विनेश फोगाट को हराने वाली मीनाक्षी गोयत की संघर्षगाथा, मां को कैंसर, खुद चोट से टूटीं लेकिन नहीं मानी हार

विनेश फोगाट को हराने वाली मीनाक्षी गोयत की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। मां के कैंसर और गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सफलता हासिल की।

विनेश फोगाट को हराने वाली मीनाक्षी गोयत की संघर्षगाथा, मां को कैंसर, खुद चोट से टूटीं लेकिन नहीं मानी हार

मां के कैंसर और गंभीर चोट के बावजूद मीनाक्षी ने नहीं छोड़ी कुश्ती

डॉक्टरों ने कहा था- सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल होगा

एशियन गेम्स ट्रायल में विनेश फोगाट को हराकर बनीं चर्चा का केंद्र


"पहले मां को कैंसर हुआ, फिर खुद के पैर में गंभीर चोट लग गई। डॉक्टरों ने कह दिया था कि शायद सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो जाए। उस वक्त लगा था कि सब खत्म हो गया, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।"

हरियाणा के जींद जिले के चाबरी गांव की रहने वाली 25 वर्षीय पहलवान मीनाक्षी गोयत की यह कहानी संघर्ष, जज्बे और हौसले की मिसाल है। एशियन गेम्स 2026 चयन ट्रायल्स में ओलिंपियन विनेश फोगाट को हराने के बाद मीनाक्षी अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गई हैं।

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित चयन ट्रायल्स के 53 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में मीनाक्षी ने विनेश फोगाट को 6-4 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में उन्हें अंतिम पंघाल के हाथों हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी जीत ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

मीनाक्षी गोयत खुद को WWE स्टार जॉन सीना की फैन बताती हैं।-फाइल फोटो

जींद से सोनीपत तक परिवार का संघर्ष

मीनाक्षी गोयत मूल रूप से जींद जिले के चाबरी गांव की रहने वाली हैं। वह तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनकी प्रतिभा को देखते हुए परिवार ने बड़ा फैसला लेते हुए बेहतर प्रशिक्षण के लिए जींद छोड़कर सोनीपत में बसने का निर्णय लिया।

उनके पिता प्रेम गोयत सोनीपत में डेयरी का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने बेटी की ट्रेनिंग और डाइट का भी पूरा ध्यान रखा। मीनाक्षी ने खेल के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखते हुए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री भी हासिल की।

अपने पिता प्रेम गोयत के साथ पहलवान मीनाक्षी गोयत।-फाइल फोटो

जॉन सीना को देखकर शुरू की कुश्ती

मीनाक्षी के पिता बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें कुश्ती का बेहद शौक था। वह WWE सुपरस्टार जॉन सीना की बड़ी प्रशंसक हैं। टीवी पर जॉन सीना को देखकर ही उन्होंने पहलवान बनने का सपना देखा।

महज 10 साल की उम्र में उन्होंने कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू कर दी। शुरुआती प्रशिक्षण के लिए उन्हें निडानी स्पोर्ट्स हॉस्टल में दाखिला दिलाया गया, जहां से उनके खेल करियर की मजबूत नींव पड़ी।

मां के कैंसर ने झकझोर दिया परिवार

मीनाक्षी की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर तब आया जब उनकी मां को कैंसर होने का पता चला। परिवार भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह की चुनौतियों से जूझ रहा था।

इसके बावजूद मीनाक्षी ने अपने अभ्यास और लक्ष्य से समझौता नहीं किया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने मेहनत जारी रखी और वर्ष 2016 में सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके बाद 2018 में जूनियर राष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता हासिल की।

डॉक्टरों ने कहा था- चलना भी मुश्किल होगा

साल 2019 में अंडर-23 राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान एक मुकाबले में फिसलने से मीनाक्षी के पैर में गंभीर चोट लग गई। चोट इतनी खतरनाक थी कि डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि उनके लिए सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो सकता है।

वह छह महीने से अधिक समय तक बिस्तर पर रहीं। इस दौरान जब दूसरे खिलाड़ी मेडल जीतते थे तो उन्हें काफी निराशा होती थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।

चोट से वापसी कर बदली किस्मत

लंबे इलाज और रिहैबिलिटेशन के बाद मीनाक्षी ने दोबारा ट्रेनिंग शुरू की। उन्होंने खुद को पूरी तरह फिट किया, वजन नियंत्रित किया और फिर मैट पर वापसी की तैयारी में जुट गईं।

उनकी मेहनत रंग लाई और एक साल के भीतर ही उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत ली। इसके बाद उन्होंने 53 किलोग्राम भार वर्ग में अपनी मजबूत पहचान बना ली और लगातार राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करती रहीं।

सिल्वर मेडल से लेकर विनेश पर जीत तक

मीनाक्षी गोयत ने हाल ही में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। वह राष्ट्रीय स्तर पर दो बार चैंपियन भी रह चुकी हैं।

एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में उन्होंने पहले भारत की स्टार पहलवान अंतिम पंघाल को हराकर भारतीय टीम में जगह बनाई। इसके बाद सेमीफाइनल में विनेश फोगाट को 6-4 से हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

आज मीनाक्षी गोयत सिर्फ एक पहलवान नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखना चाहते हैं।