एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल, सोनीपत में थमे हजारों ट्रक

एनसीआर में ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। सोनीपत समेत कई जिलों में माल ढुलाई प्रभावित हुई है।

एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल, सोनीपत में थमे हजारों ट्रक

• एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू

• ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध का विरोध

• सोनीपत समेत कई जिलों में माल ढुलाई व्यवस्था प्रभावित


एनसीआर में ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल गुरुवार से शुरू हो गई है। इस हड़ताल का असर सोनीपत समेत आसपास के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में ट्रकों के पहिए थमने से माल ढुलाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है और कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्ट नगरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। रोजाना आवश्यक सामान, निर्माण सामग्री और औद्योगिक माल ढोने वाले ट्रक अब सड़कों से गायब नजर आ रहे हैं। इससे उद्योग और व्यापार जगत की चिंता बढ़ गई है।

सोनीपत स्थित भाईचारा ट्रक एसोसिएशन ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। संगठन के प्रधान अमित कटारिया ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने बताया कि फिलहाल 21 मई से 23 मई तक सांकेतिक हड़ताल की जा रही है। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आने वाले दिनों में आंदोलन को बड़े स्तर पर चलाया जाएगा।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध से हजारों ट्रक मालिकों और ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में बीएस-4 वाहन सड़कों पर चल रहे हैं और अचानक लगाए गए नियमों से आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है।

इसके अलावा ट्रांसपोर्टर ईसीसी शुल्क को भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं। उनका कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतें, टैक्स और अन्य खर्च पहले से ही कारोबार पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में नए नियमों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

हड़ताल के चलते कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने फिलहाल बुकिंग बंद कर दी है। माल समय पर नहीं पहुंचने से उद्योगों और व्यापारियों को नुकसान होने की आशंका है। ट्रक ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।