बादशाह के ‘टटीरी’ गाने पर विवाद, महिला आयोग और बाल अधिकार आयोग में शिकायत: स्कूल ड्रेस में नाबालिग लड़कियों के सीन और रैप की भाषा पर उठे सवाल
बॉलीवुड रैपर बादशाह के हरियाणवी फोक सॉन्ग ‘टटीरी’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गाने में नाबालिग लड़कियों को स्कूल यूनिफॉर्म में बैग फेंकते दिखाने और रैप की भाषा पर आपत्ति जताते हुए हरियाणा महिला आयोग और बाल अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई है।
■ बादशाह के हरियाणवी फोक सॉन्ग ‘टटीरी’ पर हरियाणा महिला आयोग और बाल आयोग में शिकायत
■ स्कूल यूनिफॉर्म में नाबालिग लड़कियों को बैग फेंकते दिखाने और रैप की भाषा पर आपत्ति
■ शिकायतकर्ताओं ने गाने के सीन और शब्दों को बच्चों के लिए गलत संदेश देने वाला बताया
हरियाणवी फोक सॉन्ग ‘टटीरी’ को लेकर बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह विवादों में घिर गए हैं। इस गाने को लेकर हरियाणा महिला आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अलग-अलग शिकायतें दी गई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गाने में नाबालिग लड़कियों को स्कूल यूनिफॉर्म में पढ़ाई से दूर भागते और स्कूल बैग फेंकते हुए दिखाया गया है, जो समाज में बच्चों के लिए गलत संदेश देता है। साथ ही रैप में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को भी आपत्तिजनक बताया गया है।
पहली शिकायत पानीपत निवासी सविता आर्या ने हरियाणा महिला आयोग को भेजी है, जबकि दूसरी शिकायत रोहतक के एडवोकेट राजनारायण पंघाल ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में दर्ज कराई है। दोनों शिकायतों में गाने की कुछ लाइनों और वीडियो में दिखाए गए दृश्यों पर गंभीर आपत्ति जताई गई है।
बताया गया है कि इस गाने में बादशाह के रैप की एक लाइन “आया बादशाह डोली चढ़ाने, इन सबकी घोड़ी बनाने” पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की शब्दावली और प्रस्तुति समाज में गलत संदेश दे सकती है और बच्चों के बीच भद्दी भाषा को सामान्य बना सकती है।
यह गाना 1 मार्च को रिलीज हुआ था। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान की आवाज भी शामिल है, जो हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं। रिलीज के बाद यह गाना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और यूट्यूब पर इसे अब तक 20 लाख से अधिक बार देखा और सुना जा चुका है।
शिकायत में खास तौर पर उस दृश्य पर आपत्ति जताई गई है जिसमें छोटी-छोटी नाबालिग लड़कियां सरकारी स्कूल की यूनिफॉर्म पहने हुए अपने स्कूल बैग और किताबें फेंकती दिखाई देती हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के दृश्य यह संदेश देते हैं कि पढ़ाई महत्वपूर्ण नहीं है, जबकि बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना समाज की जिम्मेदारी है।
शिकायत के अनुसार गाने में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द और दृश्य बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर गलत असर डाल सकते हैं। खासकर जब वीडियो में बच्चों को स्कूल ड्रेस में दिखाया जाता है तो इससे अन्य बच्चों पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है और वे पढ़ाई को हल्के में लेने लग सकते हैं।
एडवोकेट राजनारायण पंघाल ने अपनी शिकायत में कई कानूनों का भी हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के अनुसार बच्चों के लिए हानिकारक किसी भी सामग्री की जांच करना आयोग की जिम्मेदारी है। वहीं किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 के तहत बच्चों को मानसिक या भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को गलत माना गया है।
इसके अलावा मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। शिकायत में कहा गया है कि स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चों को पढ़ाई से दूर भागते दिखाना इस कानून की भावना के विपरीत है।
अब यह देखना अहम होगा कि महिला आयोग और बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस शिकायत पर क्या संज्ञान लेते हैं और क्या इस गाने की सामग्री को लेकर किसी प्रकार की कार्रवाई की जाती है।
Akhil Mahajan