30 सिक्योरिटी गार्ड, पुराना विवाद और धमकी… फिर 11 अक्टूबर को अतर सिंह भड़ाना तक हमलावर कैसे पहुंचे?

अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में 30 सुरक्षा गार्ड, पुराना क्रेशर रास्ता विवाद और कथित धमकी जांच के केंद्र में हैं। पांच आरोपी गिरफ्तार और तीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।

30 सिक्योरिटी गार्ड, पुराना विवाद और  धमकी… फिर 11 अक्टूबर को अतर सिंह भड़ाना तक हमलावर कैसे पहुंचे?

➤ खतरे की आशंका में 30 सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे, फिर हमले के वक्त सुरक्षा घेरा क्यों टूटा

➤ क्रेशर के रास्ते का पुराना विवाद और कथित गुप्त बैठक जांच के अहम बिंदु

➤ पांच गिरफ्तार, 64 लोग FIR में नामजद; थानाधिकारी सस्पेंड और दो अधिकारी APO


 पूर्व विधायक भाजपा नेता एवं हिमाचल आईएएस किरण भड़ाना के पिता अतर सिंह भड़ाना (68) की 11 अक्टूबर की शाम हुई हत्या ने सिर्फ हमलावरों की पहचान का सवाल नहीं खड़ा किया है, बल्कि यह भी बड़ा सवाल सामने आया है कि जब संभावित खतरे को देखते हुए भड़ाना की सुरक्षा में 30 सिक्योरिटी गार्ड लगाए गए थे, क्रेशर के रास्ते को लेकर विवाद पहले से चल रहा था और ग्रामीणों की ओर से हत्या से पहले कथित धमकी भरी बैठक का दावा किया जा रहा है, तो हमलावर आखिर उनके सुरक्षा घेरे तक कैसे पहुंचे। घटना के समय सभी 30 गार्ड क्रेशर परिसर में मौजूद बताए गए हैं, लेकिन हमले के दौरान उनके मौके से चले जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, पुलिस को घटना वाले दिन भड़ाना के क्रेशर पहुंचने की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। अब जांच में सुरक्षा व्यवस्था, पुराने विवाद, कथित धमकी, गांव में हुई बताई जा रही बैठक, फायरिंग और पुलिस की भूमिका जैसे कई सवाल एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहे हैं।

खतरे की आशंका थी, इसलिए 30 गार्ड रखे गए थे

जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, अतर सिंह भड़ाना ने संभावित खतरे को देखते हुए घटना से कुछ दिन पहले ही 30 सिक्योरिटी गार्ड नियुक्त किए थे। ये युवक उत्तर प्रदेश और धौलपुर क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं। घटना के समय सभी गार्ड क्रेशर परिसर में मौजूद थे।

यहीं से हत्याकांड की जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है कि यदि सुरक्षा के लिए 30 लोग परिसर में मौजूद थे तो हमले के दौरान भड़ाना की सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं टिक सकी। बताया गया है कि ग्रामीणों की भीड़ ने क्रेशर के कार्यालय और मकान की ओर हमला किया। हमलावरों के पास लाठी-डंडे और अन्य हथियार होने तथा पत्थर फेंके जाने के भी आरोप हैं।

ऐसे हालात में सुरक्षा के लिए तैनात युवक मौके से निकल गए। पुलिस ने सुरक्षा में लगाए गए कुछ युवकों से पूछताछ की है। उनके बयानों के आधार पर घटना के समय उनकी मौजूदगी, उनकी जिम्मेदारी और हमले के दौरान उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

हालांकि, 30 गार्डों के मौके से चले जाने के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं, उन्होंने हमला रोकने की कोशिश क्यों नहीं की और किस समय परिसर से बाहर निकले, इन सवालों का पूरा जवाब अभी जांच में सामने आना बाकी है।

पुराना रास्ता विवाद कितना बढ़ा था

हत्याकांड के पीछे क्रेशर तक पहुंचने वाले रास्ते का विवाद एक प्रमुख पहलू बताया जा रहा है। पुलिस और ग्रामीणों के बयानों के अनुसार, ग्रामीणों और अतर सिंह भड़ाना के पक्ष के बीच यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा था।

ग्रामीणों का आरोप था कि लीज तक जाने वाले रास्ते को बंद किए जाने और डंपर-ट्रैक्टरों की आवाजाही रोके जाने से परेशानी बढ़ गई थी। वहीं, भड़ाना की ओर से क्रेशर का संचालन दोबारा शुरू करने की कोशिश की जा रही थी। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की बात सामने आई है।

बताया गया है कि इससे पहले भी विवाद के दौरान मारपीट हुई थी। उस समय सुरक्षा में तैनात कुछ युवक भड़ाना के साथ मौजूद थे। उनके पास लाठी और सरिए जैसे सामान होने की बात भी सामने आई है।

यानी जांच में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि पुराना विवाद और पहले की घटनाएं सामने होने के बावजूद 11 अक्टूबर को सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी। हालांकि, पूरे विवाद की जिम्मेदारी और घटनाक्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

हत्या से पहले कथित गुप्त बैठक और धमकी का दावा

इस हत्याकांड में एक और गंभीर पहलू गांव में कथित सीक्रेट मीटिंग का है। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि हमले से पहले करीब 20 लोगों की बैठक हुई थी। आरोप है कि इस दौरान अतर सिंह भड़ाना को लेकर धमकी भरी बातें कही गई थीं।

दावे के मुताबिक, बैठक में कहा गया था कि उनका समय आ गया है और उनकी मौत होनी है। अगर यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि क्या हमले से पहले किसी संभावित खतरे के संकेत मौजूद थे।

हालांकि, इस कथित बातचीत और बैठक में हत्या की साजिश रचे जाने की बात अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है। पुलिस ने भी अब तक ऐसी किसी बैठक या उसमें हत्या की योजना बनाए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

इसलिए फिलहाल गुप्त बैठक और धमकी से जुड़ी जानकारी को आरोप और जांच के दायरे में ही देखा जा रहा है। पुलिस इस दावे की पुष्टि के लिए उपलब्ध बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

सबसे अहम सवाल, पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई

भरतपुर के SP राजेश मीणा के अनुसार, अतर सिंह भड़ाना जब भी लीज पर जाते थे तो पुलिस को इसकी जानकारी देते थे। लेकिन घटना वाले दिन पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई थी।

यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि क्रेशर के रास्ते को लेकर विवाद पहले से चल रहा था और सुरक्षा को लेकर भी भड़ाना ने 30 गार्ड लगाए थे। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि घटना वाले दिन पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई और क्या विवाद की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत थी।

जांच का एक अहम सवाल यह भी है कि अगर भड़ाना के क्रेशर पहुंचने की जानकारी पुलिस को पहले से होती तो क्या मौके पर सुरक्षा व्यवस्था अलग होती। फिलहाल इस सवाल का कोई अंतिम जवाब जांच पूरी होने से पहले नहीं दिया जा सकता।

11 अक्टूबर की शाम आखिर हुआ क्या

घटना के अनुसार, 11 अक्टूबर की शाम ग्रामीणों की भीड़ क्रेशर परिसर की ओर पहुंची। क्रेशर के कार्यालय और मकान की ओर हमले के दौरान लाठी-डंडों और अन्य हथियारों के इस्तेमाल तथा पत्थर फेंके जाने के आरोप लगाए गए हैं।

अतर सिंह भड़ाना की पत्नी कमलेश ने अपनी शिकायत में ग्रामीणों पर हमला करने, फायरिंग करने और उनके पति के सिर पर हथियार से वार करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, सिर पर चोट लगने से काफी खून बहने लगा था।

कमलेश के मुताबिक, गगन, पूरन सिंह और प्रदीप उन्हें बचाने के लिए आगे आए तो उनके साथ भी मारपीट की गई। इस दौरान गगन और प्रदीप घायल हो गए।

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि हमलावरों ने उन्हें और अन्य कर्मचारियों को जिंदा जलाने के इरादे से मकान में आग लगा दी। इन सभी आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

FIR में 64 नाम, लेकिन नामजद होना दोष साबित नहीं करता

इस मामले में दर्ज FIR में 64 लोगों को नामजद किया गया है और दो अज्ञात लोगों का उल्लेख है। शिकायत में हमले, फायरिंग और आगजनी सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम FIR में दर्ज होना अपने आप में उसका दोष सिद्ध नहीं करता है। पुलिस को प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच करनी होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।

इसी वजह से जांच में गिरफ्तार आरोपियों के बयान, शिकायत में नामजद लोगों की भूमिका, सुरक्षा गार्डों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्य महत्वपूर्ण हो गए हैं।

दो कारतूस के खोल मिले, लेकिन गोली किसने चलाई, अभी सवाल

घटना के बाद पुलिस और FSL टीम ने क्रेशर परिसर से कारतूस के दो खोल बरामद किए हैं। इससे घटनास्थल पर फायरिंग होने का पहलू सामने आया है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल अभी भी यही है कि गोली किसने चलाई और किन परिस्थितियों में चलाई गई।

कमलेश ने अपनी शिकायत में ग्रामीणों पर गोली चलाने का आरोप लगाया है। वहीं, घटनास्थल से मिले खोल के आधार पर देसी पिस्टल के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है।

जांच में यह संभावना भी सामने आई है कि संघर्ष के बीच किसी व्यक्ति ने बचाव में हवाई फायरिंग की हो सकती है। पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि घटनास्थल से मिले दोनों कारतूस किसने चलाए थे।

पांच गिरफ्तार, 35 से 40 अन्य लोगों के नाम भी जांच में

पुलिस ने हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों की ओर से 35 से 40 अन्य लोगों के नाम बताए जाने की जानकारी सामने आई है। ये लोग भौंडा गांव के निवासी बताए गए हैं।

अब पुलिस इन नामों की अलग-अलग भूमिका की जांच कर रही है। केवल किसी आरोपी के बयान में नाम सामने आने से किसी व्यक्ति की भूमिका साबित नहीं होती। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य जांच के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तय करनी होगी।

पुलिस महकमे में भी हुई कार्रवाई

अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद पुलिस विभाग में भी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बैठक के बाद वैर थानाधिकारी धीरेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया।

वहीं, ASP प्रेरणा शेखावत और भुसावर CO नीरज भारद्वाज को पदस्थापन की प्रतीक्षा यानी APO में भेजा गया है।

पुलिस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई के बाद विवाद से जुड़ी पूर्व शिकायतों और पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण नहीं माना जा सकता। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

30 गार्ड से लेकर पुलिस कार्रवाई तक, जांच के सामने कई सवाल

अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में अब जांच सिर्फ पांच गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। 30 सिक्योरिटी गार्डों की भूमिका, पुराने क्रेशर रास्ते के विवाद, कथित गुप्त बैठक, धमकी के दावे, पुलिस को घटना वाले दिन सूचना नहीं दिए जाने, दो कारतूस के खोल और FIR में नामजद 64 लोगों की भूमिका जैसे कई बिंदुओं को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संभावित खतरे को देखते हुए 30 सुरक्षा गार्ड लगाए गए थे और विवाद पहले से मौजूद था, तो 11 अक्टूबर की शाम हमलावर भड़ाना तक कैसे पहुंचे। इस सवाल का जवाब सुरक्षा गार्डों के बयानों, घटनास्थल के साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल पांच आरोपी गिरफ्तार हैं और पुलिस अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। कथित गुप्त बैठक और धमकी के दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में हत्याकांड की पूरी तस्वीर जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही साफ होगी।