हरियाणा में गेस्ट टीचर्स को नियमित करने के आदेश पर हाई कोर्ट का बड़ा कदम, पुनर्विचार याचिका पर पक्षों से मांगा जवाब
हरियाणा में गेस्ट टीचर्स को नियमित करने के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।
➤ गेस्ट टीचर्स को नियमित करने के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
➤ याचिकाकर्ताओं का दावा, अदालत के समक्ष पुराने फैसलों और तथ्यों को नहीं रखा गया
➤ 9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, हजारों नियमित शिक्षकों पर पड़ सकता है असर
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गेस्ट टीचर्स को नियमित करने संबंधी एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर तय की है। यह मामला राज्य के हजारों गेस्ट टीचर्स और नियमित शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा माना जा रहा है।
पुनर्विचार याचिका दलीप सिंह व अन्य की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि वर्ष 2006 से अब तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गेस्ट टीचर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले दिए जा चुके हैं, लेकिन एकल पीठ के समक्ष इनका उल्लेख नहीं किया गया। उनका आरोप है कि इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर नहीं लाने के कारण गेस्ट टीचर्स को नियमित करने और सभी सेवा लाभ देने का आदेश पारित हुआ।
याचिकाकर्ताओं ने बलराज, बलदेव, दलीप सिंह, अशोक कुमार, तिलकराज और महेंद्र सिंह समेत विभिन्न मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों तथा आदेशों का हवाला देते हुए उन्हें रिकॉर्ड पर रखने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा देवी मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार और गेस्ट टीचर्स के संबंध में गंभीर टिप्पणियां की थीं।
याचिका में कहा गया है कि यदि गेस्ट टीचर्स को नियमित नियुक्ति के साथ वरिष्ठता (Seniority) का लाभ दिया जाता है तो शिक्षा विभाग के हजारों JBT, TGT और PGT शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। इतना ही नहीं, पदोन्नति प्राप्त कई शिक्षकों को वापस पूर्व पद पर भी भेजना पड़ सकता है।
हरियाणा में 2005-06 के दौरान तत्कालीन सरकार ने सरकारी स्कूलों में तीन महीने के लिए गेस्ट टीचर्स रखने की नीति लागू की थी। बाद में इन नियुक्तियों में अनियमितताओं के कई मामले सामने आए और विभागीय जांच में 719 से अधिक नियुक्तियों में गड़बड़ियों की बात भी सामने आई। इसके बाद गेस्ट टीचर्स के सेवा अधिकारों को लेकर कई बार न्यायालयों में सुनवाई होती रही है।
Akhil Mahajan