वोट-चोरी रैली में नहीं पहुंचे 10 यूथ कांग्रेस पदाधिकारी सस्पेंड, रोहतक जिलाध्यक्ष भी शामिल

हरियाणा यूथ कांग्रेस ने वोट-चोरी रैली में शामिल नहीं होने पर 10 पदाधिकारियों को सस्पेंड किया। इनमें रोहतक जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। हाईकमान ने सख्त कार्रवाई की।

वोट-चोरी रैली में नहीं पहुंचे 10 यूथ कांग्रेस पदाधिकारी सस्पेंड, रोहतक जिलाध्यक्ष भी शामिल

वोट-चोरी रैली में गैरहाजिर रहे हरियाणा यूथ कांग्रेस के 10 पदाधिकारी सस्पेंड, रोहतक जिलाध्यक्ष भी शामिल

➤ 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई थी रैली, 2 नवंबर को राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर जारी हुआ निलंबन पत्र

➤ संगठनात्मक अनुशासनहीनता पर हाईकमान सख्त, अगले आदेश तक सभी पदाधिकारी जिम्मेदारियों से रहेंगे मुक्त

रोहतक। हरियाणा यूथ कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासनहीनता को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित वोट-चोरी रैली में शामिल नहीं होने वाले हरियाणा यूथ कांग्रेस के 10 प्रमुख पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबित किए गए पदाधिकारियों में रोहतक के जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश युवा कांग्रेस के संगठन में हलचल मच गई है।

यह कार्रवाई भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों पर की गई है। 2 नवंबर को जारी निलंबन पत्र में सभी संबंधित पदाधिकारियों को अगले आदेश तक उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी फिलहाल ये पदाधिकारी संगठन में अपने मौजूदा दायित्वों का निर्वहन नहीं कर सकेंगे।

राष्ट्रीय नेतृत्व की इस कार्रवाई को संगठन के कार्यक्रमों में भागीदारी और अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। बड़े राजनीतिक आयोजनों में पदाधिकारियों की मौजूदगी को संगठनात्मक जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में रैली में गैर-मौजूदगी को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया गया है।

रैली में गैर-मौजूदगी बनी कार्रवाई की वजह, पहले भी बैठकों से दूरी बनाने की बात

निलंबन के पीछे सबसे बड़ी वजह 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित वोट-चोरी रैली में संबंधित पदाधिकारियों का शामिल नहीं होना बताया गया है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसे गंभीर संगठनात्मक अनुशासनहीनता माना है।

बताया जा रहा है कि इन पदाधिकारियों की सामान्य संगठनात्मक बैठकों में भी गैर-मौजूदगी रहती थी। ऐसे में रैली जैसे बड़े आयोजन में शामिल नहीं होने को नेतृत्व ने संगठन के प्रति जिम्मेदारी में लापरवाही के तौर पर लिया।

हाईकमान का मानना है कि संगठन के प्रमुख पदों पर जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं को पार्टी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। बिना किसी ठोस वजह के ऐसे आयोजनों से दूरी बनाने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

राष्ट्रीय नेतृत्व ने दिया सख्त संदेश, अगले आदेश तक निलंबन लागू

इस पूरे मामले में भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के बाद 2 नवंबर को निलंबन पत्र जारी किया गया। इसमें स्पष्ट किया गया है कि संबंधित सभी 10 पदाधिकारी अगले आदेश तक अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त रहेंगे।

इस कार्रवाई को केवल रैली में गैर-मौजूदगी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन को लेकर नेतृत्व की सख्ती के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने ऐसे पदाधिकारियों को संदेश दिया है कि संगठन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और बैठकों में भागीदारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

निलंबन का आदेश प्रदेश प्रभारी सत्यवान गहलोत, सह-प्रभारी मीमांसा आर्य, सह-प्रभारी प्रियंका चंदेलिया, प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया और प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सौमिल संधू की सहमति से जारी किया गया है।

रोहतक जिलाध्यक्ष भी कार्रवाई की जद में, प्रदेश यूथ कांग्रेस में हलचल

इस कार्रवाई की सबसे अहम बात यह है कि निलंबित किए गए 10 पदाधिकारियों में रोहतक के जिलाध्यक्ष का नाम भी शामिल है। इससे स्पष्ट है कि कार्रवाई केवल सामान्य संगठनात्मक पदों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिला स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे पदाधिकारी भी इसकी जद में आए हैं।

हरियाणा यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया के नेतृत्व वाले संगठन में इस कार्रवाई को अनुशासन को लेकर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों पर जारी आदेश के बाद अब सभी संबंधित पदाधिकारियों को अगले निर्देशों का इंतजार रहेगा।

फिलहाल निलंबन की अवधि को लेकर कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी 10 पदाधिकारी अगले निर्देश तक अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त रहेंगे।