अप्रैल में भी हिमाचल में बर्फबारी, ठंड ने फिर बढ़ाई मुश्किलें अटल टनल और लाहौल में बर्फ

हिमाचल प्रदेश में अप्रैल में भी बर्फबारी और बारिश का दौर जारी है। 9 अप्रैल तक मौसम खराब रहेगा, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी।

अप्रैल में भी हिमाचल में बर्फबारी, ठंड ने फिर बढ़ाई मुश्किलें अटल टनल और लाहौल में बर्फ

अप्रैल में भी हिमाचल में बर्फबारी, ठंड ने बढ़ाई परेशानी
अटल टनल समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ, शिमला में लगातार बारिश
9 अप्रैल तक मौसम खराब, फिर दोबारा बदलेगा मिजाज


हिमाचल प्रदेश में अप्रैल महीने में भी सर्दी का असर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई। अटल टनल रोहतांग और लाहौल-स्पीति के रिहायशी क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि राजधानी शिमला में मंगलवार रात से लगातार बारिश हो रही है। ठंडी हवाओं और बारिश ने तापमान में गिरावट ला दी है, जिससे लोगों को एक बार फिर हीटर और गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।

कुल्लू और मनाली क्षेत्र में भी बारिश और बर्फबारी का असर साफ दिखाई दे रहा है। मनाली से केलांग के बीच केवल फोर बाई फोर वाहनों की आवाजाही ही संभव रह गई है, जबकि अन्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। लगातार खराब मौसम के कारण कुल्लू जिले में 40 से अधिक ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं और 16 सड़कें बंद पड़ी हैं, जिससे जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में बादल छाए रहे और रोहतांग दर्रा, भरमौर व पांगी की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। तेज हवाओं और बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 7 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठंड का एहसास बढ़ गया है।

कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन जिलों में अंधड़ और ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि 9 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम खराब बना रहेगा। 10 अप्रैल को मौसम साफ होने और धूप खिलने की संभावना है, लेकिन 11 से 13 अप्रैल के बीच एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का दौर लौट सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस असामान्य मौसम का असर पर्यटन और खेती दोनों पर पड़ सकता है। जहां एक ओर सैलानी बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं, वहीं किसानों और बागवानों को फसलों और सेब के फूलों को नुकसान की चिंता सताने लगी है।