कनाड़ा के अरबपति खरीद रहे देश का ये सबसे बड़ा बैंक, क्या आपका भी है इसमें खाता?

IDBI बैंक की प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री को लेकर प्रेम वत्स की Fairfax Financial Holdings के करीब 47 से 49 हजार करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव की चर्चा है। अंतिम फैसला अभी बाकी है और सरकार प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है।

कनाड़ा के अरबपति खरीद रहे देश का ये सबसे बड़ा बैंक,  क्या आपका भी है इसमें खाता?

IDBI बैंक में सरकार और LIC की प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने की चर्चा

प्रेम वत्स की Fairfax Financial Holdings ने करीब 47 से 49 हजार करोड़ रुपए तक का प्रस्ताव रखा

मालिकाना बदलाव होने पर भी ग्राहकों की जमा राशि, लोन और बैंकिंग सेवाओं पर तत्काल असर की संभावना नहीं


IDBI बैंक के निजीकरण और हिस्सेदारी बिक्री को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी Fairfax Financial Holdings का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Fairfax ने बैंक में प्रस्तावित हिस्सेदारी खरीदने के लिए करीब 5.5 से 5.7 अरब डॉलर, यानी लगभग 47 हजार से 49 हजार करोड़ रुपए तक का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सौदे को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और आधिकारिक मंजूरी बाकी है।

अगर यह सौदा आगे बढ़ता है, तो इसे भारत के बैंकिंग क्षेत्र में बड़े विदेशी निवेश सौदों में गिना जा सकता है। फिलहाल सरकार प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है और अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि IDBI बैंक की हिस्सेदारी किस खरीदार को मिलेगी।

Fairfax Financial Holdings ने दिखाई बड़ी दिलचस्पी

भारतीय मूल के अरबपति प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली Fairfax Financial Holdings लंबे समय से भारत में निवेश करती रही है। अब कंपनी IDBI बैंक में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने की दौड़ में प्रमुख दावेदार के रूप में चर्चा में है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से करीब 5.5 से 5.7 अरब डॉलर का प्रस्ताव सामने आया है। भारतीय मुद्रा में इसकी अनुमानित कीमत करीब 47 हजार से 49 हजार करोड़ रुपए बैठती है। हालांकि, प्रस्ताव का अंतिम मूल्य और सौदे की शर्तें आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

सरकार और LIC की हिस्सेदारी बेचने की योजना

IDBI बैंक में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की बड़ी हिस्सेदारी है। सरकार लंबे समय से बैंक में अपनी और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा रणनीतिक बिक्री के जरिए बेचने की प्रक्रिया पर काम कर रही है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार और LIC की कुल मिलाकर 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना रही है। हिस्सेदारी बिक्री पूरी होने पर बैंक के प्रबंधन और नियंत्रण में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।

कभी NPA के दबाव में था बैंक, अब वित्तीय स्थिति में सुधार

IDBI बैंक एक समय खराब कर्ज यानी NPA और कमजोर वित्तीय स्थिति से जूझ रहा था। वर्ष 2018 में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक को Prompt Corrective Action (PCA) ढांचे में रखा था।

इसके बाद बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार की दिशा में काम किया। खराब कर्ज में कमी और मुनाफे में सुधार के बाद बैंक की स्थिति मजबूत हुई। इसी वजह से अब बड़े वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी इसमें बढ़ी है।

Fairfax के साथ Emirates NBD भी दौड़ में

IDBI बैंक की हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया में Fairfax Financial Holdings के अलावा दुबई की Emirates NBD का नाम भी प्रमुख दावेदारों में बताया जा रहा है। सरकार संबंधित प्रस्तावों और शर्तों की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय करेगी।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि IDBI बैंक का नियंत्रण निश्चित रूप से प्रेम वत्स या उनकी कंपनी को मिल जाएगा। अंतिम फैसला सरकारी प्रक्रिया, नियामकीय मंजूरियों और सौदे की शर्तों पर निर्भर करेगा।

ग्राहकों की जमा राशि और बैंकिंग सेवाओं पर क्या होगा असर?

अगर IDBI बैंक की प्रस्तावित हिस्सेदारी किसी निजी या विदेशी निवेशक को बेची जाती है, तो आम ग्राहकों के लिए तत्काल बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। बैंक की शाखाएं, जमा खाते, लोन, EMI और अन्य बैंकिंग सेवाएं सामान्य प्रक्रिया के तहत जारी रह सकती हैं।

मालिकाना ढांचे में बदलाव होने के बाद भविष्य में बैंक की कारोबारी रणनीति, डिजिटल सेवाओं, शाखा नेटवर्क या उत्पादों में बदलाव हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव को लागू करने के लिए बैंकिंग नियमों और नियामकीय व्यवस्था का पालन करना होगा।

अंतिम मंजूरी के बाद ही साफ होगी तस्वीर

IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री एक बड़ी और जटिल प्रक्रिया है। इसलिए किसी प्रस्ताव के सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि सौदा अंतिम रूप से पूरा हो गया है। सरकार और संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी के बाद ही खरीदार और अंतिम सौदे की शर्तें स्पष्ट होंगी।

फिलहाल बैंकिंग क्षेत्र की नजर इस प्रक्रिया पर बनी हुई है। यदि बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश के साथ यह सौदा पूरा होता है, तो यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कॉरपोरेट डील में शामिल हो सकता है।