पानीपत सिविल अस्पताल में प्रसूता की मौ*त

पानीपत सिविल अस्पताल में 25 वर्षीय प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार का दावा है कि रात में 15 बार स्टाफ को बुलाया।

पानीपत सिविल अस्पताल में प्रसूता की मौ*त

पानीपत सिविल अस्पताल में 25 वर्षीय प्रसूता की मौत, परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
➤ दर्द और सांस लेने में तकलीफ के बीच परिवार का दावा- रातभर 15 बार नर्सिंग स्टाफ को बुलाने गए, मदद नहीं मिली
➤ मौत के बाद अस्पताल में हंगामा, सीनियर डॉक्टर ने कार्रवाई का आश्वासन दिया; पुलिस और प्रशासन जांच में जुटे

पानीपत के सिविल अस्पताल के लेबर वार्ड में 25 वर्षीय प्रसूता की मौत के बाद हंगामा हो गया। परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों पर कथित लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि महिला रातभर तेज दर्द और सांस लेने में गंभीर दिक्कत से परेशान रही, लेकिन बार-बार नर्सिंग स्टाफ को बुलाने के बावजूद समय पर इलाज और ऑक्सीजन नहीं मिल सकी।

महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार अस्पताल परिसर में इकट्ठा हो गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर सीनियर डॉक्टर रिंकू सांगवान मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। उन्होंने दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

नॉर्मल डिलीवरी के बाद छुट्टी, बाथरूम में फिसलने पर दोबारा भर्ती हुई थी किरण

डाबर कॉलोनी निवासी उमेश ने घटना के बारे में बताया कि उनके छोटे भाई बिमलेश की शादी करीब 4 साल पहले विद्यानंद कॉलोनी निवासी किरण (25) से हुई थी। रविवार को किरण ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था।

सिविल अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी के बाद मंगलवार को जच्चा और बच्चा दोनों को छुट्टी दे दी गई थी। परिवार के मुताबिक घर पहुंचने के बाद बाथरूम में किरण का पैर फिसल गया, जिससे उसे चोट लग गई।

इसके बाद परिजन उसे तुरंत वापस सिविल अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने उसे दोबारा लेबर वार्ड में भर्ती कर लिया। मंगलवार से उसका इलाज चल रहा था। परिवार का कहना है कि इस दौरान उसके मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट नॉर्मल आ रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उसका दर्द कम नहीं हो रहा था।

रात में बिगड़ी हालत, सांस लेने में भी होने लगी गंभीर दिक्कत

परिजनों के मुताबिक शनिवार-रविवार की दरमियानी रात किरण की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। उसे तेज दर्द के साथ-साथ सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी। उस समय वार्ड में उसकी सास ऊषा और मां उसकी देखभाल के लिए मौजूद थीं।

परिजनों का आरोप है कि रातभर वे कम से कम 15 बार नर्सिंग स्टाफ के कमरे में गए और किरण की बिगड़ती हालत के बारे में जानकारी दी। उनका दावा है कि उन्होंने स्टाफ से मदद की गुहार लगाई और मरीज की हालत गंभीर होने की बात बताई।

परिजनों के अनुसार, उन्होंने स्टाफ से मदद के लिए काफी आग्रह किया और उनके पैर तक पकड़े, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने कथित तौर पर उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। परिवार का आरोप है कि कर्मचारियों ने अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और कहा कि सुबह डॉक्टर ही मरीज को देखेंगे

तड़पती रही प्रसूता, सुबह मौत के बाद अस्पताल में मचा हंगामा

परिजनों के अनुसार तड़के किरण ने इलाज और ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ दिया। महिला की मौत की जानकारी मिलते ही लेबर वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को लेकर परिजनों में आक्रोश फैल गया।

परिजनों का आरोप है कि प्रसूता की मौत के बाद स्थिति बिगड़ती देख लेबर वार्ड में मौजूद नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर एक-एक कर मौके से चले गए। इसके बाद महिला के परिजन और रिश्तेदार अस्पताल में एकत्र होने लगे।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना है कि अगर रात में समय पर महिला की हालत पर ध्यान दिया जाता और उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो स्थिति अलग हो सकती थी।

दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की मांग

घटना के बाद परिजनों ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों का कहना है कि महिला को लगातार दर्द हो रहा था और रात में उसकी सांस लेने की स्थिति भी बिगड़ रही थी। इसके बावजूद उनकी बार-बार की गई गुहार पर तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिली।

हंगामे की सूचना मिलने पर सीनियर डॉक्टर रिंकू सांगवान परिजनों से बातचीत करने पहुंचे। उन्होंने परिवार को शांत कराया और दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पुलिस और प्रशासन जांच में जुटे

फिलहाल सीनियर डॉक्टरों के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन जांच में जुटे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रसूता की मौत की वास्तविक वजह क्या रही और इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।

परिजन फिलहाल जिम्मेदार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। वहीं अस्पताल में हुई इस घटना के बाद लेबर वार्ड की व्यवस्था और रात के समय मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।