केमिकल ब्लॉक की जर्जर बिल्डिंग का लेंटर गिरा, विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर, छात्र सुरक्षा से खिलवाड़

मुरथल विश्वविद्यालय के केमिकल ब्लॉक में 10 सितंबर को लेंटर गिरने से हादसा टला। कर्मचारी यूनियन ने जांच, मरम्मत और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई मांगी।

केमिकल ब्लॉक की जर्जर बिल्डिंग का लेंटर गिरा, विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर, छात्र सुरक्षा से खिलवाड़

➤ मुरथल विश्वविद्यालय के केमिकल ब्लॉक में लेंटर का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिरा
➤ मई में दीवार गिरने की घटना के बाद भी चार महीने तक नहीं हुई मरम्मत
➤ कर्मचारी यूनियन ने उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की


दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। विश्वविद्यालय के केमिकल ब्लॉक में एक मंजिल के लेंटर का बहुत बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर टूटकर नीचे जा गिरा। गनीमत रही कि जिस समय यह हिस्सा गिरा, उस समय नीचे कोई छात्र मौजूद नहीं था। यदि उस वक्त वहां छात्र होते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी और कोई बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था।

केमिकल ब्लॉक की इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की सुरक्षा और जर्जर भवनों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारी यूनियन ने आरोप लगाया है कि बिल्डिंग की खराब हालत के बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले ही लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद समय रहते आवश्यक मरम्मत नहीं करवाई गई।

मई में भी टूटकर गिर चुकी थी ऊपर की मंजिल की दीवार

केमिकल ब्लॉक में जर्जर भवन से जुड़ी यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले मई 2026 में इसी ब्लॉक की ऊपर वाली मंजिल की दीवार का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। उस समय भी गनीमत रही कि कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया और कोई हताहत नहीं हुआ।

मई में हुई उस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरी घटना की लिखित जानकारी दी गई थी। साथ ही बिल्डिंग की तत्काल मरम्मत करवाने की मांग भी की गई थी। इसके बावजूद कर्मचारी यूनियन के अनुसार, मई से सितंबर तक लगभग 4 महीने से भी अधिक समय बीत गया, लेकिन जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

अब उसी बिल्डिंग में एक मंजिल के लेंटर का बड़ा हिस्सा गिरने के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। यूनियन का कहना है कि यदि मई की घटना के बाद ही बिल्डिंग की स्थिति को गंभीरता से लिया जाता और समय रहते मरम्मत करवाई जाती तो आज की घटना को टाला जा सकता था।

लेंटर गिरने से टला बड़ा हादसा, छात्रों की सुरक्षा पर सवाल

गुरुवार को लेंटर का बड़ा हिस्सा गिरने की घटना ने विश्वविद्यालय में छात्र सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी राहत यही रही कि हादसे के समय नीचे कोई छात्र मौजूद नहीं था। ऐसे में एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

कर्मचारी यूनियन ने इस घटना को विश्वविद्यालय प्रशासन की सरासर नाकामयाबी करार दिया है। यूनियन का कहना है कि किसी जर्जर भवन में लगातार ऐसी घटनाएं होना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान है। खासकर तब, जब पहले हुई घटना के बाद बिल्डिंग की हालत के बारे में प्रशासन को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका था।

यूनियन के अनुसार, भवन की स्थिति को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर वहां आने वाले छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। आज हुई घटना ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि आखिर मई में दी गई सूचना के बाद भी बिल्डिंग की मरम्मत क्यों नहीं करवाई गई।

कर्मचारी यूनियन ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

कर्मचारी यूनियन प्रधान सुरेश कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस लापरवाही की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यूनियन लंबे समय से इस तरह की स्थिति को लेकर चिंतित है और जर्जर भवनों की समय रहते मरम्मत करवाना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।

सुरेश कुमार ने आरोप लगाया कि प्रशासन के लिए बच्चों की जान-माल और उनकी सुरक्षा की कोई अहमियत नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन को केवल अपनी कुर्सी और अपनी एक्सटेंशन की चिंता दिखाई देती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में लड्डू और मिठाइयां बांटी जा रही हैं, क्योंकि माननीय कुलपति जी को कुछ समय के लिए एक्सटेंशन मिल गई है। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि प्रशासन उसी जश्न में डूबा हुआ है, जबकि दूसरी ओर विश्वविद्यालय की जर्जर बिल्डिंगों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है।

उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

कर्मचारी यूनियन ने मांग की है कि केमिकल ब्लॉक में लेंटर गिरने की पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में जर्जर हो चुकी सभी बिल्डिंगों का तत्काल निरीक्षण करवाकर उनकी तुरंत मरम्मत कराई जाए।

यूनियन ने यह भी मांग की है कि छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के लिए जो अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यूनियन का कहना है कि केवल घटना के बाद औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय पहले से चिन्हित जर्जर भवनों की स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी की जान खतरे में न पड़े।

समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह छात्र हित में बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।

यूनियन ने कहा कि आंदोलन की स्थिति पैदा होने पर इसकी समस्त जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले छात्रों और काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जर्जर भवनों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

मई में दीवार गिरने की घटना के बाद भी मरम्मत नहीं होने और अब सितंबर में उसी केमिकल ब्लॉक के लेंटर का बड़ा हिस्सा गिरने से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब प्रशासन जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाएगा या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।