वाह रे पुलिस : 2 साल पहले दिवंगत पूर्व MLA पर दर्ज कर दी FIR, वे समर्थकों के साथ आए...

चंडीगढ़ पुलिस की FIR में बड़ी लापरवाही सामने आई। दो साल पहले दिवंगत पूर्व विधायक अजैब सिंह मुखमैलपुर का नाम आरोपी बनाया गया, जबकि अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह का नाम शामिल नहीं किया गया।

वाह रे पुलिस : 2 साल पहले दिवंगत पूर्व MLA पर दर्ज कर दी FIR,  वे समर्थकों के साथ आए...

2 साल पहले दिवंगत पूर्व विधायक का नाम FIR में दर्ज
अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह का नाम FIR से नदारद
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल


चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के प्रदर्शन के बाद दर्ज की गई FIR में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री अजैब सिंह मुखमैलपुर का नाम भी आरोपियों में शामिल कर दिया, जबकि उनका करीब दो वर्ष पहले 75 वर्ष की आयु में निधन हो चुका है। इतना ही नहीं, प्रदर्शन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह का नाम FIR में दर्ज नहीं किया गया। इस चूक के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दिवंगत नेता पर लगाया रास्ता जाम करने का आरोप


FIR में दावा किया गया कि अजैब सिंह मुखमैलपुर अपने समर्थकों के साथ गोशाला चौक पहुंचे और सड़क जाम कर दी। जबकि वास्तविकता यह है कि उनका दो साल पहले ही निधन हो चुका है। परिवार ने इस गलती पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पुलिस को तथ्य जांचने के बाद ही कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अमृतपाल के पिता का नाम नहीं


इस पूरे प्रदर्शन के दौरान तरसेम सिंह, जो सांसद अमृतपाल सिंह के पिता हैं, प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश करते दिखाई दिए। इसके बावजूद उनका नाम FIR में शामिल नहीं किया गया। इससे पुलिस की जांच और नामजदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

2500 से 3000 लोगों पर केस


चंडीगढ़ पुलिस ने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के लगभग 2500 से 3000 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। FIR में विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, लक्खा सिधाना, भाना सिद्धू समेत कई नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और कानून व्यवस्था बाधित की।

कैसे टूटी सुरक्षा व्यवस्था


प्रदर्शन पहले से घोषित होने के बावजूद पुलिस प्रदर्शनकारियों को चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर रोकने में असफल रही। प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी आवास के करीब तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस का वाटर कैनन भी प्रदर्शनकारियों के कब्जे में चला गया और कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

रिटायर्ड DGP ने बताई वजह


पंजाब के पूर्व DGP ए.पी. पांडे ने कहा कि यह पूरी घटना चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस के बीच समन्वय की कमी तथा ग्राउंड इंटेलिजेंस की विफलता का परिणाम है। उनके अनुसार, बड़े प्रदर्शन से पहले पर्याप्त पुलिस बल, स्पष्ट कमांड और बेहतर योजना बनाई जानी चाहिए थी।

पुलिस की सफाई


चंडीगढ़ SSP कंवरदीप कौर ने कहा कि प्रदर्शनकारी नेताओं से एक सप्ताह से बातचीत चल रही थी, लेकिन उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए। उनके मुताबिक कुछ लोग हथियार लेकर आए थे और पुलिस माहौल को हिंसक होने से रोकना चाहती थी। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।