अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक दस्तखत

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। 19 जून को जेनेवा में हस्ताक्षर की संभावना जताई गई है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट खोलने की बात भी कही गई है।

अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक दस्तखत
  • अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्ति के लिए शांति समझौते पर राजी
  • 19 जून को जेनेवा में हो सकते हैं समझौते पर हस्ताक्षर
  • होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोलने और नाकेबंदी हटाने का दावा

दुनिया की सबसे चर्चित भू-राजनीतिक टकरावों में से एक अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बाद अब शांति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने का दावा किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा है कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है।

वहीं ईरान की ओर से भी बयान जारी कर बताया गया कि कई महीनों तक चली कठिन और लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ट्रम्प ने दावा किया कि समझौते के तहत रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी भी दी गई है। ट्रम्प ने अपने संदेश में कहा, "दुनिया के जहाजो, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।"

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह करीब 47 वर्षों में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक मानी जाएगी।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, ईरान के कुछ फ्रीज्ड फंड जारी करना और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि आगे की बातचीत अमेरिका द्वारा कुछ अहम वादे पूरे करने पर निर्भर करेगी। उनके अनुसार अमेरिका को नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करनी होगी, सभी सैन्य गतिविधियां रोकनी होंगी और ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करने होंगे।

हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि समझौते से जुड़ी कई जानकारियां फिलहाल ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और अमेरिका की ओर से सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दुनिया की नजर अब 19 जून को प्रस्तावित बैठक और संभावित समझौते पर टिकी हुई है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद को जानिए

ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। ईरान लगातार दावा करता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका मकसद बिजली उत्पादन के अलावा जरूरी नागरिक जरूरतें हैं। लेकिन अमेरिका और इजराइल इस दावे को नहीं मानते। उनका कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

2015 का परमाणु समझौता क्या था?

  • 2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) का स्तर 3.67% तक सीमित रखने पर सहमति दी थी।
  • 3.67% संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु बिजलीघरों के ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
  • परमाणु हथियार बनाने के लिए आमतौर पर 90% या उससे अधिक संवर्धित यूरेनियम की जरूरत होती है।

ट्रम्प के फैसले के बाद क्या बदला?

  • 2018 में ट्रम्प ने अमेरिका को 2015 के परमाणु समझौते से बाहर निकाल लिया।
  • इसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे यूरेनियम संवर्धन का स्तर बढ़ाना शुरू कर दिया।
  • ईरान ने खुले तौर पर 3.67% की सीमा से ऊपर जाना शुरू किया।

ईरान कितनी दूर पहुंच गया था?

  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के मुताबिक जून 2025 तक ईरान 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था।
  • उसके पास 60% संवर्धित यूरेनियम का करीब 400 किलोग्राम भंडार था।
  • यह स्तर परमाणु हथियार के लिए जरूरी 90% से नीचे है, लेकिन नागरिक उपयोग के लिए जरूरी स्तर से काफी ज्यादा है।