पंजाब के 50 वार्डों के चुनाव रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने 6 हफ्ते में दोबारा मतदान कराने का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 म्युनिसिपल वार्डों के चुनाव रद्द कर छह हफ्तों में दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया, साथ ही निगरानी और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की।
➤ सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 म्युनिसिपल वार्डों के चुनाव रद्द कर छह हफ्ते में दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया
➤ पटियाला के 28, बाघापुराना के 15 और धर्मकोट के 7 वार्डों में फिर से होगा चुनाव
➤ नामांकन से मतदान तक होगी वीडियो रिकॉर्डिंग, निगरानी के लिए समिति बनाने का निर्देश
चंडीगढ़। पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य के 50 म्युनिसिपल वार्डों में हुए चुनाव रद्द करते हुए छह हफ्तों के भीतर नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह फैसला भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रभावित वार्डों में पटियाला नगर निगम के 28, बाघापुराना नगर परिषद के 15 और मोगा जिले की धर्मकोट नगर परिषद के 7 वार्ड शामिल हैं। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी समिति बनाने और नामांकन से लेकर मतदान तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश भी दिए हैं। यह मामला 21 दिसंबर 2024 को हुए स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ा है, जिनमें विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।
तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया। अदालत ने प्रभावित 50 वार्डों के चुनाव रद्द करते हुए निर्धारित समय सीमा में नई चुनाव प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
फैसले के बाद पटियाला नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को भी अपने पद गंवाने पड़े हैं। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत प्रशासनिक प्रभाव संबंधित आदेश और उसके अनुपालन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
छह हफ्तों में पूरी करनी होगी चुनाव प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित वार्डों में दोबारा चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया छह हफ्तों के भीतर पूरी की जाए। इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में नए सिरे से चुनाव कराकर स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
अदालत ने चुनाव के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसके तहत पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को एक निगरानी समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है। इस समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।
नामांकन से मतदान तक होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन और मतदान की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। इससे चुनाव के दौरान होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और किसी शिकायत की स्थिति में संबंधित घटनाओं की जांच करने में मदद मिल सकती है।
अदालत के निर्देशों के अनुसार, निगरानी समिति की व्यवस्था का उद्देश्य दोबारा होने वाले चुनावों को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने में मदद करना है।
जांच आयोग की रिपोर्ट में सामने आई थीं अनियमितताएं
यह मामला 21 दिसंबर 2024 को हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई से जुड़ा है। विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि उन्हें चुनाव लड़ने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जबरन बाहर रखने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज निर्मलजीत कौर के नेतृत्व वाले एक सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर फैसला दिया। रिपोर्ट में चुनाव प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।
आयोग की रिपोर्ट में आरोपों से जुड़े प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे।
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नामांकन में बाधा। विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने के आरोप सामने आए।
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हिंसा और धमकियां। नामांकन फॉर्म छीने जाने, फाड़े जाने और उम्मीदवारों के साथ मारपीट व डराने-धमकाने की घटनाओं का उल्लेख किया गया।
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निर्विरोध जीत के मामले। विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन में बाधा के आरोपों के बीच सत्ताधारी दल के कई उम्मीदवार निर्विरोध विजेता घोषित किए गए थे।
इन आरोपों और जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के बाद मामला अदालत तक पहुंचा। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित वार्डों में दोबारा चुनाव कराना होगा।
अकाली दल और भाजपा ने सरकार पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल बढ़ने की संभावना है। विपक्षी दलों ने पहले ही चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को पद से हटाने की मांग की है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना की है। भाजपा ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं से लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ठेस पहुंची है।
इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट का आदेश अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा। दोबारा होने वाले चुनावों में नामांकन, मतदान और निगरानी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहेगा।
Akhil Mahajan