PIET में पदमजीत सहरावत ने म्यूजिकल टॉकशाला के जरिए छात्रों को सफलता के मंत्र दिए।
पानीपत के PIET में आयोजित म्यूजिकल टॉकशाला में मोटिवेशनल स्पीकर पदमजीत सहरावत ने गीतों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को सफलता, मेहनत, आत्मविश्वास और विनम्रता का संदेश दिया।
- PIET में पदमजीत सहरावत ने म्यूजिकल टॉकशाला के जरिए छात्रों को सफलता के मंत्र दिए।
- गीतों, प्रेरक प्रसंगों और उदाहरणों से आत्मविश्वास, मेहनत व विनम्रता का संदेश दिया।
- विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य तय कर निरंतर सीखते रहने और हार न मानने की अपील की।
पानीपत स्थित पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (PIET) में आयोजित म्यूजिकल टॉकशाला में प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर, कमेंटेटर एवं गायक पदमजीत सहरावत ने गीतों, प्रेरक प्रसंगों और जीवन के अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राएं उनके विचारों और प्रस्तुतियों से जुड़े रहे।
केवट प्रसंग से समझाया बड़ा सोचने का महत्व
अपने संबोधन की शुरुआत श्रीरामचरितमानस के केवट प्रसंग से करते हुए पदमजीत सहरावत ने कहा कि इंसान को जीवन में हमेशा बड़ा सोचकर मांगना और लक्ष्य तय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवट ने भगवान श्रीराम से केवल धन नहीं मांगा, बल्कि उनसे अगले लोक में भी पार लगाने का आशीर्वाद मांगा। इसी तरह जीवन में सीमित नहीं, बल्कि बड़े सपने देखने चाहिए।
असफलता को बताया सफलता की पहली सीढ़ी
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि असफलता कभी अंत नहीं होती, बल्कि सीखने का अवसर होती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अमिताभ बच्चन को शुरुआती दौर में रेडियो में नौकरी नहीं मिली थी, जबकि जे.के. रोलिंग की हैरी पॉटर की पांडुलिपि भी कई प्रकाशकों ने अस्वीकार कर दी थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
बड़े लक्ष्य रखें, तभी मिलेगी बड़ी सफलता
पदमजीत सहरावत ने कहा कि जो लोग आसमान छूने का सपना देखते हैं, वे उड़ान भरने की तैयारी करते हैं, जबकि छोटे लक्ष्य रखने वाले केवल सीढ़ियां चढ़ते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे हमेशा बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें।
क्षमा और विनम्रता को बताया सबसे बड़ी ताकत
उन्होंने जीवन में क्षमा और विनम्रता के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि माफ करना सीखने से केवल सामने वाला ही नहीं, बल्कि स्वयं भी मानसिक रूप से मुक्त हो जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि व्यक्तित्व ऐसा बनाएं कि हर किसी के साथ सहजता से बैठ सकें और उपलब्धियां ऐसी हों कि आपके सम्मान में लोग स्वयं खड़े हो जाएं।
'भुट्टे' के उदाहरण से समझाया मेहनत का मूल्य
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने मेहनत का महत्व समझाने के लिए एक सरल उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सड़क पर बिकने वाला कच्चा भुट्टा कम कीमत का होता है, लेकिन वही भुनने के बाद अधिक मूल्य का हो जाता है। इसी तरह जीवन में अपनी कीमत बढ़ानी है तो संघर्ष, मेहनत और कठिन परिस्थितियों से गुजरना ही पड़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने, किसी भी उपलब्धि पर अहंकार न करने और जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
pooja