सचिन पायलट बने पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी, भूपेश बघेल को हटाया; राहुल गांधी के दौरे से पहले बड़ा बदलाव
कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है। भूपेश बघेल को हटाकर असम की जिम्मेदारी दी गई, फैसला राहुल गांधी के दौरे से पहले हुआ
➤ सचिन पायलट बने पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी, भूपेश बघेल की छुट्टी
➤ राहुल गांधी के दौरे से पहले बदलाव, चन्नी गुट की मांग पर हाईकमान ने लिया फैसला
➤ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गुटबाजी खत्म कर संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी
जालंधर। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बीच कांग्रेस हाईकमान ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया है। उन्हें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले हुआ है। वहीं भूपेश बघेल को अब असम का प्रभारी बनाया गया है।
पंजाब कांग्रेस में भूपेश बघेल को हटाने की मांग काफी समय से उठ रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके गुट ने बघेल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा ताजपोशी के बाद चन्नी गुट की नाराजगी और बढ़ गई थी।
चन्नी गुट के नेताओं का आरोप था कि प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद भूपेश बघेल ने कांग्रेस हाईकमान को पंजाब की ग्राउंड रियलिटी की जानकारी नहीं दी। चन्नी और उनके समर्थक लगातार यह तर्क दे रहे थे कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन करना है तो वड़िंग-बघेल को हटाकर किसी मजबूत नेता को संगठन की कमान सौंपी जानी चाहिए। कई हफ्तों तक चले मंथन के बाद हाईकमान ने आखिरकार चन्नी गुट की मांग मान ली और सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बना दिया।
राहुल गांधी के दौरे से पहले हुआ बड़ा संगठनात्मक बदलाव
सचिन पायलट की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर हाईकमान की सक्रियता बढ़ी हुई थी। 4 सितंबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, खड़गे और केसी वेणुगोपाल की बैठक हुई थी। इसी बैठक में भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी से हटाने का फैसला हुआ।
इससे पहले 3 सितंबर को दिल्ली में भूपेश बघेल, राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य नेताओं की राहुल गांधी की टीम के साथ बैठक हुई थी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी पर चर्चा हुई। इसके बाद राहुल गांधी को पंजाब की स्थिति को लेकर रिपोर्ट दी गई।
चन्नी खेमा भूपेश बघेल का लगातार विरोध कर रहा था। पंजाब में कांग्रेस के कार्यक्रमों और रैलियों के दौरान बघेल के खिलाफ गो बैक के नारे भी लगाए गए थे। चन्नी खेमे ने हाईकमान के सामने बघेल को हटाने की मांग रखी थी।
चन्नी गुट की मांग के बाद पायलट को मिली जिम्मेदारी
पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की मांग के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा गुटबाजी को बताया जा रहा था। चन्नी गुट का मानना था कि पार्टी को मजबूत करने के लिए ऐसे नेता को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, जिसकी संगठन और जमीन पर पकड़ हो।
सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे कांग्रेस हाईकमान को उनसे कई उम्मीदें हैं। पार्टी का मानना है कि पायलट पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और संगठन को एकजुट करने में भूमिका निभा सकते हैं।
पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना कांग्रेस के लिए अहम माना जा रहा है।
चन्नी ने पायलट की नियुक्ति का किया स्वागत
सचिन पायलट की नियुक्ति के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर उनका स्वागत किया। चन्नी ने पंजाब कांग्रेस का प्रभारी महासचिव बनाए जाने पर सचिन पायलट को बधाई दी और इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए कांग्रेस पार्टी हाईकमान का धन्यवाद किया।
चन्नी गुट की ओर से लंबे समय से बघेल को हटाने की मांग की जा रही थी। अब पायलट को जिम्मेदारी मिलने के बाद पंजाब कांग्रेस की राजनीति में आगे क्या बदलाव होते हैं, इस पर भी नजर रहेगी।
सुखजिंदर सिंह रंधावा बोले- युवाओं में पायलट की मजबूत पकड़
सचिन पायलट की नियुक्ति को लेकर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट युवाओं से जुड़ते हैं और राजस्थान का युवा उन्हें काफी पसंद करता है। पंजाब में भी पायलट की यूथ लीडर की छवि का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
रंधावा ने कहा कि दूसरे राज्यों से आने वाले नेताओं को पंजाब में भाषा की समस्या आती है, लेकिन सचिन पायलट के मामले में यह चुनौती कम हो सकती है।
उन्होंने कहा कि सचिन पायलट की मां पंजाबी हैं और वह पंजाबी भाषा को अच्छी तरह समझते हैं। इसका फायदा भी पंजाब में मिलेगा। उनके पिता राजेश पायलट की पंजाब से नजदीकियां रही हैं और पंजाब के सभी नेता उनका सम्मान करते हैं।
पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी देने के पीछे तीन बड़े कारण
1. गुटबाजी के बीच संगठन को एकजुट करने की उम्मीद
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और नेताओं के आपसी मतभेदों से जूझ रही है। कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि सचिन पायलट संगठन को एकजुट करने में भूमिका निभा सकते हैं।
पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग गुटों के बीच तालमेल बैठाने की है। ऐसे में पायलट के अनुभव को पंजाब में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है।
2. राजस्थान में संगठन मजबूत करने का अनुभव
राजस्थान में वर्ष 2013 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने करीब पांच साल तक जमीन पर काम किया और अलग-अलग गुटों के साथ तालमेल बैठाते हुए 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत दिलाया।
कांग्रेस हाईकमान को उम्मीद है कि राजस्थान में संगठन को मजबूत करने और चुनावी जीत तक ले जाने का पायलट का अनुभव पंजाब में भी पार्टी के काम आ सकता है।
3. युवाओं में लोकप्रियता और जमीनी पकड़
सचिन पायलट को जमीनी पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है। युवाओं के बीच भी उनकी लोकप्रियता है। कांग्रेस पंजाब में संगठन को मजबूत करना चाहती है और पार्टी को उम्मीद है कि पायलट अपनी यूथ लीडर की छवि का फायदा उठाकर संगठन में नई ऊर्जा ला सकते हैं।
पायलट ने जिस तरह 2018 में राजस्थान में कांग्रेस को जीत दिलाई थी, हाईकमान को पंजाब में भी उनसे वैसा ही प्रदर्शन करने की उम्मीद है।
बघेल को हटाने की मांग को लेकर पंजाब में हुए थे विरोध प्रदर्शन
भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटाने की मांग को लेकर चन्नी गुट पहले भी कई मौकों पर खुलकर सामने आया था। 31 जुलाई से 8 अगस्त के बीच अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के दूसरी बार पंजाब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश में हर बूथ, कांग्रेस मजबूत अभियान चलाया गया था।
इस अभियान के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी के गुट ने भूपेश बघेल और वड़िंग का विरोध किया। पंजाब कांग्रेस के इतिहास में पहली बार किसी प्रदेश प्रभारी के खिलाफ गो बैक के पोस्टर लगाए गए।
31 जुलाई को फतेहगढ़ साहिब में दिखी गुटबाजी
अभियान के पहले ही कार्यक्रम में दोनों गुटों के बीच दरार साफ दिखाई दी। चन्नी और उनके समर्थक कार्यक्रम से दूर रहे।
1 अगस्त को संगरूर-पटियाला में हंगामा
संगरूर में भूपेश बघेल की मौजूदगी में चन्नी समर्थकों ने हंगामा किया। स्थिति हाथापाई और धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। वड़िंग के खिलाफ और चन्नी के समर्थन में नारे लगाए गए।
इसी दिन पटियाला में हुए कार्यक्रम में भी चन्नी गुट ने उन्हें सीएम चेहरा बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी की।
2 से 5 अगस्त तक मालवा बेल्ट में विरोध
मुक्तसर, बठिंडा और बरनाला में भी विरोध देखने को मिला। विधानसभा सीटों के लिहाज से पंजाब की सबसे बड़ी मालवा बेल्ट में जगह-जगह विरोध हुआ।
वड़िंग के गृहजिले मुक्तसर में भूपेश बघेल गो बैक के पोस्टर चिपकाए गए। बरनाला और बठिंडा में भी चन्नी समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया।
6 अगस्त को लुधियाना में सबसे उग्र विरोध
लुधियाना के कार्यक्रम में गुटबाजी का सबसे उग्र रूप देखने को मिला। चन्नी गुट के कार्यकर्ताओं ने बघेल गो बैक लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध किया।
कार्यक्रम स्थल के अंदर और बाहर दोनों खेमों के बीच तीखी झड़प हुई। इसके बाद स्थिति लात-घूंसों तक पहुंच गई।
राणा गुरजीत की पायलट से मुलाकात भी हुई थी
4 सितंबर को दिल्ली में संगठन की बैठक हुई थी। इसमें चन्नी गुट के राणा गुरजीत भी शामिल हुए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात केसी वेणुगोपाल के साथ हुई थी। इसके बाद राणा गुरजीत ने सचिन पायलट से भी मुलाकात की।
राणा गुरजीत ने कहा कि जब उन्होंने सचिन पायलट से मुलाकात की तो पंजाब को लेकर बातचीत जरूर हुई थी, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया जा रहा है।
राणा गुरजीत ने बताया कि उन्होंने पायलट से कहा था कि पंजाब के लोग उन्हें पसंद करते हैं।
बघेल के बाद अब अमरिंदर सिंह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा
भूपेश बघेल को हटाए जाने के बाद अब अमरिंदर सिंह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की संभावना के बीच राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद अब पार्टी के भीतर संगठनात्मक समीकरण किस तरह बदलते हैं, इस पर सबकी नजर है।
राजस्थान के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं सचिन पायलट
सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और डिप्टी सीएम रह चुके हैं। उनके पिता दिवंगत राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री रहे हैं।
गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सचिन पायलट महज 26 साल की उम्र में वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में दौसा सीट से सांसद बने थे। इसके बाद वह मनमोहन सरकार में मंत्री भी रहे।
कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान में वर्ष 2013 में पार्टी की करारी हार के बाद सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बनाया था। उन्होंने पांच साल मेहनत कर वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाई और राजस्थान के डिप्टी सीएम बने।
हालांकि, बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्हें डिप्टी सीएम की कुर्सी से हटना पड़ा।
अब कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके सामने पंजाब में गुटबाजी के बीच संगठन को मजबूत करने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को तैयार करने की चुनौती होगी।
Akhil Mahajan