कई राज्यों में सत्ता लौटी, लेकिन CM चेहरा बदल गया

2021 से 2025 तक 22 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में कई जगह सत्ता दोबारा लौटी, लेकिन मुख्यमंत्री बदल दिए गए। जानिए एंटी-इन्कम्बेंसी, जातीय समीकरण और राजनीतिक रणनीति की पूरी कहानी।

कई राज्यों में सत्ता लौटी, लेकिन CM चेहरा बदल गया

2021 से 2025 तक 22 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव

कई राज्यों में सत्ता लौटी, लेकिन CM चेहरा बदल गया

2026 चुनावों में भी नए चेहरों पर दांव की चर्चा तेज


बीते पांच वर्षों में भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब सिर्फ चुनाव जीतना ही काफी नहीं रह गया, बल्कि जीत के बाद मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह भी पार्टियों की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।

2021 से 2025 के बीच देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हुए। इनमें कई जगह सत्ताधारी दल दोबारा सत्ता में लौटे, लेकिन मुख्यमंत्री बदल दिए गए। कहीं एंटी-इन्कम्बेंसी से बचने के लिए नया चेहरा लाया गया, तो कहीं जातीय समीकरण और गठबंधन की मजबूरियों ने फैसला तय किया।

अब 2026 के चुनावी नतीजों से पहले फिर यही सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी पार्टियां नए चेहरों पर दांव लगाएंगी?


2021: बंगाल में ममता कायम, तमिलनाडु में नया चेहरा

2021 में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव हुए।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बनी रहीं।
असम में बीजेपी सत्ता में लौटी और हिमंत बिस्वा सरमा को सीएम बनाया गया।
केरल में पिनाराई विजयन ने इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की।
वहीं तमिलनाडु में DMK की जीत के बाद एम.के. स्टालिन पहली बार मुख्यमंत्री बने।
पुडुचेरी में एन. रंगास्वामी ने NDA सरकार का नेतृत्व संभाला।


2022: पंजाब में बड़ा बदलाव, यूपी में योगी कायम

2022 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनाव हुए।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने शानदार जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया।
पंजाब में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और भगवंत मान नए सीएम बने।
उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट हारने के बावजूद दोबारा मुख्यमंत्री बने।
गोवा और मणिपुर में भी बीजेपी सरकार दोबारा सत्ता में लौटी और पुराने चेहरे कायम रहे।


2023: बीजेपी ने बदले चेहरे, कांग्रेस को झटका

2023 का चुनावी साल सबसे ज्यादा चर्चित रहा। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में बड़े उलटफेर देखने को मिले।

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया।
राजस्थान में पार्टी ने वसुंधरा राजे को किनारे कर भजनलाल शर्मा पर भरोसा जताया।
छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय को नया चेहरा बनाकर बीजेपी ने आदिवासी समीकरण साधा।
वहीं तेलंगाना में कांग्रेस की जीत के बाद रेवंत रेड्डी सीएम बने।
मिजोरम में लालदुहोमा ने सत्ता संभाली।


2024: हरियाणा से महाराष्ट्र तक बदले समीकरण

2024 में हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चुनाव हुए।

हरियाणा में बीजेपी ने चुनाव से पहले ही मनोहर लाल खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बना दिया और जीत के बाद भी वही चेहरा कायम रखा।
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की जगह देवेंद्र फडणवीस फिर मुख्यमंत्री बने।
ओडिशा में 24 साल बाद नवीन पटनायक की सत्ता खत्म हुई और मोहन चरण माझी सीएम बने।
आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की वापसी हुई।
वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन फिर सत्ता में लौटे।


2025: दिल्ली में बीजेपी की वापसी, बिहार में नया अध्याय

2025 में दिल्ली और बिहार के चुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।

दिल्ली में बीजेपी ने लंबे इंतजार के बाद सत्ता में वापसी की और रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया।
बिहार में NDA ने बड़ी जीत दर्ज की। नीतीश कुमार ने बाद में पद छोड़ दिया और सम्राट चौधरी बिहार के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बने।


आखिर क्यों बदल दिए जाते हैं मुख्यमंत्री?

1. एंटी-इन्कम्बेंसी से बचने की रणनीति

लंबे समय तक एक ही चेहरा रहने पर जनता में नाराजगी बढ़ सकती है। इसलिए पार्टियां नया चेहरा लाकर “नई शुरुआत” का संदेश देती हैं।

2. जातीय और सामाजिक समीकरण

कई राज्यों में चुनाव जीतने के बाद जातीय संतुलन साधने के लिए नए सीएम बनाए जाते हैं। छत्तीसगढ़ और राजस्थान इसके बड़े उदाहरण रहे।

3. गठबंधन की मजबूरी

जहां गठबंधन सरकार होती है, वहां सीटों और ताकत के हिसाब से मुख्यमंत्री तय किया जाता है।

4. चुनावी हार के बाद सत्ता परिवर्तन

जब सत्ता बदलती है तो मुख्यमंत्री भी बदल जाता है। पंजाब, तेलंगाना और ओडिशा में यही देखने को मिला।

5. पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन

कई बार पार्टी भविष्य की राजनीति को देखते हुए नई पीढ़ी को मौका देती है।


2026 में क्या हो सकता है?

अब सभी की नजर 2026 के चुनावी नतीजों पर टिकी है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के चुनाव खत्म होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या इस बार भी पार्टियां नए चेहरों पर दांव लगाएंगी या पुराने नेताओं पर भरोसा कायम रहेगा।

4 मई को आने वाले नतीजे सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि कई राज्यों की अगली राजनीतिक दिशा भी तय करेंगे।