हरियाणा के सरकारी स्कूलों में फेस बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य, शिक्षकों की लेटलतीफी पर लगेगी लगाम
हरियाणा के नूंह सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की फेस बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की गई। जानें फर्जी उपस्थिति रोकने और शिक्षा सुधार की पूरी योजना।
नूंह के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की फेस बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य
➤ फेस रिकॉग्निशन डिवाइस से दर्ज होगा उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड, फर्जी हाजिरी पर लगेगी रोक
➤ नीति आयोग की रैंकिंग सुधारने और बच्चों के लर्निंग आउटकम बेहतर करने पर प्रशासन का फोकस
हरियाणा के नूंह जिले के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों और विद्यार्थियों की हाजिरी को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की तैयारी की गई है। स्कूलों में पहले से स्थापित फेशियल बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का नियमित इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय, हरियाणा, पंचकूला की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नूंह को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इस व्यवस्था के तहत फेस रिकॉग्निशन डिवाइस के जरिए उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे फर्जी हाजिरी और उपस्थिति संबंधी गड़बड़ियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
यह आदेश नूंह के उपायुक्त (DC) की ओर से भेजे गए पत्र के बाद जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन पहले ही स्कूलों में फेशियल रिकॉग्निशन डिवाइस लगवा चुका है। अब इन उपकरणों का नियमित इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की जवाबदेही तय करना, स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था को दुरुस्त करना और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार लाना है।
फेशियल बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज होगी शिक्षकों और छात्रों की हाजिरी
सरकारी स्कूलों में हाजिरी की पारंपरिक व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका को दूर करने के लिए फेस रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सिस्टम से उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे कागजों और रजिस्टरों में हाजिरी दर्ज करने के दौरान होने वाली गड़बड़ियों और फेरबदल की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।
निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों के बाद अब जिला स्तर पर इस व्यवस्था का नियमित इस्तेमाल सुनिश्चित करना अहम होगा। इसका उद्देश्य यह है कि शिक्षक और विद्यार्थी स्कूल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और हाजिरी का रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय तरीके से तैयार हो सके।
नूंह में इस फैसले की क्या है खास वजह?
1. नीति आयोग के एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम पर विशेष फोकस
नूंह (मेवात) देश के उन पिछड़े जिलों में शामिल है, जिन्हें नीति आयोग ने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट घोषित किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से सुधार लाना है। जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ नीति आयोग की राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के लिए भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फेस बायोमेट्रिक हाजिरी को इसी दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
2. फर्जी हाजिरी और घोस्ट टीचर्स पर लगेगी रोक
स्कूलों में कागजों और रजिस्टरों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने में गड़बड़ी और धांधली की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसी स्थिति में फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था की गई है।
इस तकनीक का उद्देश्य फर्जी हाजिरी और रिकॉर्ड में फेरबदल की आशंका को कम करना है। डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि स्कूलों में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया कितनी नियमित और पारदर्शी है।
3. शिक्षकों की गैरहाजिरी और देर से आने की शिकायतों पर नजर
नूंह के दूर-दराज के स्कूलों में शिक्षकों के अनुपस्थित रहने या देर से आने-जाने की शिकायतें प्रशासन के पास आती रही हैं। फेस बायोमेट्रिक सिस्टम के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति का सही समय दर्ज करने का प्रयास किया जाएगा।
इससे स्कूलों में शिक्षकों की मौजूदगी पर नजर रखने और उनकी जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी। प्रशासन की मंशा है कि शिक्षक निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचें और नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभाएं।
4. विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में सुधार लाने का लक्ष्य
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति के साथ विद्यार्थियों का स्कूल आना भी जरूरी है। शिक्षा विभाग का मानना है कि जब शिक्षक और छात्र दोनों नियमित रूप से स्कूल आएंगे, तभी पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
पारदर्शी हाजिरी व्यवस्था के जरिए स्कूलों में नियमितता बढ़ाने और बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके परिणामों में सकारात्मक बदलाव लाने की उम्मीद है।
अब नियमित इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी
नूंह के सरकारी स्कूलों में फेस बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य किए जाने के बाद इस व्यवस्था को नियमित रूप से लागू करना अहम होगा। जिला प्रशासन पहले ही स्कूलों में फेस रिकॉग्निशन डिवाइस स्थापित कर चुका है और अब मौलिक शिक्षा निदेशालय ने इनके इस्तेमाल को लेकर निर्देश जारी किए हैं।
इस पहल के जरिए स्कूलों में उपस्थिति संबंधी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, शिक्षकों की जवाबदेही तय करने और शिक्षा के स्तर में सुधार लाने पर जोर दिया जा रहा है। अब यह व्यवस्था जिले के सरकारी स्कूलों में किस तरह प्रभावी साबित होती है, इस पर नजर रहेगी।
Akhil Mahajan