इटली में बुर्का-नकाब पर बैन, मेलोनी बोलीं- स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी होगी सीमित
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का-नकाब पर रोक, विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने और अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा सीखने की योजना बताई
➤ स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक की घोषणा, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव
➤ विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने और अभिभावकों को इतालवी सिखाने की योजना
➤ आज 9.3 लाख से ज्यादा गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्र स्कूलों में पढ़ रहे
नई दिल्ली/रोम। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की योजना का ऐलान किया है। मेलोनी ने रविवार को रोम में अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के कार्यक्रम में कहा कि इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट के सामने प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार स्कूलों की कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने और उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने की योजना भी बना रही है, जिन्हें स्कूल व्यवस्था में घुलने-मिलने में गंभीर परेशानी हो रही है।
मेलोनी ने यह घोषणा रोम में आयोजित Gioventù Nazionale के राष्ट्रीय कार्यक्रम में की। प्रस्तावित शिक्षा उपायों में कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या तय करने की बात शामिल है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि एक कक्षा में विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या कितनी होगी। मेलोनी के मुताबिक, जिन विदेशी छात्रों को स्कूल व्यवस्था में गंभीर रूप से एकीकृत होने में परेशानी है, उनके माता-पिता को इतालवी भाषा सीखनी होगी।
प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून का रूप देने के लिए संसद की प्रक्रिया से गुजरना होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकार से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित उपाय को 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी। यानी फिलहाल यह घोषणा प्रस्तावित सरकारी कदमों से जुड़ी है, अंतिम कानून बनने की प्रक्रिया अभी बाकी है।
24 देशों में बुर्के पर बैन
स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या पर भी प्रस्ताव
मेलोनी सरकार की योजना केवल चेहरे को ढकने वाले परिधानों तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही प्रति कक्षा विदेशी छात्रों की संख्या पर सीमा लगाने की बात कही गई है। मेलोनी ने स्कूलों में भाषा और सामाजिक एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जिसमें किसी कक्षा में इतालवी बच्चे खुद को अल्पसंख्यक महसूस करें।
प्रस्ताव में ऐसे विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा की पढ़ाई को अनिवार्य करने की बात भी है, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में गंभीर एकीकरण संबंधी परेशानी है। सरकार का प्रस्ताव अभी प्रक्रिया में है और इसके विस्तृत नियम सामने आना बाकी हैं।
इटली के स्कूलों में 9.3 लाख से ज्यादा गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्र
Fondazione ISMU के आंकड़ों के मुताबिक, इटली के स्कूलों में 9.3 लाख से ज्यादा ऐसे छात्र हैं जिनके पास इतालवी नागरिकता नहीं है। ये संख्या स्कूलों में पढ़ने वाले कुल छात्रों की करीब 11.6% है। ISMU के अनुसार यह आंकड़ा 2023/24 शैक्षणिक वर्ष के अनुमान पर आधारित है और इसमें प्री-स्कूल से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के छात्र शामिल हैं।
ISMU की रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्रों की संख्या में पिछले वर्षों में बढ़ोतरी हुई है, हालांकि इसकी रफ्तार पहले की तुलना में धीमी हुई है। 2023/24 के लिए संगठन ने करीब 930,000 छात्रों का अनुमान दिया था, जो कुल स्कूल आबादी का 11.6% था।
बुर्का-नकाब पर दूसरे यूरोपीय देशों में भी कानूनी फैसले
चेहरा ढकने वाले परिधानों को लेकर यूरोप में पहले भी कानूनी विवाद और नीतिगत फैसले सामने आते रहे हैं। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने फ्रांस में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को ढकने पर लगाए गए प्रतिबंध से जुड़े मामले S.A.S. v. France में 2014 में फैसला दिया था। अदालत ने प्रतिबंध को यूरोपीय मानवाधिकार कन्वेंशन के तहत कायम रहने दिया था।
बेल्जियम में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने वाले परिधानों से जुड़े मामलों में भी यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने 2017 में फैसले दिए। Dakir v. Belgium और Belcacemi and Oussar v. Belgium मामलों में अदालत ने प्रतिबंध के खिलाफ दायर शिकायतों में कन्वेंशन के तहत उल्लंघन नहीं पाया।
हालांकि, ऐसे प्रतिबंधों को लेकर मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं। यूरोपियन कोर्ट के मामलों में भी व्यक्तिगत अधिकारों और सार्वजनिक नीति के बीच संतुलन का सवाल सामने आया है।
विदेशी कर्मचारियों की भूमिका भी अहम
इटली में विदेशी नागरिकों की भूमिका केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी कर्मचारियों का इटली की GDP में करीब 9% योगदान बताया जाता है। खेती, निर्माण और बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ऐसे में विदेशी आबादी और श्रम बाजार से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव का असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है। विदेशी कर्मचारियों की संख्या में कमी आने की स्थिति में कुछ क्षेत्रों में कामगारों की कमी की आशंका जताई जाती है।
मेलोनी सरकार की प्रस्तावित शिक्षा नीतियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब इटली में प्रवास, भाषा और स्कूलों में एकीकरण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। फिलहाल बुर्का-नकाब पर प्रस्तावित रोक और विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की योजना को कानून बनने के लिए आगे की सरकारी और संसदीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
Akhil Mahajan