प्रेम संबंध के चलते पति को उतारा मौत के घाट, पत्नी समेत चार को उम्रकैद
पानीपत के बहुचर्चित अशोक हत्याकांड में अदालत ने पत्नी सोनू समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मोबाइल वीडियो, DNA रिपोर्ट, डिजिटल फोरेंसिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य मामले में अहम साबित हुए।
➤ पत्नी सोनू समेत चार दोषियों को उम्रकैद, अदालत ने प्रत्येक पर लगाया 13 हजार रुपए जुर्माना
➤ हत्या का मोबाइल वीडियो, DNA और डिजिटल फोरेंसिक समेत वैज्ञानिक साक्ष्य बने फैसले का आधार
➤ अदालत ने सह-आरोपी उषा को हत्या के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर किया बरी
पानीपत के बहुचर्चित अशोक हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप सिंह की अदालत ने अशोक की पत्नी सोनू, गांव करसिंधु निवासी दीपक उर्फ दीपू, जोशी निवासी अजीत और सोमबीर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने चारों दोषियों पर 13-13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, सह-आरोपी उषा को हत्या से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।
इस मामले में मोबाइल फोन से मिला वीडियो, DNA रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डायटम टेस्ट, FSL और डिजिटल फोरेंसिक समेत कई वैज्ञानिक साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए। अदालत के सामने पुलिस अधिकारियों, फोरेंसिक विशेषज्ञों, चिकित्सकों, DNA विशेषज्ञों और मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारियों समेत कुल 28 गवाह पेश किए गए।
अशोक के लापता होने के बाद पत्नी ने ही दर्ज कराया था केस
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 सितंबर 2021 को अशोक लापता हो गया था। उसकी पत्नी सोनू ने ही इस संबंध में मामला दर्ज कराया था। बाद में अशोक का शव बरामद हुआ और पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में हत्या की साजिश के आरोप सामने आए। अभियोजन के मुताबिक, जांच में पत्नी सोनू के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने के साक्ष्य सामने आए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर चार आरोपियों को दोषी माना।
मोबाइल में मिला वीडियो बना मामले का अहम सबूत
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों में एक मोबाइल वीडियो रहा। जांच के दौरान अजीत के मोबाइल फोन से मिले वीडियो को पेन ड्राइव में कॉपी कर जांच के लिए लैब भेजा गया। डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद इसे अदालत के सामने भी पेश किया गया।
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, वीडियो से घटना में दीपक और अजीत की भूमिका सामने आई, जबकि वीडियो रिकॉर्ड करने में सोमबीर की भूमिका से जुड़े साक्ष्य भी पेश किए गए। अदालत ने इस डिजिटल साक्ष्य को अन्य वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ देखा।
DNA जांच से हुई बरामद शव की पहचान
बरामद शव की पहचान सुनिश्चित करने में DNA रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण साबित हुई। शव से लिए गए DNA नमूने का मिलान मृतक अशोक के भाई राजू के रक्त नमूने से कराया गया। जांच में DNA मिलान के आधार पर बरामद शव की पहचान अशोक के रूप में पुष्ट हुई। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने अभियोजन पक्ष की जांच की महत्वपूर्ण कड़ी को मजबूत किया।
पोस्टमार्टम और डायटम रिपोर्ट भी बनी फैसले का आधार
अदालत के सामने पोस्टमार्टम और डायटम परीक्षण से संबंधित रिपोर्ट भी पेश की गई। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर घटना का क्रम अदालत के सामने रखा। अदालत ने मोबाइल वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, DNA जांच, डिजिटल फोरेंसिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को समग्र रूप से देखते हुए चार आरोपियों को दोषी ठहराया।
पांच मोबाइल फोन की हुई थी फोरेंसिक जांच
जांच के दौरान आरोपियों से पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इन मोबाइल फोन और संबंधित डिजिटल सामग्री की CFSL से जांच कराई गई। मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों की जांच और प्रमाणीकरण ने मामले की महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ने में भूमिका निभाई। अदालत में डिजिटल सामग्री के साथ संबंधित तकनीकी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए।
28 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 28 गवाह पेश किए गए। इनमें पुलिस अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ, चिकित्सक, DNA विशेषज्ञ और मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारी शामिल थे।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने पत्नी सोनू, दीपक उर्फ दीपू, अजीत और सोमबीर को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 13 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, सह-आरोपी उषा को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया।
Akhil Mahajan