अष्टमी पर जन्मीं 7 ‘देवियां’: भिवानी के अंचल अस्पताल में आस्था और मानवता का संगम, बेटियों के जन्म पर सजा उत्सव
भिवानी के अंचल अस्पताल में नवदुर्गा अष्टमी पर 7 बेटियों का जन्म, देवी स्वरूप मानकर सम्मान, अनन्या शगुन योजना से 14 हजार बेटियों को मिला लाभ।
■ अष्टमी पर 7 बेटियों का जन्म, देवी स्वरूप मानकर हुआ स्वागत
■ अनन्या शगुन योजना से नवजातों का सम्मान, आस्था से जुड़ी पहल
■ 14 हजार से अधिक बेटियों को मिल चुका सम्मान और स्नेह
धर्म और आस्था की नगरी भिवानी में नवदुर्गा अष्टमी का पावन दिन इस बार एक अद्भुत और भावुक संयोग का साक्षी बना। दिनोद गेट स्थित अंचल अस्पताल में जब एक ही दिन में सात नवजात बेटियों ने जन्म लिया, तो इसे केवल एक संयोग नहीं बल्कि नवदुर्गा का साक्षात आशीर्वाद माना गया। अस्पताल परिसर में जैसे ही यह खबर फैली, माहौल स्वतः ही श्रद्धा, भक्ति और उत्सव में बदल गया। हर चेहरा मुस्कुरा रहा था और हर दिल इस दिव्य क्षण का साक्षी बनने पर खुद को धन्य मान रहा था।
इन नवजात बेटियों को केवल जन्म नहीं मिला, बल्कि उन्हें उसी क्षण से देवी स्वरूप मानकर सम्मानित किया गया। अस्पताल प्रशासन ने वर्षों से चल रही अनन्या शगुन योजना के तहत इन बेटियों और उनकी माताओं का विधिवत अभिनंदन किया। बेटियों को 1100 रुपये शगुन, तुलसी का पौधा, मिठाई, झूला और लाल चुनरी भेंट कर जैसे यह संदेश दिया गया कि बेटी का जन्म केवल परिवार नहीं, पूरे समाज के लिए उत्सव है।
कार्यक्रम में गीता कुंज से आईं साध्वी क्षमा दीदी की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी आध्यात्मिक ऊंचाई दी। उन्होंने बेटियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि “जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है”। उनके शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति के मन में यह भाव जगा दिया कि बेटियां किसी बोझ की नहीं, बल्कि ईश्वर की अनमोल देन हैं। उन्होंने 501 रुपये का शगुन देकर इस पहल को और भी भावनात्मक बना दिया।
अस्पताल के निदेशक डॉ. विनोद अंचल और डॉ. अनीता अंचल ने बताया कि यह पहल उन्होंने अपनी बेटी के जन्म के साथ वर्ष 2012-13 में शुरू की थी। तब एक छोटा सा भाव था, लेकिन आज यह एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 14 हजार बेटियों को इस योजना के तहत सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जब समाज बेटियों को देवी के रूप में स्वीकार करेगा, तभी सच्चे अर्थों में नवरात्र का महत्व पूर्ण होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बेटियां केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि सृष्टि का आधार हैं। उन्हें जन्म देने और सम्मान देने से ही समाज संतुलित और समृद्ध बन सकता है। यही भावना देश में चल रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को भी मजबूती देती है। यह पहल उस सोच को बदलने का प्रयास है, जहां कभी बेटियों के जन्म पर चिंता होती थी, वहीं अब उनके जन्म पर उत्सव मनाया जा रहा है।
इस पूरे आयोजन में सबसे भावुक दृश्य वह था जब नवजात बेटियों की माताएं अपनी गोद में बेटियों को लिए मुस्कुरा रही थीं। उनके चेहरे पर गर्व, खुशी और संतोष साफ झलक रहा था। परिजनों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सकारात्मक सोच का निर्माण करते हैं। यह आयोजन केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि जब बेटियों को देवी मानकर सम्मान दिया जाएगा, तभी समाज में सच्ची खुशहाली और संतुलन आएगा।
Akhil Mahajan