कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ रहा? इन्द्रप्रस्थ हॉस्पिटल में ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ में विशेषज्ञों ने बताई ये बड़ी वजह
पानीपत के इन्द्रप्रस्थ हॉस्पिटल में वर्ल्ड हार्ट डे पर प्रेसवार्ता हुई। विशेषज्ञों ने कम उम्र में बढ़ते हृदय रोग, जोखिम कारकों और गोल्डन ऑवर के महत्व पर जानकारी दी। 27 से 29 सितंबर तक विशेष हृदय स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित होगा।
➤ 30 से 50 वर्ष की उम्र में भी बढ़ रहे हृदय रोग के मामले
➤ तनाव, खराब खान-पान और निष्क्रिय जीवनशैली को बताया प्रमुख जोखिम कारक
➤ 27 से 29 सितंबर तक विशेष हृदय स्वास्थ्य जांच शिविर का ऐलान
पानीपत। ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ के उपलक्ष्य में इन्द्रप्रस्थ हॉस्पिटल, पानीपत यानी इन्द्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में विशेष प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों ने देश में बढ़ते हृदय रोगों, बदलती जीवनशैली, कम उम्र में सामने आ रहे हार्ट डिजीज के मामलों, आधुनिक उपचार सुविधाओं और समय पर इलाज के महत्व को लेकर जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने लोगों से हृदय स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने, नियमित जांच कराने और किसी भी गंभीर लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।
अस्पताल के चेयरमैन डॉ. ए.एस. राणा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य पानीपत और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. हरिओम गुप्ता ने संस्थान के विजन की जानकारी देते हुए कहा कि गंभीर हृदय रोगों के उपचार के लिए मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो, इसके लिए अस्पताल में आधुनिक कैथ लैब और क्रिटिकल केयर यूनिट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उनका कहना था कि स्थानीय स्तर पर समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना गंभीर मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
कम उम्र में भी बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा
प्रेसवार्ता के दौरान वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आबिद हुसैन ने भारत में बढ़ते हृदय रोगों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि हृदय संबंधी बीमारियां अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गई हैं और 30 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों में भी ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं।
उन्होंने हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाने वाले कई कारकों का उल्लेख किया। इनमें तनावपूर्ण जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, धूम्रपान, शराब का सेवन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापा प्रमुख जोखिम कारकों के तौर पर बताए गए।
डॉ. हुसैन ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और अपनी जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खान-पान में संतुलन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य संबंधी नियमित निगरानी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
हार्ट अटैक में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंदर भुक्खर ने कार्डियक इमरजेंसी और ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक की स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और मरीज को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं और कार्डियक टीम उपलब्ध रहने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य हृदय संबंधी आपात स्थिति में मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि हृदय संबंधी गंभीर लक्षण सामने आने पर उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक उपचार लिया जाए।
27 से 29 सितंबर तक विशेष हृदय स्वास्थ्य जांच शिविर
प्रेसवार्ता के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने जनहित में 27, 28 और 29 सितंबर को तीन दिवसीय विशेष हृदय स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने की घोषणा की। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार शिविर के दौरान विभिन्न हृदय स्वास्थ्य संबंधी जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अस्पताल के अनुसार शिविर में कार्डियोलॉजिस्ट परामर्श, ईसीजी और ब्लड शुगर जांच निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा इकोकार्डियोग्राफी, टीएमटी तथा अन्य ब्लड एवं रेडियोलॉजी जांचों पर विशेष दरों अथवा छूट की जानकारी दी गई है।
जरूरतमंद मरीजों के लिए एंजियोग्राफी विशेष दरों पर कराने तथा एंजियोप्लास्टी पर विशेष छूट उपलब्ध कराने की भी अस्पताल प्रबंधन ने जानकारी दी।
अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से अपील की कि वे हृदय स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और किसी भी गंभीर लक्षण की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।
Akhil Mahajan