गुड़िया केस के अहम गवाह कॉन्स्टेबल दिनेश शर्मा सस्पेंड, परिजनों ने लगाए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप

हिमाचल के चर्चित गुड़िया कस्टोडियल डेथ केस के गवाह कॉन्स्टेबल दिनेश शर्मा को सस्पेंड किया गया। परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर प्रताड़ना और बार-बार तबादले के आरोप लगाए।

गुड़िया केस के अहम गवाह कॉन्स्टेबल दिनेश शर्मा सस्पेंड, परिजनों ने लगाए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप

गुड़िया कस्टोडियल डेथ केस के अहम गवाह कॉन्स्टेबल दिनेश शर्मा सस्पेंड

परिजनों ने DGP और SP पर प्रताड़ना व बार-बार तबादले के गंभीर आरोप लगाए

परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की, न्याय न मिलने पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

हिमाचल प्रदेश के चर्चित गुड़िया रेप एवं मर्डर केस से जुड़े कस्टोडियल डेथ मामले में नया विवाद सामने आया है। इस मामले के अहम गवाह रहे कॉन्स्टेबल दिनेश शर्मा को हिमाचल पुलिस ने निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। दिनेश शर्मा की गवाही के आधार पर ही मामले में तत्कालीन आईजी समेत आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

निलंबन के बाद गुरुवार को शिमला में दिनेश शर्मा के भाई सुरेश शांडिल्य और उनकी मां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिनेश शर्मा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और डेढ़ महीने के भीतर पांच बार उनका तबादला किया गया।

परिजनों का आरोप है कि जब दिनेश शर्मा ने अपने तबादले को रोकने की मांग की और इस संबंध में लोक भवन पहुंचे, तो उन्हें निलंबित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से की गई है।

परिवार ने बताया कि दिनेश शर्मा का बेटा दिव्यांग है और उसकी देखभाल के लिए पिता की उपस्थिति बेहद जरूरी है। बच्चे को स्कूल लाने-ले जाने और दैनिक जरूरतों के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है। इसी वजह से दिनेश ने चौपाल से तबादला नहीं करने का अनुरोध किया था।

प्रेस वार्ता के दौरान दिनेश शर्मा की मां भावुक हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को इतना परेशान किया गया कि वह खुद कह रहा है कि उसे जहर खाना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि गुड़िया कांड में सच बोलना क्या अपराध था, जिसकी आज सजा दी जा रही है।

दिनेश शर्मा के भाई सुरेश शांडिल्य ने बताया कि सेवा के दौरान उनके भाई को कई प्रशस्ति पत्र मिले हैं और उनका कार्य रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा है। इसके बावजूद उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

परिवार ने राज्य सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो उनके भाई के साथ भी किसी बड़ी अनहोनी की आशंका है। न्याय नहीं मिलने की स्थिति में परिवार हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कह रहा है।

क्या है गुड़िया रेप एवं मर्डर केस?

4 जुलाई 2017 को शिमला के कोटखाई क्षेत्र की एक स्कूली छात्रा लापता हो गई थी। 6 जुलाई को उसका शव तांदी जंगल से बरामद हुआ। जांच में दुष्कर्म के बाद हत्या की पुष्टि हुई थी। मामले की जांच तत्कालीन आईजी जहूर हैदर जैदी के नेतृत्व वाली एसआईटी ने की थी।

जांच के दौरान राज और सूरज (नेपाली) को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि पुलिस हिरासत में मारपीट के दौरान सूरज की मौत हो गई थी। उस समय ड्यूटी पर मौजूद कॉन्स्टेबल दिनेश शर्मा की गवाही के आधार पर सीबीआई कोर्ट, चंडीगढ़ ने आईजी समेत आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब दिनेश शर्मा के परिजनों का आरोप है कि उन्हें उसी मामले में सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ रही है।