आयुष्मान अधिकारी पर गिरी गाज, मंत्री राजेश नागर ने किया सस्पेंड
भिवानी में आयुष्मान कार्डधारक से फीस वसूली के मामले में निजी अस्पताल पर कार्रवाई न करने पर मंत्री राजेश नागर ने संबंधित अधिकारी को निलंबित करने के आदेश दिए।
- भिवानी में आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारी पर गिरी गाज
- निजी अस्पताल पर कार्रवाई न करने पर मंत्री राजेश नागर ने दिए सस्पेंड के आदेश
- आयुष्मान कार्डधारक से फीस वसूली की शिकायत पर हुई कार्रवाई
भिवानी के पंचायत भवन में आयोजित जिला लोक शिकायत एवं कष्ट निवारण समिति (ग्रीवेंस कमेटी) की बैठक में प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने बड़ा एक्शन लिया। बैठक के दौरान आयुष्मान योजना से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने सिविल अस्पताल में तैनात संबंधित अधिकारी विनोद को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।
जानकारी के अनुसार, एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद एक मरीज से निजी अस्पताल में फीस वसूली गई। शिकायत की जांच और कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि संबंधित अधिकारी द्वारा निजी अस्पताल के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री राजेश नागर ने बैठक में ही संबंधित अधिकारी को सस्पेंड करने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निशुल्क उपचार का अधिकार है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान नगराधीश अनिल कुमार ने बताया कि ग्रीवेंस कमेटी के समक्ष कुल 14 परिवाद रखे गए हैं। इनमें 7 पुराने और 7 नए मामले शामिल हैं। मंत्री सभी मामलों की सुनवाई कर रहे हैं और मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शिकायतों के समाधान के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारी बैठक में उपस्थित हैं। जिन मामलों में कार्रवाई की आवश्यकता है, वहां अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
बैठक को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही सक्रिय था। डीसी साहिल गुप्ता द्वारा सभी विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए थे, ताकि शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की देरी न हो।
मंत्री राजेश नागर की इस कार्रवाई को आयुष्मान योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और संस्थानों को भी स्पष्ट संदेश गया है।
Akhil Mahajan