर्म के साथ हुआ अनुबंध और व्यावसायिक व्यवस्था है।
मेहनत के बदले कैदियों को मिलता है पारिश्रमिक
जेल में आटा तैयार करने वाले कैदियों को उनके काम के बदले पैसे दिए जाते हैं। इससे उन्हें जेल में रहते हुए कमाई करने का अवसर मिलता है। साथ ही, नियमित रूप से काम करने से उनमें जिम्मेदारी निभाने और श्रम करने की आदत विकसित होती है।
जेल में काम करना कैदियों के लिए केवल पारिश्रमिक कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर भी है। इस तरह की गतिविधियों से उन्हें कामकाज की प्रक्रिया समझने और अनुशासन के साथ जिम्मेदारी निभाने का अनुभव मिलता है।
जेल से बाहर आने के बाद सामान्य जिंदगी में लौटने में मिल सकती है मदद
जेल में काम करने का अनुभव कैदियों के पुनर्वास में सहायक हो सकता है। नियमित कामकाज से उन्हें श्रम करने की आदत विकसित करने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है।
जेल से बाहर आने के बाद सामान्य जीवन में लौटते समय यह अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है। आटा तैयार करने जैसे कामों में शामिल होकर कैदी अपने समय का उपयोग कर सकते हैं और मेहनत के बदले पारिश्रमिक भी कमा सकते हैं।
जेल सुपरिंटेंडेंट सेवा सिंह बोले- आस्था और व्यावसायिक व्यवस्था, दोनों पहलू
जेल सुपरिंटेंडेंट सेवा सिंह के अनुसार, जिला जेल में कैदियों से आटा तैयार करवाने की व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें श्रम आधारित कामकाज से जोड़ना है। इस काम में करीब 30 कैदी लगे हुए हैं और उन्हें उनकी मेहनत के बदले पारिश्रमिक दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस मामले के दो पहलू हैं। कुछ लोग जेल की रोटी को शुभ मानते हैं, इसलिए इस मान्यता के चलते भी इसकी मांग हो सकती है। हालांकि, आटे की सप्लाई के पीछे फर्म के साथ हुआ अनुबंध और व्यावसायिक व्यवस्था भी है।
जेल में तैयार किया जा रहा आटा संबंधित फर्म के माध्यम से गुरुग्राम पहुंचाया जा रहा है। इस तरह झज्जर जिला जेल में कैदियों के श्रम से तैयार होने वाला आटा अब जेल परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहरी बाजार की सप्लाई व्यवस्था से भी जुड़ गया है।
Akhil Mahajan