सोनीपत DCRUST में लाइब्रेरी फंड पर सवाल: तीन वर्षों में 9.02 करोड़ का बजट, किताबों की खरीद शून्य

सोनीपत के DCRUST मुरथल में तीन वर्षों में 9.02 करोड़ रुपए के लाइब्रेरी बजट के बावजूद किताबों की खरीद न होने पर जांच के आदेश दिए गए हैं। तकनीकी शिक्षा निदेशालय ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

सोनीपत DCRUST में लाइब्रेरी फंड पर सवाल: तीन वर्षों में 9.02 करोड़ का बजट, किताबों की खरीद शून्य


निदेशालय ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, अभिलेख तलब
प्राथमिक जांच में लाइब्रेरी कमेटी पर उठे सवाल


सोनीपत जिले के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST) में लाइब्रेरी फंड के कथित गैर-उपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। हरियाणा के तकनीकी शिक्षा निदेशक ने इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के आधार पर मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाएगी।

मामला तब उजागर हुआ जब यह तथ्य सामने आया कि विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों से नई किताबों की खरीद नहीं की गई। जबकि इसी अवधि में पुस्तकालय के लिए कुल 9.02 करोड़ रुपए का बजट आवंटित हुआ। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2.45 करोड़, 2024-25 में 3.36 करोड़ और 2025-26 में 3.20 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए थे। इसके विपरीत वास्तविक खर्च केवल ई-लाइब्रेरी सब्सक्रिप्शन और सॉफ्टवेयर पर 19.95 लाख रुपए तथा समाचार पत्रों व पत्रिकाओं पर लगभग 4 लाख रुपए तक सीमित रहा।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार मार्च 2025 में 11.80 लाख रुपए में टर्निटिन सॉफ्टवेयर खरीदा गया। फरवरी 2024 में वार्षिक ई-लाइब्रेरी सदस्यता पर 3.71 लाख रुपए खर्च किए गए थे, जबकि 2025-26 के लिए 4.44 लाख रुपए का प्रावधान किया गया। बावजूद इसके, छात्रों और शिक्षकों को पुस्तकों की उपलब्धता में अपेक्षित लाभ नहीं मिला।

इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संघ ने कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह की अध्यक्षता वाली पुस्तकालय समिति को जिम्मेदार ठहराया है और इसे “गंभीर चिंता” का विषय बताया है। उनका कहना है कि संसाधनों के अभाव का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्यों पर पड़ा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति को भी पत्र लिखा गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि छात्रों ने पुस्तकालय शुल्क के रूप में करीब 2.30 करोड़ रुपए जमा कराए, लेकिन उन्हें उसके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल सकीं। एसोसिएशन ने मांग की है कि यूजीसी मानदंडों और नई शिक्षा नीति के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पुस्तकों और संसाधनों की तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध खरीद सुनिश्चित की जाए।

अब निगाहें निदेशालय की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि फंड के उपयोग में लापरवाही हुई या प्रक्रियागत देरी इसका कारण रही।