26 दिन के अनशन के बाद भावुक हुए सोनम वांगचुक, बोले- धिक्कार है ऐसे देश पर; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी कही बड़ी बात

अनशन समाप्त करने पर उठे सवालों के बीच सोनम वांगचुक ने वीडियो जारी कर कहा कि सरकार से कोई समझौता नहीं हुआ। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्र आंदोलन पर भी अपनी बात रखी।

26 दिन के अनशन के बाद भावुक हुए सोनम वांगचुक, बोले- धिक्कार है ऐसे देश पर; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी कही बड़ी बात

सोनम वांगचुक ने कहा- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उनकी शर्तों में शामिल थी
आलोचनाओं पर नाराजगी जताते हुए बोले- अगर सौदा करना होता तो 26 दिन भूखा क्यों रहता
सफदरजंग अस्पताल के हालात पर भी उठाए सवाल, बोले- नॉर्थ कोरिया जैसी स्थिति थी


26 दिन तक चले अनशन के बाद उसे समाप्त करने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सोनम वांगचुक ने एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि अनशन समाप्त करने के लिए जो शर्तें रखी गई थीं, उनमें शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने का सवाल है।

सोनम वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर में जिस तरह का माहौल बना है, उससे शिक्षा मंत्री की छवि को पहले ही नुकसान पहुंच चुका है। उनके अनुसार, लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और उनका मानना है कि शिक्षा मंत्री आज नहीं तो कल पद छोड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं भी होता, तब भी उनका अनशन समाप्त होने के साथ आंदोलन खत्म नहीं होगा और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े छात्र इसे आगे बढ़ाएंगे।

सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों अनशन समाप्त करने को लेकर उठे सवालों पर भी सोनम वांगचुक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनसे पूछा जा रहा है कि उन्होंने किसके हाथों अनशन क्यों तोड़ा, क्या कोई समझौता हुआ या कोई सौदा किया गया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कोई समझौता ही करना होता तो 26 दिन तक भूखे रहने की जरूरत ही क्या थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप बेहद दुखद हैं।

भावुक होते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि अनशन के दौरान उनका करीब 11 किलोग्राम वजन कम हो गया, शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो गईं और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि इतने लंबे संघर्ष के बाद भी यदि उन्हें अपने आंदोलन की नीयत और चरित्र पर सफाई देनी पड़े, तो यह बेहद पीड़ादायक है। इसी दौरान उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "धिक्कार है ऐसे देश पर, जिसमें ऐसे दिमाग़ों की उपज होती है, जिसमें से ऐसे नीच ख़्यालात निकलते हैं।" हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह लोगों को दोष नहीं देते, बल्कि उनका मानना है कि बहुत से लोगों को पूरी परिस्थितियों की जानकारी नहीं है।

सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में अपने इलाज के दौरान की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में माहौल किसी छावनी जैसा था। उनके अनुसार, उन्हें कमरे से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और किसी से मिलने पर भी पाबंदी थी। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों तक संदेश पहुंचाने के लिए उन्हें कभी-कभी नेपकिन पेपर पर लिखकर भेजना पड़ता था, जिसे कई बार जब्त भी कर लिया जाता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि लद्दाख से मिलने आए उनके रिश्तेदारों को भी वापस भेज दिया गया। इन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हालात उन्हें "नॉर्थ कोरिया जैसे" प्रतीत हो रहे थे।