म्हारी छोरियां छोरों से कम नहीं: हरियाणा के एक ही गांव की दो बेटियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में गाड़े झंडे, मेडल पक्के!

भिवानी के चार मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदक पक्के किए। धनाणा गांव देश का पहला गांव बना, जहां की दो बेटियों ने एक साथ पदक सुनिश्चित किए।

म्हारी छोरियां छोरों से कम नहीं: हरियाणा के एक ही गांव की दो बेटियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में गाड़े झंडे, मेडल पक्के!

➤ धनाणा देश का पहला गांव बना, जहां की दो बेटियों ने एक साथ पदक किए पक्के

➤ भिवानी के 4 मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का बढ़ाया मान

➤ अब सभी खिलाड़ियों की नजर गोल्ड मेडल जीतने पर

  


हरियाणा का भिवानी जिला, जिसे भारतीय मुक्केबाजी की नर्सरी और 'मिनी क्यूबा' कहा जाता है, ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर इतिहास रच दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भिवानी के चार स्टार मुक्केबाजों ने रिंग में अपने मुक्कों का दम दिखाते हुए देश के लिए पदक पक्के कर लिए हैं।

इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ धनाणा गांव

इस बार सबसे बड़ी उपलब्धि भिवानी के धनाणा गांव के नाम दर्ज हुई है। धनाणा देश का पहला ऐसा गांव बन गया है, जिसकी दो बॉक्सर बेटियों—साक्षी चौधरी और प्रिया घांघस—ने एक साथ राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पदक पक्के किए हैं।

भारतीय सेना में कार्यरत साक्षी चौधरी (51 किग्रा) ने अपने रिंग नियंत्रण और सटीक पंचों के दम पर प्रतिद्वंद्वी को मात देकर पदक पक्का किया। वहीं, एशियाई चैंपियन प्रिया घांघस (60 किग्रा) ने अपनी निडर और आक्रामक शैली से रिंग में जीत दर्ज करते हुए पदक तालिका में भारत का नाम पक्का किया।

भिवानी के चार मुक्केबाज़, जिन्होंने बढ़ाया देश का मान

मुक्केबाज़ का नाम गांव (भिवानी) भार वर्ग उपलब्धि/स्थिति
साक्षी चौधरी धनाणा 51 किग्रा (महिला) पदक पक्का (भारतीय सेना में कार्यरत)
प्रिया घांघस धनाणा 60 किग्रा (महिला) पदक पक्का (एशियाई गोल्ड मेडलिस्ट)
प्रीति पंवार बडेसरा 54 किग्रा (महिला) पदक पक्का (सेना में नायब सूबेदार)
सचिन सिवाच (जूनियर) मित्ताथल 60 किग्रा (पुरुष) पदक पक्का

बडेसरा और मित्ताथल से भी चमके सितारे

धनाणा की दो बेटियों के अलावा बडेसरा गांव की बेटी प्रीति पंवार (54 किग्रा) ने भी अपनी पंचिंग पावर से पदक पक्का कर लिया है। प्रीति भारतीय सेना की पहली महिला मुक्केबाज़ हैं जिन्हें सीधे नायब सूबेदार पद पर नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही मित्ताथल गांव के सचिन सिवाच (जूनियर) (60 किग्रा) ने पुरुषों के वर्ग में अपना दबदबा कायम रखते हुए पदक पर मुहर लगा दी है।

'अभी तो सिर्फ शुरुआत है, लक्ष्य गोल्ड पर'

एक ही जिले से 4 पदक पक्के होने के बाद पूरे भिवानी में जश्न का माहौल है। खेल विशेषज्ञों और गांव के कोचों का कहना है कि पदक पक्के होना तो केवल पहला पड़ाव है, हमारे मुक्केबाज देश के लिए 'गोल्ड मेडल' लेकर लौटेंगे। साथ ही, आगामी मुकाबलों से भिवानी के अन्य मुक्केबाजों से भी और मेडल आने की पूरी उम्मीद है।