अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की खबर, आज से लागू होने का दावा
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर की खबर सामने आई है, जिसमें पाकिस्तान द्वारा तैयार फ्रेमवर्क के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने की सहमति बताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
■ अमेरिका-ईरान के बीच आज से सीजफायर लागू होने का दावा
■ पाकिस्तान ने तैयार किया शांति फ्रेमवर्क, होर्मुज खोलने पर सहमति की बात
■ आधिकारिक पुष्टि नहीं, 45 दिन के सीजफायर पर भी चल रही बातचीत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States और Iran के बीच संभावित सीजफायर की खबर ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझ बनी है, जिसके तहत सोमवार से युद्धविराम लागू हो सकता है। हालांकि इस पर अभी तक किसी भी पक्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस सीजफायर के लिए एक डिप्लोमैटिक फ्रेमवर्क Pakistan ने तैयार किया है। बताया जा रहा है कि इस फ्रेमवर्क को दोनों देशों के साथ साझा किया गया है और इसे अंतिम रूप देकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तौर पर लागू किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक कम्युनिकेशन चैनल की भूमिका निभा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार, सीजफायर लागू होते ही रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को तुरंत खोलने पर भी सहमति बनी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता है, और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही थी।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस डील के तहत दो-स्तरीय (Two-layer) अप्रोच अपनाई जाएगी, जिसमें पहले तुरंत युद्धविराम लागू होगा और उसके बाद 15-20 दिनों के भीतर एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस संभावित समझौते को फिलहाल “इस्लामाबाद अकॉर्ड” नाम दिया गया है।इससे पहले 45 दिनों के संभावित सीजफायर को लेकर भी बातचीत की खबर सामने आई थी, जिससे लंबे समय से चल रहा तनाव खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। बताया गया है कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और अमेरिका-ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है।
हालांकि, Iran की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान ने पहले यह शर्त रखी थी कि उसे स्थायी सीजफायर के लिए सुरक्षा गारंटी चाहिए, जिसमें अमेरिका और इजरायल द्वारा भविष्य में हमले न करने का आश्वासन शामिल हो।
इसके अलावा संभावित समझौते में यह भी शामिल हो सकता है कि ईरान कुछ प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज किए गए संपत्तियों की वापसी के बदले न्यूक्लियर हथियारों की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा।फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम कूटनीतिक स्तर पर बेहद संवेदनशील बना हुआ है। जब तक दोनों देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक सीजफायर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती। लेकिन अगर यह समझौता लागू होता है, तो यह मिडिल ईस्ट में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
shubham